Overview: ज्यादा सैलरी में भी क्यों नहीं होती बचत
सैलरी बढ़ने के बाद भी महीने के अंत तक पैसा खत्म क्यों हो जाता है? जानें खर्च बढ़ने के कारण और स्मार्ट टिप्स, जिससे सेविंग बढ़े और फाइनेंशियल स्ट्रेस घटे।
Income vs Expenses: हर व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहता है और इसलिए बहुत अधिक मेहनत भी करता है। जिसकी वजह से उसकी सैलरी बढ़ जाती है। ऐसे में हम सोचते हैं कि अब तो हम आराम की जिन्दगी जीएंगे। लेकिन उस स्थिति में भी महीने के अंत तक पैसा खत्म हो जाता है। ऐसे में समझ ही नहीं आता है कि ज्यादा कमाने के बाद भी सेविंग का नामोनिशान क्यों नहीं दिखता। ये कोई आपकी गलती नहीं है, बल्कि ये एक बहुत आम फाइनेंशियल आदत है, जो अधिकतर लोगों में देखी जाती है।
सैलरी बढ़ते ही हम खुद को थोड़ा “रिवार्ड” देना चाहते हैं। ब्रांडेड कपड़ों से लेकर महंगा फोन, बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग आदि सब कुछ जायज लगने लगता है। जिसकी वजह से धीरे-धीरे खर्च बढ़ता जाता है। इसका अहसास हमें तब होता है जब बैंक अकांउट में पैसे खत्म होने लगते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम बात करते हैं कि सैलरी बढ़ने पर खर्च क्यों बढ़ जाता है और इसे कण्ट्रोल करने के लिए क्या किया जाए-
सैलरी बढ़ते ही खर्च क्यों बढ़ जाता है?

सबसे पहले हम उन कारणों पर बात करते हैं, जिनकी वजह से सैलरी बढ़ते ही हमारा खर्च भी बढ़ने लग जाता है। मसलन-
- जब हमारी सैलरी बढ़ती है, हमारा लाइफस्टाइल भी अपने-आप अपग्रेड होने लगता है। हम लोकल की जगह ब्रांडेड सामान का इस्तेमाल करने लगते हैं। अब बार-बार बाहर खाने की आदत बढ़ जाती है।
- कमाई बढ़ने पर माइंडसेट भी बदलता है। लोग सोचते हैं कि अब तो वे अफोर्ड कर सकते हैं। इसलिए वे बहुत सी चीजे बिना सोचे-समझे खरीद लेते हैं। ईएमआई से लेकर क्रेडिट कार्ड स्वाइप इसे और भी आसान बना देते हैं।
- कमाई बढ़ने पर लोगों के लिए सेविंग लास्ट प्रायोरिटी बन जाती है। कम कमाई में लोग मुश्किल दिनों के लिए पैसा बचाना सबसे जरूरी समझते हैं। लेकिन कमाई बढ़ने पर उनकी सोच होती है कि पहले खर्च करेंगे, जो बचेगा वो सेव करेंगे। जिसकी वजह से बचत हमेशा जीरो रह जाती है।
- सोशल प्रेशर और तुलना भी उनके खर्च बढ़ा सकती है। दोस्त नई कार ले रहे हैं या ऑफिस में सब ब्रांडेड कपड़े पहन रहे हैं, ये सब देखकर वे भी एक लाइफस्टाइल मेंटेन करना शुरू कर देते हैं और खर्च बढ़ जाता है।
- जब सैलरी बढ़ती है, तो लोग खर्च लिखना या ट्रैक करना छोड़ देते हैं। जिससे पता ही नहीं चलता कि पैसा गया कहां।
इस समस्या को कैसे रोकें?

अब हम उन प्रैक्टिकल तरीकों के बारे में बात करते हैं, जिनकी मदद से आप इस समस्या से निपट सकते हैं। मसलन-
- सबसे पहले सेविंग अकाउंट में पैसा डालें। हर महीने सैलरी आते ही कम से कम 30-40 प्रतिशत सीधे सेविंग या इन्वेस्टमेंट में डालें।
- लाइफस्टाइल अपग्रेड सोच-समझकर करो। जब भी आप कुछ खरीदें तो पहले खुद से ये सवाल जरूर पूछें कि क्या ये चीज सच में मेरी जिंदगी बेहतर बनाएगी या बस ये दिखावे के लिए है।
- एक ऑटो-सेविंग सिस्टम बनाएं। सैलरी आते ही उसका कुछ हिस्सा एसआईपी, आरडी या इमरजेंसी फंड में पैसा खुद ब खुद ऑटो डेबिट हो जाए, ताकि खर्च करने से पहले पैसा सेव हो जाए।
- खर्च लिखने की आदत को कभी ना छोड़ें। आप किसी नोट्स ऐप या किसी बजट ऐप में खर्च लिखो। जब आपको खर्च दिखता है, तो वह कंट्रोल भी अपने-आप होने लगता है।
