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अंगूठी में छुपा रहस्य-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात: Ring Story
Anguthi Me Chupa Rahsya

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Ring Story: घर में उथल-पुथल मची हुई थी। शोर-सा मच गया था। घर के सभी लोग कुछ ढूंढ रहे थे। ढूंढ़ने में खुद ही गुम हो जाते थे। इस स्थितियों सब के मिजाज सातवें आसमान पर पहुंच गए थे।

टिंगू ने मम्मी से पूछा, “मम्मी! कुछ खो गया है क्या? मम्मी ने आवश्यकता से अधिक ऊंचे स्वर में चढ़कर कहा, “हां।”

दो मीटर दूर फेंके गए टिंगू ने फिर साहस बटोरकर पूछा, “मम्मी क्या खो गया है?”

मम्मी ने आलमारी से निकाली गई पुस्तकें वापस आलमारी में फेंकते हुए कहा, “मेरा सिर!”

मम्मी ये शब्द इतने जोर से बोलीं कि अन्य दो-चार पुस्तकें आकर उनके सिर पर पड़ीं। आवाज में कंपन होती है न! उसमें भी यह मम्मी की आवाज। घर के लोग ही जब डर जाते थे तो पुस्तकों की क्या बात!

इस तरफ टिंग की यह दशा थी तो दसरी ओर पिंग की हालत भी देखने योग्य थी। वह पप्पा से यह जानने का प्रयास कर रहा था कि क्या खो गया है?

उसने स्वस्थ होकर पूछा, “पप्पा…”

लेकिन वह आगे कुछ बोले, उससे पहले ही पप्पा चिल्लाए, “क्या है!”

इसके साथ ही छज्जे पर से जूनी रेकेटों, स्टाम्प्स, वोलीबोल और बेल्स नीचे आकर गिरे। बिचारा पिंगू कुछ बोले उसके पहले ही ‘क्लीन बोल्ड’ हो गया।

फिर भी उसने क्रीज न छोड़ी। अब और भी स्वस्थ होकर पूछने लगा, “पप्पा! कुछ खो गया है?”

पप्पा क्रोध और गुस्से भरे वातावरण में जरा रुक कर बोले, “हां, मेरा दिमाग।”

टिंगू और पिंगू आपस में मिले।

टिंगू ने कहा, “मम्मी का सिर खो गया है।”

पिंगू ने कहा, “और पप्पा का दिमाग।”

टिंगू ने कहा, “और इसीलिए घर की शांति खो गई है।”

पिंगू ने कहा, इसी स्थितियों के चलते हम खो जाएं, नहीं तो हमें जी. बी.टी. हो जाना पड़ेगा।

टिंगू विस्मय में बोली, “यह जी. बी. टी. क्या बला है?”

पिंगू ने बताया, “क्रिकेट में जैसे एल. बी. डब्ल्यू होता है, वैसे ही घर में जब मम्मी पप्पा गुस्से में होते हैं तब हम जी. बी. टी. हो जाते हैं- गाल बिफोर तमाचा।”

परिस्थिति सचमुच ऐसी ही थी। दोनों धीर-धीरे फील्ड छोड़ने लगे। उसी समय मम्मी गरजी। वे पप्पा को कह रही थीं, “दादाजी को इस बूढ़ापे में अंगूठी पहनने की कहां से सूझी। अब कहां से मिलेगी! बोलिए। आकाश-पाताल एक कर दिया है फिर भी पता नहीं लगता।”

टिंगू-पिंगू को बात समझ में आ गई।

टिंगू ने कहा, “बात इतनी-सी है कि दिल्ली से पधारे हमारे दादाजी की अंगूठी खो गई है।”

पिंगू ने कहा, और वह अंगूठी ऐसी-वैसा नहीं है, नहीं तो मम्मी-पप्पा आकाश-पाताल एक नहीं करते।” ।

टिंगू ने कहा, “हम दादाजी की अंगूठी ढूंढ लाएं तो!”

