Motivational Story: ऊर्जा ने सूरजमुखी रंग का सलवार कुर्ता पहना जो उसके तम्बई रंग को और निखार रहा था. ऊर्जा की मम्मी और भाभी भागती दौड़ती किसी तरह दफ़्तर से घर पहुंची.भाभी ने बैग रखते ही रसोई का रुख किया तो देखा ,ऊर्जा ने पूरी तैयारी कर रखी हैं.
प्याज़ कचौड़ी,समोसे, मूंग दाल हलवा, दही बड़े और खांडवी. भाभी ने कहा”ऊर्जा थैंक्यू”
ऊर्जा बोली”अरे तो आप थकी हारी आयी हो और मैं तो सुबह से खाली ही तो थी”
“आप तैयार हो जाइए,मैं चाय बना देती हूँ”
तभी घँटी बजी और मेहमान अंदर आ गए.ऊर्जा 22 साल की खूबसूरत नवयुवती हैं.इसी वर्ष उसने गृहविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था.ऊर्जा का एक सपना था वो हीरोइन बनना चाहती थी.उसे बॉलीवुड या हॉलीवुड में हीरोइन नही बनना था.वो अपने परिवार की हीरोइन बनना चाहती थी.
ऊर्जा अपने गृहविज्ञान की सारी शिक्षा घर को सुंदर बनाने में लगाना चाहती थी.उसे नौकरी नही करनी थी.मम्मी तो ऊर्जा की बात सुनकर सिर पकड़कर बैठ गई”अरे पागल क्या बोल रही हैं,आज के युग मे पति और पत्नी दोनो का कमाना बेहद जरूरी हैं”
“ऊर्जा अगर मैं नौकरी नही कर रही होती तो तेरे पापा के जाने के बाद ,हम लोग सड़क पर आ गए होते”
भाभी भी मम्मी की हां में हाँ मिलते हुये बोली”ऊर्जा इन घर के कामो को कौन पूछता हैं?ये सब तो एक नौकरानी भी कर सकती हैं”
पर ऊर्जा ने जब कहीं भी नौकरी के लिये आवेदन नही किया तो थक हार कर भैया ने ऊर्जा का प्रोफाइल मेट्रीमोनियल साइट पर डाल दिया.
आज विवाह की बात करने ही परिमल और उसका परिवार आया हुआ था.
ऊर्जा के बनाये हुये पकवान, पेंटिंग ,चादर देखकर परिमल की मम्मी बहुत खुश हो रही थी.परिमल की आंखों में भी प्रशंसा के भाव थे.
परिमल ने ऊर्जा से पूछा”ऊर्जा आगे क्या इरादा हैं”
ऊर्जा बोली”मुझे तो अपने परिवार की रानी बनना हैं”
परिमल बोला “मतलब”
ऊर्जा हंसते हुये बोली”मतलब मुझे किसी की नौकरी नही करनी हैं “
“जिस तरह हीरोइन अपनो की सारी समस्याओं का चुटकी में हल कर देती हैं,ऐसा ही मुझे करना हैं”
परिमल बोला”मुझे सपनो की दुनिया मे रहने वाली हीरोइन नही, कदम से कदम मिला कर चलने वाली जीवनसाथी चाहिए. घर के काम तो कोई भी कर सकता हैं”
और फिर ये सिलसिला तीन साल तक चलता रहा.सबको ऊर्जा और परिवार पसंद आ जाता पर किसी को ये बात समझ नही आती थी कि ऊर्जा क्यों पढ़लिख कर नौकरी नही करना चाहती है.
हर बार लड़के वाले ना कह देते थे.
ऊर्जा ने धीरे धीरे पूरे घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी.बरसो से निर्जीव पड़ा हुआ घर फिर से सजीव हो उठा था.हालांकि परिवार को इस बात की चिंता लगी रहती थी कि कब और कैसे ऊर्जा की शादी होगी परन्तु जल्द ही ऊर्जा के जीवन मे उसके हीरो का प्रवेश हो गया.
ऊर्जा को अरमान अपनी सहेली के विवाह में मिला था और ना जाने कब और कैसे ,अरमान के दिल मे ऊर्जा उतर गई थी. अरमान को जीवन मे पहली बार कोई लड़की पसंद आई थी.इसलिये अरमान के मम्मी पापा तुरन्त ऊर्जा के लिये रिश्ता लेकर आ गये थे.
