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मिहिर का सपना-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात
Mihir Ka Sapna

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

मिहिर का सपना: मिहिर आठवीं कक्षा में पढ़ता था। उसको विज्ञान में बहुत दिलचस्पी थी। एक बार विज्ञान के पाठक साहब ने प्रदूषण के बारे में पाठ पढ़ाते हुए कहा, “दिन ब दिन पृथ्वी पर कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। जिससे वातावरण का तापमान भी ऊँचा हो रहा है। ऐसे प्रभाव को ग्लोबल वोमिंग कहते है।

मिहिर को इस ग्लोबल वॉर्मिंग में अधिक दिलचस्पी होने लगी। उसके बारे में उसने पाठक सर के साथ अधिक चर्चा की। साहब ने उसे इस विषय की एक किताब पढ़ने को दी। मिहिर उस किताब को अपने घर ले गया। शाम के खाने के बाद वह पढ़ने बैठ गया। देर रात तक वह पढ़ता रहा। उसको लगा कि पृथ्वी पर कार्बन-डाइ-ऑक्साइड पैदा ही न हो तो कैसा? ऐसा सोचकर वह सो गया।

नींद में उसको सपना आया। सपने में एक परी आई। परी उसको भगवान के पास ले गई। भगवान ने पूछा, “मिहिर, ठीक तो हो न?”

मिहिर बोला, “प्रभु! मैं ठीक हूँ पर…एक चिंता मुझे सता रही है।”

भगवान ने पूछा, “कौन-सी चिंता?”

मिहिर ने कहा, “प्रभु! आपने इस सुंदर दुनिया का सर्जन किया है। कितने सुंदर झरने, नदी, पर्वत, उपवन है। पर इस सबका नाश हो जाने की चिंता सताती है।

भगवान हंसकर बोले, “बेटा, इसके लिए तो तुम मानव ही जिम्मेदार हो। तुम लोगों ने पृथ्वी पर बहुत अधिक कारखाने खड़े किए हैं। अधिक वाहन दौड़ाते हो। जंगल को बेरहमी से काटते हो। पृथ्वी पर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। तू उन लोगों को समझा कि ऐसी विनाशक प्रवृत्ति ना करें।”

मिहिर बोला, “प्रभु! इनसान नहीं मानेगा। उसे सुख-सुविधा भुगतने का पागलपन हो गया है। लेकिन प्रभु! आप ही कुछ कर दीजिए न?”

भगवान ने हंसकर कहा, “मैं क्या करूँ जो तुझे अच्छा लगेगा?”

मिहिर ने तुरंत ही कहा, “प्रभु! ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह यह कार्बन-डाइ-ऑक्साइड ही है। प्रभु! पृथ्वी पर यह वायु पैदा ही न हो, ऐसा कर दीजिए।”

भगवान हंसकर बोले, “मिहिर, इससे तो तुम लोगों का ही नुकसान होगा।”

मिहिर बोला, “इसमें कौन-सा नुकसान? यह तो फायदे की बात है।”

भगवान ने कहा, “ठीक है, तेरी मरजी के मुताबिक हो।”

यह सुनकर मिहिर खुश हो गया। उसको परी फिर से पृथ्वी पर छोड़ गई।

मिहिर ने स्कूल में जाकर पाठक सर से बात करते हुए कहा, “सर, अब पृथ्वी पर कार्बन-डाइ-ऑक्साइड पैदा नहीं होगा। भगवान ने मुझे वचन दिया है।”

पाठक सर को आश्चर्य हुआ! उसने कहा, “मिहिर, यह नामुमकिन है। हमारे उच्छ्वास में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड होता है। देख प्रयोग करके दिखाता हूँ। ऐसा कहकर सर ने एक बीकर में चूना के नीतार का पानी लिया, फिर एक स्ट्रोक लेकर उसमें डुबोई, मुंह के झरिए फूंक मारने लगा। उच्छ्वास में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड होता है जो चुना के नीतार वाले पानी को दुधिया बनाता है। लेकिन यह क्या? सर ने कई फूक लगाई फिर भी पानी दुधिया नहीं हुआ। यह देखकर मिहिर ताली बजाकर बोला, “देखा सर! भगवान का दिया हुआ वर सफल हुआ।”

इस तरह थोडे दिन बीते। पूरा एक मास हुआ। मिहिर के घर के बाग में कुछ पौधे थे। ये पौधे मुरझाने लगे। मिहिर हर रोज उनको पानी देता था। फिर भी ऐसा क्यों हुआ? वह उसके प्यारे से गुलाब के पौधे के पास जाकर बैठा और बडबडाने लगा. “ये सब पौधे मरझा क्यों गए?”

गुलाब के पौधे ने कहा, “मिहिर, तेरे वरदान के कारण।”

मिहिर ने विस्मित होते हुए कहा, “अरे, यह किस तरह से?

गुलाब के पौधे ने समझाते हुए कहा, “सुन मिहिर, खुराक न मिले तो सजीव का विकास नहीं होता। हम वनस्पति सूर्य प्रकाश की उपस्थिति पर वातावरण में से कार्बन-डाइ-ऑक्साइड लेकर स्टार्च बनाते हैं। लेकिन तेरे वरदान के कारण हवा में यह वायु ही पैदा नहीं होती है। इसके नतीजे- हमें पोषण मिलना बंद हो गया है और हम सब मुरझाने लगे हैं।

मिहिर को सच बात समझ में आ गई। अगर थोड़े और महीने इस तरह चलता रहे तो पृथ्वी पर से वनस्पति का नाश हो जाएगा। उसके द्वारा वातावरण को ऑक्सीजन वायु मिलनी बंद हो जाएगी। मिहिर को अब अपनी गलती समझ में आ गई। इसी चिंता में वह सो गया।

फिर परी सपने में आई। मिहिर उसके साथ भगवान को मिलने गया। भगवान ने पूछा, “मिहिर, फिर से क्यों आना हुआ?”

मिहिर ने हाथ जोड़कर अपनी गलती की माफी मांगी। पृथ्वी पर की सारी हकीकत बताई। फिर विनती की।

“प्रभु! वरदान वापस खींच लो।”

भगवान ने वरदान वापस खींच लिया। बाद में मिहिर के सिर पर हाथ रखकर बोले, “बेटा, कुदरत के चक्र में जो उपयोगी है, उसका निर्माण मैंने किया है। उसमें तुम मनुष्यों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा करोगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी।”

मिहिर को भगवान की यह बात समझ में आ गई।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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