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बारिश की बूँदें...गृहलक्ष्मी की कहानियां
Baarish ki Bunde

खाना बनाकर बालकनी में गई तो देखा, बारिश हो रही है|
एकाएक मिनी की याद आंखों को भिगो गईं, यदि आज हॉस्टल ना जा घर पर होती तो जहां
काले बादल देखना शुरू करती तभी से“माँबाहर आओ…बाहर आओ कह-कहके तंग कर देती|”
फिर जब तक बारिश होती रहती, शायद ही कोई काम मुझे सुकून से करनेदेती…
किन्तु आज मेरा मन-मेरा घर तो प्यार की अथाह बूंदों से भी खाली सा ही लग रहा है|
“हमारी बेटियां होती ही बहुत प्यारी हैं, जो हर खालीपन को अपने अनुपम प्रेम से सदा ही भरा
रखती हैं|”

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