googlenews
सिकुड़ते रिश्ते-गृहलक्ष्मी की कहानी: Hindi Story
Sikudate Rishtey

Hindi Story: शाम होते ही सोसायटी में लोगों की चहल पहल दिखाई देने लगती।बच्चे बगीचे और मैदान घेरे लेते और बुजुर्ग बेंच पर बैठ धीरे- धीरे बातों में समय बिताने लगते। महिलाएं शाम की सैर करते करते अपनी सहेलियों से मन की बातें कर जी हल्का कर लेती।

ऐसी ही एक शाम में अलका  ने अपनी नई  नई बनी सहेली प्रीति से कहा,” यार, मैं कल से नहीं आ पाऊंगी।”

प्रीति की चाल धीमी हो गई और उसने झट से पूछा,” अरे! ऐसा भी क्या हो गया?”

” सोमवार को मेरे सास ससुर आ रहे है और उन्हे छोड़ने जेठ जेठानी जी भी आयेंगे। उनकी तैयारी करनी है।”अलका ने जवाब दिया।

प्रीति ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा,” सचमुच ये ससुराल वाले बहुत परेशान करते है।मैने तो अजय से कह दिया है कि मुझे इन झंझटो में मत डालना ।मैं तो बड़े परिवार में एडजस्ट ही न कर सकूं।अजय भी अपने दोनो भाईयो और बड़ी बहन से कम ही रिश्ता रखते है।तुम भी जरा स्मार्ट बनो।”

तभी अलका का फोन बज उठा ।फोन उसकी बेटी का था जो कुछ जरूरी काम से इसे बुला रही थी।
 दोनो सहेलियों की बात अधूरी ही रह गई और दोनों अपने अपने घर चली गई।

तीन चार दिन बाद प्रीति दवाई की दुकान से अपनी दवा ले रही थी कि उसने देखा अलका की बेटी अपनी दादी के साथ खड़ी।
” अरे! पीहू तुम ! मम्मी घर पर है क्या??”

पीहू ने दवा का पर्चा दिखाते हुए कहा,” आंटी ,मम्मी की तबीयत बहुत खराब है।”

प्रीति ने चिंता भरे स्वर में पूछा,” क्या हुआ मम्मी को?”
पास खड़ी अलका की सास ने कहा,” बेटी, अलका के लीवर में सूजन आई है,कल ही रिपोर्ट आई है। बस ईश्वर उसे जल्दी ठीक करे।”
प्रीति ने कहा,” आंटी जी फिर खाना वगैरह…”

पीहू बोली,” आंटी मेरी बड़ी मम्मी और दादी मिलकर सब करते है।”

दादी और पीहू दवा लेकर निकल गए।
प्रीति भी अपनी दवा लेकर फुर्ती से घर पहुंची और तुरंत अलका को फोन लगाया।

अलका ने कमजोर आवाज में कहा,” हां ,प्रीति कैसी हो?”

” अरे! मैं ठीक हूं,तुझे क्या हुआ? मुझे बताया तक नही।कैसी हो?? इतने मेहमान है तेरे घर तेरा तो आराम ही नही होता होगा ना।सबको रवाना क्यों नही कर देती?”
प्रीति ने एक सांस में बात कह दी।

” प्रीति,मेरे घर वाले बहुत अच्छे है और सभी को मेरी चिंता है।पीहू को भी फिकर नही करनी पड़ती।सब घर पर है तो मैं निश्चिंत हो गई हूं।हॉस्पिटल में भी जाना हो तो घर की,पीहू की कोई चिंता नहीं होती।” अलका ने कहा।

अलका ज्यादा नहीं बोल पा रही थी इसलिए तुरंत ही फोन रख दिया।

प्रीति फोन रखते ही अतीत के गलियारों में खो गई ।उसे याद आया कि जब उसका बेटा वंश पैदा होने वाला था तब उसकी सास ने कितनी बार कहा था कि वो प्रीति के साथ रहना चाहती है लेकिन प्रीति नही मानी थी और अपने मायके चली गई थी। ननद के साथ भी प्रीति की नही जमती थी।  दिवाली  पर भी प्रीति को अपने ससुराल से ज्यादा हिल स्टेशन जाना अच्छा लगता।पति भी घर में शांति बने रहे इसलिए ज्यादा नहीं बोलता।समय मिलने पर अकेले अपने परिवार से मिलकर आ जाता।प्रीति को अकेले रहना ही पसंद था।

कुछ दिन बीते और अलका ठीक हो गई और उसने प्रीति को अपने घर बुलाया।

प्रीति जब अलका के घर गई तो अलका की जेठानी ने चाय नाश्ता दिया।
प्रीति ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा,” आपके जैसी जेठानी और सास हर किसी को नही मिलती।”
अलका की सास बोली,” ऐसा नहीं है बेटी।कोई भी रिश्ता परफेक्ट नही होता।हमारी भी तू तू मैं मैं हो जाती है लेकिन फिर एडजस्ट कर लेते है।रिश्ते तो ऐसे ही होते है।निभाने की इच्छा दोनो तरफ से होनी चाहिए।आजकल रिश्ते सिकुड़ते जा रहे है।ऐसे समय हम सबको मिल जुलकर एक परिवार बनकर रहना ही चाहिए।”

प्रीति को अब रिश्तों की मिठास की खुशबू आने लगी थी ।उसे भी लगा कि सचमुच अलका कितनी खुशनसीब है कि ऐसा परिवार मिला।

सबसे मिलकर प्रीति घर आई तो उसने वंश से कहा,” बेटा,  दादा दादी के घर जाना है?”
वंश बोला,” हा चलो चलो।पिंकू भी है वहां ,बहुत मजा आएगा।”

रात पति के आते ही प्रीति ने अपने दिल की बात कही तो पति का मुंह खुला का खुला रह गया।उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि प्रीति ऐसा कुछ बोलेगी।

टिकिट कन्फर्म होते ही वे सभी घर पहुंचे।
प्रीति की सास वंश को देख अपने आंसू न रोक पाई।
पिंकू तो खुशी से झूम उठा।
प्रीति को गले लगाकर उसकी सास ने कहा,” बहुत अच्छा लगा बेटी । तुम लोग आ गए।”

प्रीति ने भी महसूस किया कि सचमुच यदि इंसान चाहे तो अपने सारे रिश्ते खुशी खुशी निभा सकता है।थोड़ी बहुत बोलाचाली हो भी जाए तो भी क्या ,रिश्ता तो निभाना ही चाहिए।

आज के व्यस्त जीवन में जब एकल परिवार में रहना लोगो की पसंद बन गया है और रिश्तों में पहले जैसी मिठास नही तब हम सबका फर्ज़ बनाता है कि सब मिलजुलकर एक परिवार बनकर रहे ।रिश्तों को विस्तार दे ना कि उन्हे सिकुड़ने दे।

Leave a comment