तारीफ़ करना भी जिंदादिली का है काम-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Tarif Karna Bhi Zindadili ka hai Kaam

Story in Hindi: व्यक्ति की बातचीत और व्यवहार से उसके सदाचारी या दुराचारी होने की पहचान की जा सकती है। व्यक्ति के  विचार, भाषा, और क्रियावली से उसका चरित्र और नैतिकता का पता चलता है। अच्छी तारीफ करना भी एक उत्कृष्ट गुण है और इससे न केवल व्यक्ति को सम्मान मिलता है, बल्कि समाज में एक प्रेरणा का संदेश भी फैलता है। किसी व्यक्ति की तारीफ करना भी जिंदादिली की बात है , अन्यथा निंदको का बहुमत जीवन के हर चौराहे पर खड़ा है । तारीफ करना और अच्छे गुणों की प्रशंसा करना हमें दूसरों के साथ संबंध बनाने में मदद करता है, जबकि निंदा और नकारात्मकता से हमारा मनोबल कम होता है। किसी मेहनतकश इंसान की कद्र नहीं करने से वह महसूस कर सकता है कि उसकी मेहनत और प्रयास को उसे समझने वाले लोगों द्वारा अनदेखा किया जा रहा है। इससे हताशा की भावना उत्पन्न हो सकती है। इसलिए, हमें दूसरों की मेहनत और योगदान की कद्र करनी चाहिए ताकि उन्हें संजीवनी प्रेरणा मिले और वे अपने लक्ष्यों की ओर प्रेरित रहें।

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सराहना संजीवनी का कार्य करती है। जब हम किसी की मेहनत, योगदान, उत्कृष्टता की सराहना करते हैं, तो वह उन्हें संजीवनी की तरह नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती है। यह उन्हें अपने काम में समर्थ और महत्वपूर्ण महसूस करवाता है, और उन्हें अधिक सक्षम और प्रोत्साहित महसूस करवाता है। जिंदादिली और समझदारी से, हमें अच्छाई की प्रशंसा करने का प्रयास करना चाहिए। निंदा और प्रशंसा के दोनों में एक समान मात्रा में ऊर्जा लगती है । प्रशंसा के समय आपकी ऊर्जा बढ़ जाती है क्योंकि आप सकारात्मक विचारों और भावनाओं के साथ होते हैं। वहीं, निंदा करते समय भी ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन यह नकारात्मक भावनाओं के साथ होती है। दोनों में अंतर है, क्योंकि एक विनाशकारी होता है और दूसरा सजीव बनाता है। सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ना हमें निरंतर विकास और समृद्धि की दिशा में ले जाता है। इससे हमारे और हमारे आस-पास के लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और समृद्धि होती है।उचित व्यक्ति को उचित सम्मान देना बहुत महत्वपूर्ण है। जब कोई व्यक्ति अपने काम या योगदान के लिए सराहा जाता है, तो उसे उचित प्रतिष्ठा और प्रशंसा मिलनी चाहिए। सही समय पर सही व्यक्ति को सही सम्मान देना समाज के लिए महत्वपूर्ण होता है और लोगों के बीच आत्मविश्वास और सामूहिक भावना को बढ़ावा देता है।
अभिमान और स्वाभिमान के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है। अभिमान में अहंकार और घमंड होता है जो किसी की सराहना करने में रुकावट बनता है जबकि स्वाभिमान में सम्मान और आत्मसम्मान होता है जो भले बुरे की भली भांति से परख करने की शक्ति रखती है । अभिमान हमें दूसरों को नीचा दिखाने की भावना देता है, जबकि स्वाभिमान हमें स्वयं को सच्चाई और उच्चता के साथ देखने में मदद करता है ।पड़ोसी के घर पर क्या हो रहा है , यह रुचि रखने वाले , लोगो ने अपने घर क्या नहीं हों रहा है , इसका भी चिंतन मनन करना चाहिए । हमें अपने समाज में भागीदारी की  जिम्मेदारी लेनी  चाहिए और अपने घर में भी सुधार करने के लिए प्रेरित होना चाहिए। यह हमें समाज के विकास और संघर्षमय दिनचर्या में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करता है । प्रशंसा करने से हम दूसरों को सम्मान और सहारा प्रदान करते हैं, और उन्हें आत्मविश्वास और संघर्ष करने की प्रेरणा मिलती है
अच्छे कार्य की प्रशंसा करते समय हमें अतिवाद से बचना चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारी प्रशंसा उत्कृष्टता की प्रोत्साहन के लिए हो, न कि दूसरों को अपनी भावनाओं को दिखाने के लिए। हमें समय-समय पर संतुलित और संवेदनशील रहना चाहिए। गलत काम की प्रशंसा से बचना बहुत महत्वपूर्ण है। हमें समाज में नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों के गलत कार्यों को प्रशंसित नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करके हम उन्हें भ्रष्टाचार और अनैतिकता का  संदेश भेजते हैं। समाज में ईमानदारी, नैतिकता, और उत्कृष्टता को हमेशा प्रोत्साहित करना चाहिए। किसी की प्रशंसा करने में हमें अभिमान की भावना को नहीं झलकना चाहिए। प्रशंसा का उद्देश्य उस व्यक्ति को प्रोत्साहित करना होता है और उसे उनके योगदान की महत्वता महसूस कराना होता है। इसलिए अभिमान के बजाय, हमें समानता और विनम्रता के साथ दूसरों की प्रशंसा करनी चाहिए।