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लिपि और लपरा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड: Two Dog Story
Lipi or Lapra

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Two Dog Story: एक बार की बात है, एक गाँव में सात भाई रहते थे। पहले वे बहुत गरीब थे लेकिन बाद में व्यवसाय करके थोड़े समृद्ध हो गए। सबसे छोटे भाई का धंधा सबसे अच्छा चला इसलिए वह उन सबमें सबसे ज्यादा अमीर हो गया।

सातों भाइयों ने एक बार फलों के वृक्ष लगाए एवं प्रत्येक दिन अपने कार्य से वापस लौटकर वे उनमें पानी डालते थे। समय के साथ सभी वृक्षों में फल आने लगे लेकिन बड़े भाई के वृक्ष पर लगा फूल मुरझा गया एवं जिस दिन फूल आया था, उसी दिन गिर गया। अन्य भाइयों के वृक्षों पर लगे फल भी पकने के पहले ही गिर गए। लेकिन छोटे भाई के वृक्ष पर स्वादिष्ट फल आए। उनमें से पाँच भाइयों ने उसे कहा तुम बहुत भाग्यशाली हो कि तुम्हारे वृक्ष पर इतने फल आए। लेकिन बड़ा भाई छोटे के भाग्य से ईर्ष्या रखने लगा और उससे बदला लेने के ताक में रहने लगा।

सबसे छोटा भाई कत्ते के दो बच्चे लाया। जिनके नाम उसने लिपि और लपरा रखे। वे अच्छे शिकारी कत्ते बने और उनकी मदद से छोटा भाई अपने परिवार के लिए अच्छा शिकार करके लाता था। बाकी सभी भाई इतना शिकार देखकर बहुत खुश थे। एक दिन उन्होंने छोटे भाई से कहा कि हमें भी अपने साथ ले चलो, जहाँ से तुम इतने अच्छे शिकार लाते हो। जिसपर वह सहमत हो गया और उन्हें वह जंगल में उस इलाके में ले गया, जहाँ वह शिकार करता था। वहाँ बहुत से जानवर थे, लेकिन वे उनका शिकार नहीं कर पाए, उनका तीर कभी निशाने पर नहीं लगा। लेकिन छोटा भाई आसानी से शिकार कर ले रहा था। पांचों भाइयों ने उसके इस कौशल एवं अच्छी निशानेबाजी के लिए सराहना की लेकिन सबसे बड़ा भाई, जो खुद से कोई शिकार नहीं कर पाया था ईर्ष्या से भर गया एवं उससे बदला लेने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ हो गया।

एक दिन ऐसा हुआ कि बड़े और सबसे छोटे को छोड़कर बाकी पांचों भाई काम पर गए। सबसे बड़ा भाई ने छोटे भाई को अकेला पाकर उसे पहाड़ी पर चलने का प्रस्ताव दिया। उसने कहा कि चलो पहाड़ी पर चलकर रस्सी बनाने के लिए लार काट लाएं। छोटे भाई ने कहा ठीक है, चलो चलें। उसने अपने कुत्तों को भी अपने साथ ले लिया। जिस पर बड़े भाई ने कहा कि कुत्तों को क्यों परेशान करोगे, उन्हें यहीं छोड़ दो। लेकिन उसने कहा कि वह कुत्तों के बिना नहीं जाएगा। कुत्तों के बिना वह हिरण का शिकार कैसे कर पाएगा? वे कुत्तों को साथ लेकर पहाड़ी की ओर चल दिए।

रास्ते में एक झरना मिला, जहाँ बड़े भाई ने कहा कि कुत्तों को यहीं बांध दो। मैं जानता हूँ इस जंगल में कोई शिकार नहीं मिलेगा। छोटा भाई अपने कुत्तों को छोड़ना नहीं चाहता था लेकिन बड़े की जिद के आगे वह झुक गया और उसने कुत्तों को लता के सहारे वहाँ एक पेड़ से बांध दिया। उसके भाई ने कहा कि इन्हें अच्छे से बाँध दो ताकि ये कहीं छूट कर भाग न जाएँ।

बड़ी पहाड़ी की तलहटी में पहुँच कर उन्होंने रस्सियाँ बनाने के लिए बड़ी मात्रा में लार काट लिए और उन्हें मोड़ कर रस्सियाँ बना लीं। जब वे वापस लौटने के तैयारी कर रहे थे तो बड़े ने छोटे को पकड़ लिया और उन्हीं रस्सियों से उसे बांध दिया। असहाय छोटे भाई ने मदद की आशा में अपने कुत्तों को आवाज लगाई। उसने लिपि और लपरा को बार-बार बुलाया। कुत्तों ने उसकी आवाज सुनी और अपने को बंधन से छुड़ाने के प्रयास करने लगे और आखिरकार बहुत जोर लगाकर वे अपनी रस्सी तुड़ाने में सफल हुए। बड़े भाई ने छोटे को मारने के लिए जैसे ही दराँती उठाई, कुत्तों ने उनपर हमला कर दिया। वे उसे चीर-फाड कर रख दिए।

जब छोटा भाई अकेला घर लौटा तो सभी ने पूछा कि बड़ा भाई किधर है, जिसपर छोटे ने बताया कि वह रास्ते में हिरण का शिकार करने के लिए अलग हो गया था और फिर उससे नहीं मिल पाया। हो सकता है किसी जंगली जानवर ने उस पर हमला कर दिया हो।

जब सभी भाई उसे खोजने निकले तो देखा कि जंगल में उसकी लाश बहुत बुरी तरह नुची-चुथी स्थिति में पड़ी है, छोटे ने कहा “मैंने तो कहा ही था कि किसी जंगली जानवर ने अवश्य हमला किया होगा।”

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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