पिंगू ने कहा, “अंगूठी ढूंढने में सफल होंगे तो घर की शांति भी लौट आएगी और आकाश-पाताल को अलग कर सकेंगे, और जी. बी. टी. से भी बच सकेंगे और…

टिंगू ने कहा, “अब और-और बंद करो। अब बताओ कि दादाजी की अंगूठी कैसी थी?”

पिंगू बोला, मैंने देखी है। उनकी तीसरी अंगुली में सदा चमकती रहती थी। बनावट कुछ अलग तरह की थी। अंगूठी में ऊपर लाल ढक्कन जैसा कोई रत्न था।”

टिंगू बोला, “कहां-कहां गुम होने की संभावना हो सकती है?”

पिंगू बोला, सब कुछ मुझसे ही पूछोगे? फिर उस रोबोट की क्या हम पूजा करेंगे?”

टिंगू बोल उठा, “अरे हां! चलो आज से उसकी परीक्षा शुरू।”

दोनों पहुंचे रोबोट के पास। यह रोबोट भी कंप्यूटर ही है। काम सब कुछ करेगा लेकिन उसे ‘फीड’ करना जरूरी है। उसे मुख्य सूचनाएं दे दो तो वह निष्कर्ष निकाल कर उत्तर दे देगा।

यंत्रमानव की पहली पहचान हुई तो टिंगू-पिंगू ने उसकी प्राथमिक परीक्षा ली थी।

टिंगू बोला, “ठंड पड़ रही है रोबोट, क्या करें?”

रोबोट को पहले से ‘फीड’ किया गया था। उसने उत्तर दिया, “गरम कपड़े पहनों, धूप में जाओ, चूल्हा जलाकर तपना ले लो, गरम खंड में जाओ या फिर रजाई ओढ़कर सो जाओ।”

दूसरा प्रश्न पूछा, “क्रिकेट में कौन जीतेगा? भारत या पाकिस्तान?”

“जो सबसे अधिक रन बनाएगा।”

टिंगू बोला, “धत् तेरे की…ऐसा उत्तर?”

“हां, ऐसा ही। इसमें अक्ल फीड की गई है इसलिए ऐसा चतुराई भरा उत्तर दे सकता है। आओ, एक और प्रश्न पूछे। बोलो रोबोट, कौन बढ़कर हैं मां बाप या लड़के?”

रोबोट ने उत्तर दिया, “गुस्से में मां-बाप और तूफान में लड़के।”

ऐसे ही कुछ प्रयोग टिंगू-पिंगू ने किए थे। आज बिलकुल नई तरह का प्रयोग था। उन्होंने रोबोट से पूछा, “बता रोबोट, दादाजी की अंगूठी खोई है कि चुराई गई है?”

रोबोट ने उत्तर दिया, “खो गई है-चुराई गई है… चुराई गई खो गई है…।”

उत्तर में रहस्य था। दोनों ने उत्सुकता से एक-दूसरे को देखा। फिर आगे पूछा, “कहां खो गई है और किसने चुराई है?”

रोबोट में से आवाज आई, “गलक, गलक, गलक, गलक, गलक…” टिंगू बोला, “इसका क्या अर्थ?”

पिंगू ने कहा, “यही कि इसे फीड करना पड़ेगा। यह भी किसी मंत्री से कम नहीं।”

उन्होंने रोबोट को फीड किया। दादाजी की अंगूठी के बारे में पूरे ब्योरे दिए गए। उसके गुम होने की कहां-कहां संभावना हो सकती थी, वह बताया गया। टिंगू-पिंगू ने बताया, “दादाजी, बाथरूम में जब नहाने जाते तब…।”

“बाथरूम…बाथरूम…बाथरूम…” यंत्र मानव बोलता रहा। टिंगू बोला, “अब उसे बाथरूम के बारे में फीड करो।”

पिंगू ने ब्यौरा दिया, “बाथरूम, बाल्टी, नल, पानी, ब्रश, साबुन, पेस्ट, तौलिया, खूटी, फव्वारा…”

इतने विवरण देने के बाद दोनों लड़के बोले, “अब दादाजी की अंगूठी के बारे में कुछ कहोगे या केवल बातें ही करते रहोगे?”

