dhyaan ramaane vaala tota -Tenali Rama Story In Hindi
dhyaan ramaane vaala tota -Tenali Rama Story In Hindi

Tenali Rama Story In Hindi : एक बार विजयनगर के महाराज को किसी प्रशंसक ने बोलने वाला तोता उपहार में दिया। तोता इतना सयाना था कि किसी भी भाषा में बोल सकता था। महाराज इस अनोखे उपहार को पाकर बेहद प्रसन्न हुए।

उन्होंने एक निजी सहायक को बुलाया व तोते की जिम्मेदारी का काम सौंप दिया। उसे निर्देश दिए गए, ‘‘इस तोते का अच्छी तरह ध्यान रखना। यह मुझे बहुत प्यारा है। अगर इसे कुछ हुआ तो मैं तुम्हारी गर्दन कटवा दूँगा।’’

नौकर पिंजरे में बंद तोते को कमरे में ले आया। वह उसका पूरा ध्यान रखता था लेकिन उसने एक सुबह देखा कि तोता पिंजरे में मरा पड़ा था। उसे राजा की चेतावनी याद आ गई? इसलिए हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि तोते की मौत की खबर राजा को कैसे दे?

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वह काफी परेशान था। तभी उसे तेनालीराम की याद आई, जो अपनी सूझबूझ के लिए जाने जाते थे। वह उनके घर भागा। तोते के मरने की खबर के साथ सारी बात बता दी व प्राण बचाने की विनती करने लगा। तेनालीराम ने उसे मदद का दिलासा दिया।

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नौकर के जाने के बाद तेनालीराम महाराज के पास पहुँचे व थोड़ा हिचकते हुए कहा “महाराज! आपका तोता!”

“मेरे तोते को क्या हुआ?तुम इतने घबराए क्यों हो?” राजा ने पूछा

“महाराज! तोता न तो बोलता है, न हिलता है। लगता है कि गहरे ध्यान में खोया है।”

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“क्या?” राजा सदमा खा गए। वे तेनालीराम के साथ भागते हुए पिंजरे तक गए, वहाँ जाकर पता चला कि तोता ध्यान में नहीं था, वह तो मर चुका था। महाराज को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने तेनालीराम से कहा- “तुमने पहले क्यों नहीं बताया कि तोता मर गया। बेकार ही मुझे पिंजरे तक दौड़ा दिया।”

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तेनालीराम ने उत्तर दिया –

“महाराज! अगर मैंने आपको पहले तोते की मौत की खबर दी होती तो आप नौकर की गर्दन कटवा देते, मैं आपको समझाना चाहता था कि कोई भी किसी के भी जीवन का आश्वासन नहीं दे सकता। जीवन मृत्यु तो ईश्वर के हाथ है।”

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महाराज को अपनी गलती का एहसास हुआ व उन्होंने नौकर को कोई सजा नहीं दी। नौकर ने तेनालीराम को धन्यवाद दिया। तेनालीराम की चतुराई ने ही उसके प्राण बचाए थे।

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