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भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

जफर जूते पहने, सिर पर कैप लगाए और हाथ में बैट लिए हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। गाँव के मैदान में इस वक्त भीड़ जमा थी। दो टीमों के बीच क्रिकेट मैच हो रहा था। हल्ला-गुल्ला और शोर मच रहा था।

अचानक अगली ही बॉल पर उस्मान आउट हो गया और जफर हाथ में बैट लेकर तेजी से कदम बढ़ाता हुआ मैदान में पहुँच गया। उसका दिल धड़क रहा था, लेकिन मन में हौसला था।

अभी उसकी टीम को जीत के लिए पैंतालीस रन और बनाने थे। जफर ने मैदान का जायजा लिया और पहली ही बॉल पर चौका लगाने की कोशिश की, लेकिन मुखालिफ टीम का एक खिलाड़ी उस गेंद के पीछे इतनी तेजी से भागा कि गेंद बाउंड्री को बस छूने ही वाली थी कि उसने अपने दाएँ पाँव से उसको रोक लिया और जफर सिर्फ एक रन ही लेने में कामयाब हो सका।

जफर मन मारकर रह गया।

इस तरह कुछ वक्त हो गया जफर को गेंद से जूझते हुए, लेकिन वह अभी तक एक भी चौका नहीं लगा पाया था। बॉल कम होती जा रही थीं और रनों का दबाव बढ़ता जा रहा था। वह बहुत कोशिश कर रहा था कि किसी ना किसी तरह छक्के-चौके लगा सके जिससे उसकी टीम जीत जाए और फिर वह शहर जाकर खेले।

इस मैच को देखने के लिए गाँव के कई मुअज्जिज (सम्मानित) लोग कुर्सियों पर बैठे थे, बाकी गाँववाले कुछ खड़े थे, कुछ पेड़ों पर लटके हुए थे, और कुछ औरतें और लड़कियाँ अपने चेहरों को दुपट्टों के पल्लुओं से ढके शरमा-शरमाकर हँसते हुए मैच का पूरा लुत्फ ले रही थीं।

मैदान के एक ओर एक छोटी-सी बेंच के पास दो घुनी हुई लकड़ी की कुर्सियाँ रखी थीं, जिन पर पाँच लड़के बड़े प्यार से एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे बैठे थे, जिनमें से दो लड़के बहुत जोशीले अंदाज में कमेंट्री कर रहे थे और बीच-बीच में कह रहे थे कि “इस मैच में जीतने वाली टीम को दस हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा।”

जफर, जो अपनी टीम का कैप्टन था। वह सोच रहा था कि अगर आज उसकी टीम जीत गयी तो अम्मी को यकीन हो जाएगा कि मैं आवारा लड़का नहीं हूँ। मेरे पास बहुत से पैसे होंगे।

हम अच्छा-अच्छा खाना खाएँगे। दोस्त मुझे गोद में उठा लेंगे और फूलबानो हाथ में गुलाब का फूल लिए….

जफर ने अगली बॉल को थोड़ा आगे बढ़कर हवा में उछाल दिया। थोड़ी ही देर में मैदान में शोर मच गया। जफर की टीम के सपोर्टर नाचने लगे। तब जाकर जफर को पता चला कि उस बॉल पर उसने छक्का लगा दिया है। उसके बाद जफर हर बॉल पर छक्के-चौके लगा रहा था।

उसकी टीम जीत गई। दोस्तों ने उसे गोद में उठा लिया और उछालने लगे।

भीड़ में अचानक जफर की नजर दूर खड़ी फूलबानो पर पड़ी। उसके हाथ में कुछ लाल रंग का दिखाई दे रहा था। जफर जल्दी से नीचे उतरकर सबसे नजरें बचाकर उसके करीब पहुंचा। फलबानो ने अपना हाथ छपा लिया। उसके हाथ में कुछ था। जफर को बेचैनी हो रही थी कि वह उसके लिए जो कुछ भी लाई है, उसे जल्दी से दे क्यों नहीं देती। पर वह भी उसके सब्र का इम्तिहान लेने पर आमादा थी।

उसने जफर से कहा, “अपनी आँखें बंद करो।”

जफर ने जल्दी से आँखें बंद कर ली।

अचानक जफर के कान में गुदगुदी होने लगी, वह कान को एक हाथ से तेजी से हिलाकर कहने लगा, “फूलबानो क्या कर रही हो?”

“जल्दी उठ, तेरे कान में कीड़ा घुस रिया है।” शाहिद ने जफर को हिलाते हुए कहा।

शाहिद की आवाज से जफर घबराकर उठ बैठा और कान पर तेजी से दो-तीन हाथ मारे। कीड़ा कान से नीचे गिरा और रेंगता हुआ वहीं कूड़े के एक ढेर में छिप गया। थोड़ी देर के लिए जफर उसको देखता रहा।

“अबे, चल उठ ना, बहुत देर से सो रिया था तू, चल यह थोड़ा-सा लोहा-लंगड़, प्लास्टिक मिला है, इसको बेच के कुछ खा लें। बहुत भूख लगी है।”

जफर, शाहिद के साथ चेहरे पर फीकी मुस्कराहट लिए कूड़े के ढेरों को लाँघता हुआ चला गया….

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’