रामनगर की रामलीला
Ramleela

Ramleela: आज रामलीला के मंचन में काफी बदलाव हुआ है। रामलीलाएं आज जहां आधुनिक हुई हैं, वहीं पर वाराणसी में रामनगर की रामलीला आज भी अपने पुराने रूप में कायम हैं। आइए जानें राम नगर की रामलीला की कहानी।

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रामलीला भारत की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है, प्राचीन समय से रामलीला का मंचन भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में होता रहा है। रामलीला की अगर बात करें और काशी की रामनगर लीला की बात न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। रामनगर की रामलीला भारत की सबसे प्राचीन रामलीलाओं में से एक है। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के रामनगर में दो सौ साल पुरानी रामलीला में आज भी प्राचीन परंपराओं का पालन होता है। गंगा किनारे बसा रामनगर रामनवमी के अवसर पर पूरी तरह से राममय हो जाता है। अध्यात्म के रस में पूरी तरह डूबे इस नगर की शोभा देखते ही बनती है, श्रद्धा-भक्ति एवं समर्पण का ऐसा दुर्लभ वातावरण अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। रामलीला में रामचरितमानस के अनुसार भगवान श्रीराम के जीवन की लीला का मंचन होता है।
आज एक ओर जहां रामलीलाएं आधुनिक हुई हैं। रामलीलाओं के मंचन में काफी बदलाव आया है। लाइट्ïस साउंड का इस्तेमाल खूब बढ़ा है। रामलीलाएं पूरी तरह से हाईटैक हुई हैं। वहीं रामनगर की रामलीला की सबसे खास बात यह है की आज भी यहां रामलीला में बिजली की रोशनी एवं लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होता और न ही भड़कीले वस्त्र तथा आभूषण का प्रयोग होता है। यह रामलीला आज भी उसी अंदाज में होती है और यही इसे और जगह होने वाली रामलीला से अलग करता है।
समय में परिवर्तन के साथ आज भले ही यहां होने वाली रामलीला के दर्शक और रामनगर का स्वरूप एवं माहौल भले ही बदला हो लेकिन रामलीला बिल्कुल नहीं बदली है। पात्रों की सज्जा-वेशभूषा, संवाद-मंच आदि सभी स्थलों पर गैस और तीसी के तेल की रोशनी, पात्रों की मुख्य सज्जा का विशिष्ट रूप, संवाद प्रस्तुति के ढंग और लीला का अनुशासन ज्यों का त्यों बरकरार है। आस्था और श्रद्धा-भक्ति का ऐसा संयोग अन्यत्र दुर्लभ है और यही अंदाज देश-विदेश के दर्शनार्थियों को लुभाये बिना नहीं छोड़ता।
हर प्रसंग के लिए पृथक-पृथक लीला स्थल निर्धारित है। लगभग चार किलोमीटर की परिधि में अयोध्या, जनकपुर, लंका, अशोक वाटिका, पंचवटी आदि स्थान हैं जो रामचरित मानस में वर्णित है। लीलाप्रेमियों का अनुशासन, शांति, समर्पण, लीला के प्रत्येक प्रसंग को देखने तथा नियमित आरती दर्शन की ललक बनाएं रखती है।
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का लिखित इतिहास तो नहीं है, लेकिन किंवदंतियों के अनुसार इसकी शुरुआत महाराज उदित नारायण सिंह के शासन काल में हुई थी।
कुल मिलाकर इस विश्व प्रसिद्ध ‘रामलीला’ में बनारसी मस्ती एवं बनारसी संस्कृति का अद्भुत रूप परिलक्षित होता है। पूरे एक महीने तक चलने वाली इस रामलीला में लीला प्रेमियों की मस्ती देखते ही बनती है। यहां प्रतिदिन 10 हजार से अधिक लीला प्रेमी जुटते हैं। महत्त्वपूर्ण प्रसंग की लीलाओं के दिन तो दर्शकों व श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख से भी अधिक हो जाती है। जैसे राम जन्म, धनुष यज्ञ, और राज्याभिषेक की आरती आदि।
रामनगर की रामलीला वर्षों से भारतीय संस्कृति के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान देती आ रही है, यही कारण है की रामनगर की रामलीला विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसका मंचन देखने लोग खासतौर पर आते हैं।