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What is made during the festival of Ganesh Chaturthi?

श्री गणेश के 10 दिवसीय महोत्सव के दौरान हम पेरे विधि विधान से गणपति की पूजा अर्चना करते हैं और उन्हें भोग लगाते हैं। गणेश चतुर्थी का उत्सव हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। कहते हैं यह पूरे साल में सबसे अच्छा समय है जब आप भगवान गणेश को प्रसन्न कर सकते हैं। गणेश जी घर में शुभता, खुशहाली और मांगलिकता लेकर आते हैं। ऐसे में गणेश जी को खुश करना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं, गणेश चतुर्थी के दौरान 10 दिन के 10 भोगों के बारे में जिन्हें चढ़ाकर आप भी गणेश जी को प्रसन्न कर सकते हैं।

ये हैं श्री गणेश जी के 10 प्रिय भोग

 

मोदक

यह गणेश जी का प्रिय भोग है। पहले दिन गणपति जी को मोदक का भोग लगाएं। नारियल और गुड़ का मोदक उन्हें सर्वप्रिय है।

 

मोतीचूर के लड्डू

ये लड्डू गणपति जी के साथ.साथ उनके वाहन मूषकराज को भी बहुत पसंद है। शुद्ध घी से बने बेसन के लड्डू को गणपति जी को दूसरे दिन अर्पित करें।

 

नारियल चावल

तीसरे दिन गणपति जी को नारियल वाले चावल अर्पित करें। यह भी उन्हें बेहद पसंद है। नारियल के दूध में चावल को पकाकर भोग लगाएं।

 

पूरण पोली

चौथे दिन भगवान को भोग लगाने के लिए पूरण पोली अच्छी है। यह गणपति जी का प्रसाद भी है। इसे गणेश जी के समक्ष अर्पित करें।

 

श्रीखंड

गणेश जी के पूजन में श्रीखंड सबसे प्रिय भोग माना जाता है। आप चाहें तो श्रीखंड के अलावा पंचामृत या पंजरी का भी भोग भी लगा सकते हैं। यह भोग पांचवें दिन लगाएं।

 

केले का शीरा

छठे दिन भगवान को पके हुए केले का शीरा भोग लगाए। इसे मैश कर सूजी और चीनी में मिलाएं। यह गणपति जी को बेहद पंसद है।

 

रवा पोंगल

सातवें दिन गणपति जी को रवा पोंगल का भोग लगाए। इसे रवा यानी सूजी और मूंग की दाल को पीस कर बनाया जाता है। इसमें घी और ढेर सारे मेवे भी डाले जाते हैं।

 

पयसम

आठवें दिन इसे गणपति जी को भोग लगाएं। यह खीर का ही एक प्रकार है। यह भोग गणेश जी को बहुत पसंद है।

 

शुद्ध घी और गुड़

नौंवे दिन गणपति जी को शुद्ध घी में पका हुआ गुड़ भोग   लगाएं। ये उन्हें बेहद पसंद है। इसमें छुआरे और नारियल भी मिलाया जा सकता है।

 

छप्पन भोग

दसवें दिन गणेश जी के सभी पसंदीदा भोग बनाएं। इसका नाम छप्पन भोग इसलिए है क्योंकि इनकी संख्या 56 होती है। इन 56 भोगों में आप कोई भी भोग बना सकते हैं।

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