ऊर्जा नौकरी करेगी या नही या वो अभी तक घर पर खाली क्यों बैठी हैं, ऐसी बाते करने का अवसर ही नही मिल पाया था.चट मंगनी और पट ब्याह हो गया और धड़कते दिल मे ढेरों अरमान लेकर ऊर्जा अरमान के जीवन मे आ गई.
जब हनीमून पीरियड समाप्त हुआ तो ऊर्जा की सास ललिता जी बोली”ऊर्जा बेटे ,अब क्या करना हैं?”
ऊर्जा बोली “मम्मी आपको दादी बनाने की तैयारी करनी हैं”
ललिताजी एकदम सकपका गयी.उन्हें लगा कि ऊर्जा मज़ाक कर रही है.
ललिता सरकारी बैंक में मैनेजर थी.वो बेहद ही महत्वाकांक्षी महिला थी.उनके जीवन मे काम ही प्रमुख था.उन्हें समझ ही नही आ रहा था कि कोई लड़की आज के समय मे ऐसी दकियानूसी सोच कैसे रख सकती हैं.
आज ललिता ने अपनी सहेलियों को ऊर्जा से मिलवाने के लिये बुलाया था.ऊर्जा ने लाल रंग की बनारसी साड़ी पहनी हुई थी.ऊर्जा बेहद खूबसूरत पर पारंपरिक लग रही थी.इसके विपरीत ललिता ऑर्गनज़ा सिल्क में आधुनिकता की प्रतिमूर्ति लग रही थी.
ऊर्जा की पाककला ,ड्राइंगरूम की साजसज्जा देखकर सभी दंग रह गए थे.पर बात घूम फिर कर फिर उसी बात पर अटक गई.
“बेटा अब आगे क्या इरादा हैं?”
ऊर्जा ने फिर खिलखिलाते हुये कहा”आंटी अब क्या करना हैं, घर की देखभाल करनी हैं और जल्द ही आपलोगो का प्रमोशन करवाना हैं”
ये सुनते ही हंसी का फ़व्वारा फूट पड़ा.नंदिनी आँखे मटकाते हुये बोली”ललिता तुमने तो मेरी बेटी का रिश्ता ये कह कर नकार दिया कि तुम्हे आत्मनिर्भर बहू चाहिए”
“पर तुम्हारी बहू तो सत्तर के दशक का मॉडल लगती हैं” पूरा कमरा सम्मलित ठहाको से गूंज उठा.
ललिता अपमान का घूंट पी कर रह गई.
अगले दिन सवेरे जैसे ही ऊर्जा रसोई में घुसने लगी तो ललिता बोल उठी”ऊर्जा अपनी पढ़ाई लिखाई को क्यों इन फालतू के कामो में बर्बाद कर रही हो?ये काम तो कोई नौकरानी भी कर सकती हैं”
ऊर्जा मस्ती में बोली”मम्मी तो क्या केवल अनपढ़ स्त्रियां ही घर के काम करने योग्य हैं.पढ़ी लिखी स्त्रियां क्या घर को अधिक अच्छे से नही संभालेगी”
ललिता ने अपने बेटे अरमान से कहा”तू क्यों मुँह में दही जमा कर बैठा हुआ हैं.तेरे सर्किल में ऐसी घरेलू बीबी चल पाएगी”
“ऊर्जा और कल को तुम्हारे बच्चे होंगे ना तो वो ही तुम पर शर्म महसूस करेंगे, ये सोच कर कि उनकी मम्मी घर पर पड़े हुये मुफ्त की रोटियां तोड़ रही है “
ये बात सुनकर ऊर्जा की आंखे छलछला गयी.कहाँ गलत हैं वो ,उसने तो ये ही सोचा था कि वो अपने बच्चों को वो असुरक्षित बचपन नही देगी जैसा उसने गुजारा था.उसकी तो बचपन की यादे बस मैगी, क्रच, कोल्डड्रिंक, ठंडा खाना,बिखरा हुआ घर और मम्मी का हरदम होकर भी नही होना”.
रात को ऊर्जा थके हुये मन से अरमान से बोली कि वो नौकरी के लिये आवेदन करना चाहती हैं.
