बेटियों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाए में मात पिता की होती है अहम भूमिका
नौ साल की उम्र से पहले ही आप अपनी बेटी को कुछ चीजों के बारे में निसंकोच हो कर बताएं
Life Skills for Daughters: हर माता-पिता अपने बच्चों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। आज हम बात करेंगे बेटियों को शारीरिक , मानसिक और भावनात्मक रूप से कैसे मजबूत बनाया जाए, ताकि वो अपने आने वाले भविष्य में किसी बात की चिंता किये बिना पूरे आत्मविश्वास से जिंदगी जी सकें। उनके मन में ना ही अपने शारीरिक बदलाव को ले कर कोई डर या संकोच हो और ना ही वो कमज़ोर समझी जाएं। नौ साल की उम्र से पहले ही आप अपनी बेटी को कुछ चीजों के बारे में निसंकोच हो कर बताएं और उनके सवाल पूछे जाने पर खुल कर उन्हें समझाएं, ताकि आगे आने वाले समय में जब भी आपकी बेटी को किसी बात को ले कर परेशानी हो तो वो सबसे पहले आपसे
ये बात साझा करे।
शारीरिक बदलाव

बेटियों के साथ शारीरिक बदलाव को लेकर संवेदनशीलता और खुलेपन से बात करें। उन्हें ठीक तरह से शारीरिक बदलावों के बारे में जानकारी दें। उन्हें ये भी समझाएं की शारीरिक बदलावों के साथ भावनात्मक बदलाव भी वो महसूस करेंगी पर ऐसे समय में उन्हें परेशान नहीं होना है। बेटियों को हमेशा ही सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करें।
अच्छे रिश्तों की समझ
अपनी बिटिया को हमेशा सिखाएं कि अच्छे दोस्त और रिश्ते किस तरह से जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्हें यह समझाना चाहिए कि रिश्तों में विश्वास, ईमानदारी, और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए, और कभी भी किसी भी रिश्ते में अपमानजनक व्यवहार ठीक नहीं है।
सुरक्षा और मर्यादा
बच्ची को उसकी सुरक्षा के बारे में समझाना बहुत जरूरी है। उसे यह सिखाना चाहिए कि किसी भी अनजान व्यक्ति से न मिलें, इंटरनेट पर सतर्क रहें, और अपने शरीर की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के कुछ उपाय जरूर सीखें। सामने वाला किस तरह से उस के साथ मर्यादा में रह कर बर्ताव कर रहा है या नहीं इस बात के बारे में भी सिखाना बेहद महत्वपूर्ण है।
वित्तीय जिम्मेदारी

बेटी हो या बेटा , उसे यह सिखाना शुरू करना चाहिए कि पैसे की कीमत क्या होती है। थोड़ी-सी पॉकेट मनी के माध्यम से बजट बनाने, बचत करने, और खर्च पर नियंत्रण रखने की आदतें भविष्य में उसे वित्तीय स्थिरता का ज्ञान कराएगी।
आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास
बेटियों को यह सिखाना सबसे ज्यादा जरुरी है कि उन्हें खुद से प्यार करना चाहिए और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए। आत्मसम्मान और आत्मविश्वास जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे जरुरी कदम हैं।
पीरियड्स के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण

बेटियों को पीरियड्स के बारे में समझाना बहुत जरुरी है। इस विषय को शांतिपूर्वक, खुलकर और संवेदनशीलता के साथ समझाना चाहिए। सबसे पहले, यह बताएं कि पीरियड्स एक सामान्य और स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, जो हर लड़की को एक निश्चित उम्र में होती है। यह उसके शरीर के विकास का हिस्सा है और उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। एक पीरियड किट बनाकर उन्हें दें और स्कूल बैग में हमेशा साथ रखने के लिए कहें।
स्वास्थ्य और स्वच्छता
सायानी होती बिटिया को शारीरिक बदलावों के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखने की जरूरत होती है, खासकर पीरियड्स के दौरान। उसे पैड्स, टेम्पोन का सही उपयोग और बदलने के समय के बारे में समझाएं। इस तरह बच्ची किसी भी परिस्तिथि में घबराएगी नहीं बल्कि हिमायत और सूझबूझ से काम लेगी।
