गणपति जी हर शुरू कार्य में प्रथम पूज्नीय होते है। उनकी आराधना के बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं माना जाता है। गजानन कहे जाने वाले गणपति जी का स्वरूप बेहद मनोहर एंव मंगलदायक है। उनके मुख के दर्शन को अत्यंत मंगलमय माना जाता है। उनकी सवारी कहे जाने वाले मूषक भी बेहद प्रिय लगते है। गणपति के अनेक नाम हैं और प्रत्येक नाम के जाप का विशेष महत्व है। इसी प्रकार गणपति के शरीर की आकृति भी उन्हें दूसरे देवों से अलग बनाती है। उनके बड़े कान हमें शुभ वचन सुनने की प्रेरणा देते हैंए वहीं हाथ में मोदक समृद्धि का प्रतीक है। उनका हर अंग हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख देता है और किसी न किसी कार्य को दर्शाता है लेकिन इन सब के बीच आप जानते हैं कि उनका एक अंग ऐसा भी है, जिसके दर्शन करने मात्र से ही आपके आसपास दरिद्रता का वास होता चला जाता है। ऐसा क्यों कहा जाता है कि हमेशा गणेश जी के सामने से ही उनके दर्शन करने चाहिए आइए जानते हैं इसके पीछे क्या है रहस्य
ऋद्धि सिद्धि के दाता यानि गणेश जी का स्वरूप बेहद मनोहर एंव मंगलदायक है। एकदंत और चतुर्बाहु गणपति अपने चारों हाथों में पाष, अंकुष, दंत और वरमुद्रा धारण करते हैं। उनके ध्वज में मूषक का चिन्ह है। ऐसी मान्यता है कि उनके शरीर पर जीवन और ब्रहमांड से जुड़े अंग निवास करते हैं। उनका प्रत्येक शारीरिक अंग अपने भीतर एक चमत्कार छिपाए हुए हैं। जो मानव जीवन को बहुत सी परेशानियों से बाहर निकालते हैं।
कैसे होता है दोष समात
भगवान शिव एंव आदि शक्ति का रूप कहे जानी वाली माता पार्वती के पुत्र गणेश जी के लिए ऐसी मान्यता है कि इनकी पीठ के दर्षनों से घर में दरिद्रता का वास होता है। इसलिए इनकी पीठ के दर्षन नहीं करने चाहिए। अनजाने में पीठ के दर्शन हो जाएं तो मुख के दर्शन करने से ये दोष समाप्त हो जाता है। शास्त्रों में इस गलती का उपाय भी बताया गया है। यदि जाने.अनजाने ऐसा हो जाए तो भगवान गणेश को देखकर सच्चे मन से क्षमा मांगें और उनका पूजा करें। बुधवार के दिन भी उनकी पूजा करेंए इससे अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाएगा।
गरीबी का निवास
ऐसी मानयताएं कि श्री गणेश जी की पीठ के दर्शन से घर में गरीबी का निवास होता है, जिसके कारण हमें कई परेशानियों से गुज़रना पड़ता है। कहते हैं कि अगर इंसान बहुत धनवान भी हो तो पीठ के दर्शनों से घर में दरिद्रता का प्रभाव बढ़ जाता है। फिर धीेरे धीरे जीवन में दुविधाएं बढ़ती चली जाती हैं। 
कैसे मिलता है लाभ
गणपति जी के कानों में वैदिक ज्ञान, सूंड में धर्म, दांए हाथ में वरदान, बांए हाथ में अन्न, पेट में सुख समृद्धि, नेत्रों में लक्ष्य, नाभि में ब्रहमांड, चरणों में सप्तलोक और भगवान गणेश की आंखों में लक्ष्य और पैरों में सात लोक निवास करते हैं। वहीं उनके मस्तक पर ब्रह्मलोक विघमान है। भगवान के दर्शन करने पर इन सभी चीजों का ज्ञान प्राप्त होता है और सम्पूर्ण ब्रह्मांड का आशीर्वाद मिलता है। शास्त्रों के अनुसार जो जातक शुद्ध तन और मन से उनके इन अंगों के दर्शन करता है। उनकी धन, संतान, विद्या और स्वास्थ्य से संबधित सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा जीवन में आने वाले संकटांे से भी छुटकारा मिलता है। 
वास्तु की नज़र से
विघ्नहर्ता गणेष जी धार्मिक उददेष्य से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक पद्धति मानी गई वास्तुषास्त्र विधा में भी गणेशजी का महत्व है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के सारे दोष महज़ गणेश जी की पूजा करने मात्र से ही खत्म हो जाते हैं। इसके अलावा यदि मेन गेट पर गणपति जी की मूर्ति के ठीक पीछे पीठ से पीठ जोड़कर अगर एक और मूर्ति लगा दी जाए। तो सभी दुखों का नाश होता है और वास्तुदोष भी शांत होता है। 
सम्पूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले गणेश जी अपने भक्तों को कभी दुख नहीं देते हैं और सब पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। ताकि उनके भक्तों को हमेषा सुख की प्राप्ति हो और कोई भी समस्या उनको छू न पाए। श्रीगणेश के अलावा भगवान विष्णु जी की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहिए। ऐसा इसीलिए क्यों की पौराणिक ग्रंथो में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु की पीठ पर अधर्म का वास माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति इनकी पीठ के दर्शन करता हैए उसके सभी पुण्य खत्म होते जाते हैं और अधर्म बढ़ता है।

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