अरमान बोला”पगली तुम मेरी जीवन साथी हो मम्मी की नही”
“मुझे कोई समस्या नही हैं तुम्हारे घर को संभालने से,बल्कि सच कहूं पहली बार घर घर लगता हैं”
उस दिन के बाद फिर कभी इस बारे में कोई बात नही हुई पर ललिता की नज़रों में ऊर्जा सदा के लिये एक कामचोर और निखट्टू बहू बन गयी थी जिसकी अपनी कोई पहचान नही हैं.
देखते ही देखते एक वर्ष बीत गया और ऊर्जा के विवाह की आज पहली वर्षगांठ थी.अब ऊर्जा के सामने एक और सवाल उठ खड़ा हुआ था.
“अरे घर पर क्यों बैठी हो, अभी तो बच्चे भी नही हैं जो उनकी देखभाल के लिये घर पर रहती हो”
“अगर घर पर ही रहना हैं तो जल्दी से परिवार पूरा करो”ऐसी कितनी बाते ऊर्जा से ही पूछी जाती थी.
ऊर्जा सोचती थी कि पहले से ही पति का कार्य परिवार और पत्नी के लिये धन अर्जित करना होता हैं और पत्नी का घर और उसके सदस्यों की अच्छी देखभाल करना पर ये समीकरण आज की तारीख़ में ग़लत क्यों हो गया हैं?
ललिता ने अपनी बहू और बेटे के विवाह की पहली सालगिरह के उपलक्ष्य में एक शानदार पार्टी का आयोजन किया था.पर गाहे बगाहे वो ऊर्जा को सुना रही थी”ऊर्जा इस पार्टी का पूरा ख़र्च में उठा रही हूँ,आगर तुम्हारे पापा से कहती ना तो वो तो हाथ खड़े कर देते”
ललिता किसी भी तरह ऊर्जा को आर्थिक आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ना चाहती थी.पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी ,ऊर्जा लाल साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थी और सब घर वालो की मीठी चुहल के कारण उसे गाल भी कश्मीरी सेब की तरह लाल हो रहे थे.पार्टी निबट जाने के पश्चात ललिता ने ऊर्जा से कहा”ऊर्जा कल तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चलना ,मुझे अपनी भी वार्षिक जांच करानी हैं और अब मैं भी सोच रही हूँ कि तुम लोग अपना परिवार पूरा करो.कल डॉक्टर तुम्हारी ओवुलेशन साईकल चेक कर लेंगे “
सारे टेस्ट्स कराते कराते शाम हो गई थी. ललिता को अपनी रिपोर्ट्स की कोई चिंता नही थी.वो आज के युग की आधुनिक महिला थी अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद सजग थी. उसे ऊर्जा की चिंता थी क्योंकि उसके हिसाब से ऊर्जा अपना पूरा समय घर के फालतू के कामो में लगा देती हैं.
टेस्ट्स की रिपोर्ट आ गई थी. सब कुछ नॉर्मल था पर ललिता के रिपोर्ट्स में कुछ ऐसा था कि उसे और भी टेस्ट्स करवाने की सलाह दी गई थी.
ललिता हँसते हुये सोच रही थी”पागल हो गए हैं डॉक्टर्स.55 साल की उम्र में भी एक छटाँक भी मांस नही चढ़ा हैं ,अभी भी ऊर्जा की छोटी बहन ही लगूँगी”
ऐसा सोच कर ललिता ने डॉक्टर्स की सलाह पर अधिक ध्यान नही दिया था.परन्तु जो गांठ उनकी बग़ल में थी ,अब बढ़ने लगी थी. ललिता ने अनुभव किया कि स्तन के चारो ओर निप्पल्स की त्वचा में भी बदलाव आने लगा था.
फिर से वो डॉक्टर्स के यहाँ थी.और इस बार के टेस्ट्स की रिपोर्ट्स में वो ही आया जिसकी डॉक्टर्स को आशंका थी.
ललिता को ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज़ हुआ था वो भी तीसरे चरण का,डॉक्टर्स के अनुसार अब सर्जरी की एकमात्र विकल्प था.ललिता की तो पूरी दुनिया ही धराशाही हो गई थी.
