googlenews
डील -गृहलक्ष्मी की कहानी
Deal-Grehlakshmi ki Kahaniyan

“पायल, कपड़े धोने का काम है। बोल…कर लेगी ना! और वही पहले वाला हिसाब रहेगा।”- ऋतु ने अपनी नौकरानी पायल से कहा।

“हां दीदी…। ₹700 महीने, सप्ताह में 2 दिन शनिवार, रविवार। “

ऋतू और उसकी सास एक – दूसरे को देखकर व्यंग्यात्मक हंसी हंसते हुए मानो मन ही मन कह रही थीं कि इस सौदे में उन्होंने पायल को बेवकूफ बना दिया। 

 “पायल, बाथरूम में वाशिंग मशीन है। उसमें पानी डाल दे। तब तक मैं कपड़े लेकर आ रही हूं।”

“जी दीदी….।” – पायल ने कहा और बाथरूम की ओर चल पड़ी।

सासू मां ने कहा – बेटी, अब 10-12 दिनों के सारे इकट्ठा कपड़े आज मैं दे देती हूं।

ऋतू ने हंसते हुए कहा – हमारी डील अच्छी रही ना मां जी? ठंड में जान देकर क्या फायदा?

ऋतु ने कई दिनों के सारे गंदे कपड़े लाकर पायल के सामने पटक दिये। 

तभी सासू मां ने आवाज लगाई  – “ऋतू तुम्हारा कॉल है बेटी” 

” जी मां जी। “

हेलो,जी बताएं सर…।  – ऋतु मोबाइल पर बात कर रही थी – मैंने काफी सोचा…आपकी कहानियों को इंग्लिश में ट्रांसलेट तो कर दूंगी, परन्तु परंतु चार्ज पर वर्ड का लगेगा। 

मोबाइल की दूसरी तरफ से आवाज आई –  पर पहले तो आप पर स्टोरी चार्ज लेती थीं, चाहे वो छोटी हो या बड़ी ? अब तो आप के नखरे बढ़ गए हैं ऋतु जी।

सर, आपकी कई स्टोरीज बहुत बड़ी होती हैं, और मेहनताना कम लगता था। और फिर, उन दिनों मैं बैचलर थी। अब शादी हो गई है और जिम्मेदारियाँ भी बढ़ गई हैं। 

ओके, लेट मि थिंक। – उधर से फोन कट गया।

वह बाथरुम के पास गयी, तो पायल ने कहा – वो दी, मैं कह रही थी कि आपने कपड़े ज्यादा दे दिए हैं। अगर ऐसा है तो प्रति कपड़े ₹10 दे दो, चाहे जब भी धुलवाना हो, आ जाऊंगी। इतना कपड़ा धोने में तो शाम हो जाएगा।

पर तू तो पहले….। अब तो तेरे भाव बढ़ गए हैं । – ऋतु ने आँखें बड़ी करते हुए पायल से कहा।

दीदी, ऐसा नहीं है। छोटकी का गांव के स्कूल में एडमिशन करा दिया है। पहले की बात कुछ और थी।

ऋतु ने उसकी जगह खुद को महसूस किया और कुछ सोच कर बोली -” मैं समझ सकती हूँ। तू काम कर..।

This article first appeared on Sahitya Vimarsh and is republished here under a Creative Commons license.

Leave a comment