बहुत समय पहले जफर नामक युवक अपनी पत्नी हसीना के साथ रहता था। उसे अपनी पत्नी से बहुत लगाव था। एक दिन हसीना बोली, “मैं सेब खाना चाहती हूं। मुझे लाल सेब लाकर दे सकते हो?”
जफर यह सुनकर हैरान रह गया, क्योंकि सेबों का तो मौसम भी नहीं था।

जफर अपनी पत्नी का दिल तोड़ना नहीं चाहता था। उसने स्वयं से कहा, “मुझे किसी भी कीमत पर लाल सेब लाने चाहिए । अब उसने पूरे बाजार में तलाश की, पर सेब नहीं मिले।
आधा दिन बीत गया था। अचानक उसे अपना दोस्त मकसूद मिला। उसके पूछने पर जफर ने बता दिया कि वह सेब खरीदना चाहता था।
मकसूद कुछ पल सोचकर बोला, “ मैं तुम्हें एक जगह ले चलता हूं। जगह तो दूर है, पर सेब मिल ही जाएंगे।

वे दोनों एक ऐसी जगह पहुंचे, जहां दूर-दूर तक कोई आबादी न थी। जफर वहां फल वाले को देखकर हैरान रह गया। उसके पास सुनहरे डिब्बे में तीन सेब थे। जफर ने एक सोने का
सिक्का देकर सेब खरीद लिए ।
जफर व मकसूद शहर लौट आए। घर आकर जफर ने पत्नी को पुकारा, “प्यारी हसीना! तुम्हारे लिए सेब लाया हूं। “
हसीना सेब देखकर खुश हो गई। सेब ताजे व लाल थे। हसीना ने सोचा, ‘मैंने अभी तक स्नान नहीं किया। स्नान करके ही सेब खाने चाहिए । ‘

जफर को भी कोई जरूरी काम याद आ गया। उसका पूरा दिन सेब खोजने में लगा था। वह थोड़ी देर में आने को कहकर चला गया और हसीना भी मेज पर सेब रखकर नहाने चली गई।
तभी कुछ देर बाद घर में कोई भागते हुए घुसा । वह हसीना व जफर का शरारती बेटा अब्दुल था। उसने मेज पर पड़े सेब देखे। उसने सोचा, ‘वाह! इतने स्वादिष्ट सेब! मैं अपने दोस्तों को दिखाऊंगा।’ उसने सेब का डिब्बा उठाया और वहां से चंपत हो गया।
अब्दुल हाथों में सेब लिए सड़क पर नाचता जा रहा था। एक अजनबी ने उसके हाथों में सेब देखकर कहा, “ओह! इस

मौसम में सेब?” उसने सोचा, ‘इन्हें बेचकर तो अच्छे दाम कमाए जा सकते हैं।’ उसने अब्दुल से सेब छीन लिए और बोला, “यहां से भाग जा, वरना मार दूंगा।” उसने अब्दुल को धमकाया तो बच्चा डर के मारे कांपने लगा और रोते-रोते घर आ गया।
हसीना ने नन्हें को रोते देखा तो पूछा, “क्या हुआ, बेटा ? ” अब्दुल ने मां को सब बता दिया। उसने कहा, “ मां के लिए अपना बच्चा सबसे कीमती होता है। तुम मेरी आंख के तारे हो। सेब गए तो क्या हुआ ?”

इस दौरान जफर ने बाजार से लौटते समय किसी को वही तीन सेब बेचते देखा। वह हैरान रह गया, ‘ये तो वही सेब हैं, जो मैं हसीना के लिए लाया था।’ जफर ने सोचा कि हसीना ने ही फलवाले को सेब बेचे होंगे। वह गुस्से से लाल-पीला होकर घर लौटा।
“हसीना! कहां हो?” जफर के चिल्लाने की आवाज सुनकर हसीना बाहर आ गई। जफर गुस्से से बोला, ” बेवफा औरत ! तूने मेरे साथ धोखा किया। मैं इतनी मुश्किलों से तेरे लिए सेब लाया और तूने उन्हें फल वाले को बेच दिया।

नन्हा अब्दुल भी शोर सुनकर बाहर आ गया और बोला, अब्बा ! एक आदमी मुझसे सेब छीनकर ले गया। वह बहुत बुरा था । ” जफर यह सुनकर दंग रह गया। नन्हें अब्दुल ने सारी घटना सुना दी। अब जफर को पता चला कि वे सेब बाजार में कैसे पहुंचे।
अचानक उसे एहसास हुआ कि उसने हसीना पर शक करके उसके दिल को कितनी चोट पहुंचाई है। उसने झटपट पत्नी से माफी मांगी, ” मैं शर्मिंदा हूं ! मुझे माफ कर दो।” जफर ने कहा ।
हसीना भी बहुत भली स्त्री थी। वह मुस्कराकर बोली, “कोई बात नहीं! मुझे भी तो सेबों का ध्यान रखना चाहिए था ।

जफर ने इस घटना से सबक लिया व हसीना को पहले से भी ज्यादा चाहने लगा। इसके बाद वे तीनों खुशी-खुशी रहने लगे ।