नियमित व्ययाम, नपातुला भोजन,वजन नियंत्रण सब कुछ का तो ललिता ने पालन किया था.ललिता सिर पकड़ कर बैठ गई थी.अब तो उसका खूबसूरत सांचे में ढला हुया जिस्म जो सभी महिलाओं के लिये ईर्ष्या का विषय हैं अब सर्जरी के पश्चात एकाएक बदसूरत हो जाएगा.
ललिता को ज़िन्दगी में सभी कुछ परफ़ेक्ट पसंद था.अब कैसे वो बाकी की ज़िंदगी इस इम्पेर्फेक्शन के साथ गुजारेगी. वो फफक फफक कर रो पड़ी.कोई सांत्वना कोई भी सलाह उसे हौंसला नही दे पा रही थी.
अरमान बेटा था पर फिर भी उसे अपनी माँ का ये व्यवहार समझ नही आ रहा था.ललिता के पति विभोर भी ललिता को समझा नही पा रहे थे. परन्तु इस मुश्किल की घड़ी में ऊर्जा एक साये की तरह ललिता के साथ बनी रही थी.ललिता की झल्लाहट, उनका चिड़चिड़ापन सब हंसते हुए ले रही थी.
ऊर्जा सब समझ रही थी.इसलिये सर्जरी की डेट से पहले वो ललिता को काउंसलिंग के लिये ले कर गयी थी.विभोर भी ललिता के साथ गये और तब उन्हें ललिता के बदले व्यवहार का कारण समझ आ गया था.
सर्जरी हो गयी और घर मे ललिता की देखभाल के लिये एक नर्स भी नियुक्त कर ली गयी थी.परन्तु जो मानसिक संबल ललिता को ऊर्जा से मिला ,उसके लिये ललिता के पास कोई शब्द नही थे.
ऊर्जा के कारण ही अरमान और विभोर बिना किसी चिंता के दूबारा अपना काम पर जा पाए.
ऊर्जा ललिता के पास बैठकर ढेरो ऐसी कहानियां सुनाती जहाँ पर कम आयु में ही महिलाओं ने ब्रैस्ट कैंसर पर विजय पाई .ऊर्जा ललिता से कहती”मम्मी आप तो वैसे भी सुपरवुमन है ,मेरी हीरोइन”
“आपको पता हैं मेरी सब सहेलियां आपकी कितनी तारीफ करती हैं,आप हर चीज़ में नंबर वन हो”
ललिता सोच रही थी कि कितना गलत समझती थी वो ऊर्जा को.अगर ऊर्जा ना होती तो शायद वो अवसाद का शिकार हो जाती.
इन सात महीनों में ललिता को एक बात अवश्य समझ आ गई थी कि पैसों से हम मेड, कुक या नर्स की सेवा अवश्य प्राप्त कर सकते हैं पर उसमें कर्त्तव्य पूर्ति की भावना ही होती हैं. आस्था और प्यार से देखभाल तो कोई अपना ही कर सकता हैं.
आज ललिता बिल्कुल ठीक हो गयी थी और अगले हफ्ते से वापिस दफ़्तर जॉइन कर रही थी.आज फिर से ललिता की सहेलियों ने ऊर्जा को देखते ही पुराना प्रसंग उठाया”और ऊर्जा बेटा अभी भी घर की देखभाल ही कर रही हो.”
“तुम्हारी सास तो कितनी महत्वाकांक्षी हैं, कैंसर से लड़ कर सात माह में ही उठ खड़ी हुई हैं”
इससे पहले ऊर्जा कोई जवाब देती, ललिता बोल उठी”तुम लोगो की बहू जॉब करती होगी,बहुत अच्छी बात हैं पर मेरी ऊर्जा तो मेरी ज़िंदगी की हीरोइन हैं”
“ये जो आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हुई हूँ,सब इसकी बदौलत हैं”
“हम सब लोग तो नौकरी करते हैं पर मेरी ऊर्जा तो लाइफ कोच हैं,ज़िन्दगी को कैसे जीते हैं,ये मुझे इस लड़की ने ही सिखाया हैं”
“अगर जरूरत पड़ी तो वो इतनी काबिल हैं कि बाहर जाकर नौकरी भी कर सकती हैं पर बस मेरी बहू इस दौड़ का हिस्सा नही हैं क्योंकि मूवी हो या ज़िन्दगी हीरोइन का किरदार सबसे अलग ही होता हैं”
ऊर्जा ललिता की बदली हुई सोच को देखकर मुस्कुरा उठी.