रोबोट ने तुरन्त जवाब दिया, “साबुन-साबुन, साबुन-साबुन, साबुन-साबुन…”

टिंगू-पिंगू एकदम दौड़कर बाथरूम में गए। उन्होंने नहाने का साबुन देखा। कोई खास फर्क नहीं दिखता था फिर भी सामान्य नहीं लगता था। कोई करामात की गई लगती थी। दोनों बच्चों ने साबुन को उठाया, सुना, पटका।

कोई भी रहस्य सामने नहीं आया।

पिंगू दौड़कर चाकू ले आया। साबुन के कटते ही उसमें से दादाजी की अंगूठी निकली। दोनों चिल्लाए, हेई…!”

टिंगू बोला, “तुझे मालूम कैसे हुआ कि अंगूठी साबुन के अन्दर होगी?”

पिंगू ने कहा, “साबुन पर कुछ करामात की हुई लगती थी। रोबोट झूठ नहीं बोलता। अंगूठी की आवाज नहीं आ सकती लेकिन काटने से निकल तो सकती है न?”

दोनों लड़कों ने जैसे ओलम्पिक में कोई पदक जीता हो। उसी तरह चांदी की थाली में साबुन, साबुन पर अंगूठी रखकर, सीना निकालकर मम्मी-पप्पा के पास पहुंचे।

अंगूठी देखकर मम्मी-पप्पा ने भी हाथ वाली चीजें फेंकी और उनकी ओर दौड़े।

मम्मी बोली, “कहां से मिली?”

टिंगू बोला, “बाथरूम में रखे साबुन में से।”

पिंगू ने कहा, “रहस्य के राजा उर्फ ज्ञानकोष नीर, ज्ञान सम्राट, ज्ञान प्रदर्शक, राजमान, राजगिरी, रोबोट कुमार ने।”

मम्मी-पप्पा दोनों ने एक साथ पूछा, “क्या कहा रोबोट ने?”

“साबुन-साबुन, साबुन-साबुन, साबुन-साबुन….”

दादाजी भी दौड़ते आए। बोले, “अरे हां! नहाते समय मुझे अंगूठी उतारकर नहाने की आदत है। इस बार भूल गया। भूल का भोग हमारे नौकर बाबु भाई ने मुझे बनाया। साबुन को गीला करके उसमें अंगूठी घुसा दी। साबुन को वैसे का वैसा करने की तरकीब भी अजमाई… लेकिन बेचारा पकड़ा गया। धन्यवाद बच्चों।”

टिंगू-पिंगू बोले, “धन्यवाद रोबोट को दीजिए। रहस्य उसने बताया है। रहस्य का राजा यह है।”

पूरा परिवार रोबोट को धन्यवाद देने दौड़ा। तब दादाजी ने बताया, “बच्चों, ऐसा मत मानना कि यह सामान्य अंगूठी है। मुझे वित्त मंत्रालय की ओर से विशेष बजट की गिनती करने का आदेश हुआ है। इस अंगूठी में उसका फॉर्मूला मिनी स्वरूप में है। मात्र फिल्म पट्टी पर ही इसे देखा जा सकता है। अब मेरी परिस्थिति तुम समझ सकते हो न? बच गया बजट, बच गया मैं…!”

टिंगू बोला, “बच गए मम्मी-पप्पा।”

पिंगू बोला, “और बच गए हम जी.बी.टी. से। बोलो सब एक साथ रहस्य का राजा रोबोट।

बड़े छोटे सब लोग उठे, “जिंदाबाद।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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