Jataka Story in Hindi : दो तोते थे। उन्हें दूर देशों की यात्रा करना व नए-नए स्थान देखना बेहद पसंद था। एक दिन वे महल के बगीचे में पहुँचे तो वहाँ बिछाए जाल में फँस गए। सिपाही उन्हें राजा के सामने ले गए।
राजा उनकी सुंदरता पर मोहित हो उठा। उसने सिपाहियों को हुक्म दिया कि तोतों को सोने से बने खास पिंजरे में रखा जाए।
दोनों तोते पूरे नगर में चर्चा का विषय थे। शाही मेहमान भी उन अद्भुत पक्षियों की प्रशंसा करते। उन्हें अपना मनचाहा भोजन मिलता।

वे बड़े सुख-चैन और विलासिता के बीच रह रहे थे। किंतु महल में एक बड़ा बंदर आने से हालात बदल गए। लोगों ने इससे पहले इतना बड़ा बंदर नहीं देखा था। लोगों का ध्यान उस बंदर की ओर चला गया। वह महल में राजा और अधिकारियों के आकर्षण का केंद्र था। लोग झुंड बना कर उसे देखने आते व उसकी मजेदार हरकतों का आनंद लेते।

अब दोनों तोते खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे। उन्हें ध्यान से दाना-पानी भी नहीं दिया जाता था। इससे छोटे तोते को बहुत बुरा लगा। उसने बड़े तोते से कहा-‘‘हमें यहाँ कोई प्यार नहीं करता। चलो पिंजरे से निकल कर, कहीं दूर उड़ चलें।’’
दूसरा तोता ज्यादा समझदार था, उसने जवाब दिया।
‘‘प्यारे दोस्त, बुरा मत मानो, आकर्षण-अनाकर्षण, निंदा व आलोचना, आदर व अनादर तो अस्थायी हैं। धीरज रखो, लोग जल्द ही बंदर की हरकतों से ऊब जाएँगे-तब उन्हें हमारी सच्ची कीमत का एहसास होगा।’’


जल्द ही बंदर लोगों के साथ बुरा बर्ताव करने लगा। उसकी शरारतें बढ़ती जा रही थीं। राजा ने देखा कि वह काफी आक्रामक हो गया था। इसलिए सिपाहियों से कहा गया कि उसे जंगल में छोड़ आएँ।
अब फिर से सभी लोग प्यारे, सुंदर व सलीकेदार तोतों में रूचि लेने लगे थे।
शिक्षा:- धीरज रखो, इंसान की सच्ची कीमत कभी छिपी नहीं रहती, वह हमेशा आदर पाती है।

