दुखहर्ता, विघ्नहर्ता कहे जाने वाले भगवान गणेश हिन्दु धर्म के प्रमुख देवता हैं। इनके पूजा के साथ ही कोई भी शुभ कार्य की शुरूआत होती है। छोटे से छोटा बड़े से बड़ा ही कोई कार्यक्रम क्यों न हो इनकी आरती, वंदना और भोग लगाए बिना शुरू नहीं किया जाता है। हर दुःख, पीड़ा और रूकावट को दूर करने की ताकत किसी भगवान में है तो वो हैं श्रीगणेश। इनके इस गुण के कारण ही शिव पार्वती के पुत्र गणपति को प्रथम पूज्य कहा जाता है। क्या आप जानते हैं हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता गणपति की सबसे बड़ी मूर्ति कहां है? अब आप कहेंगे की भारत में ही होगी और कहां। सबसे पहले आपके दिमाग में महाराष्ट्र का नाम आएगा, क्योंकि सबसे ज्यादा भगवान गणेश की पूजा वहीं होती है। तो यहां पर आप गलत हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की भगवान गणेश की सबसे बड़ी मूर्ति भारत में नहीं बल्कि थाईलैंड में है, जी हां यहां का बच्चा-बच्चा गणेशजी का भक्त है वे गणपति को भाग्य और सफलता के देवता मानकर पूजते हैं। हर घर में गणपति को पूजा जाता है। इसका सुबूत है साल 2012 में थाईलैंड के ख्लोंग शहर में स्थित गणेश इंटरनेशनल पार्क में गणेश जी की कांसे से बनी 39 मीटर ऊंची मूर्ति। आपको जानकर हैरानी होगी की इस गणेश प्रतिमा को दुनिया की सबसे बड़ी गणपति मूर्ति होने का सौभाग्य मिला है।

 मूर्ति से जुडी कुछ विशेष बातें

  1. थाईलैंड की चाचोएन्ग्साओ एसोसिएशन नाम की संस्था धार्मिक कार्यो को करती है। इस एसोसिएशन के प्रेसीडेंट पोल जेन समाचाई वानीशेनी ने अपने ग्रुप के साथ मिलकर ये तय किया की गणेशजी की सबसे बड़ी मूर्ति थाईलैंड में लगायी जाएगी। इस सपने को साकार रूप देने के लिए ख्लोंग शहर में चालीस हजार वर्ग मीटर की जगह को चुना गया यहां की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ होने के कारण इसको पवित्र माना गया। भगवान गणपति की विशाल मूर्ति की स्थापना के लिए पहले इस जमीन पर एक इंटरनेशनल पार्क बनाया गया इसे ‘सिटी ऑफ गणेश’ के नाम से पुकारा जाता है। इस मूर्ति के निमार्ण में  (2008-2012) पूरे चार साल का समय लगा इस मूर्ति को इस तरह से बनाया गया है की तूफान और भूकंप भी इसको नुकसान नहीं पहुचा सकता है।
  2. ये गणपति जी की मूर्ति थाईलैंड के मशहूर मूर्तिकार पिटक चलमलाओं ने बनाई है ये विश्व की सबसे बड़ी गणेशजी की मूर्ति है और पूरे संसार ने इस बात को मान्यता भी दी है। ये थाईलैंड मूर्तिकला का एक सुंदर उदाहरण है जिसको पूरा संसार नमन करता है। थाईलैंड ही नहीं बल्कि पूरे संसार से लोग इस मूर्ति को देखने आते हैं।
  3. आपको बता दें कि 800 से अधिक कांसे के टुकड़े से बनी इस गणेश प्रतिमा की ऊंचाई 39 फीट है। सबसे उंची इस इस गणेश प्रतिमा में सर पर कमल का फूल है और उसके बीच में ओम बनाया गया है। साथ ही थाईलैंड के चार पवित्र फल कटहल, आम, गन्ना, केला को गणपतिजी के चारों हाथों में रखा गया है वहीं गणेश प्रतिमा के पेट पर सांप लिपटा है सुंड में लड्डू रखा है हाथों और पैरों में आभूषण पहना गया है, कमर में तगड़ी बंधी हुई है और पैरों में गणेशजी का वाहन चूहा बैठा हुआ है। थाईलैंड के लोग किसी भी नए काम की शुरुआत करने से पहले इनके दर्शन करने जरुर आते है और इनका आशीर्वाद लेकर ही कोई भी शुभ कार्य शुरू करते हैं। साथ में प्रसाद के रूप में कटहल, केला ,गन्ना ,आम का भोग गणपति को लगाते हैं।

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