Hindi Kahani
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Hindi Kahani: मिसेज़ वर्मा का दिमाग़ आज सातवें आसमान पर था, गुस्से में बड़बड़ाए जा रही थीं —
“आज तीन दिन हो गए और इस कम्मो का कोई पता नहीं, जाने कहाँ गायब हो गईl आने दो अब तो मैं इसको भगा ही दूंगी l इसके कारण मैं न तो पार्लर जा पाई, न शॉपिंग करने जा पाई , दो दिन बाद किटी पार्टी है, सब गड़बड़ क़र दिया इसने l बहुत भाव बढ़ गए हैं इन काम वालियों के l “
मिसेस वर्मा बड़बड़ाते हुए नहाने चली  गईं l
अरे यह क्या, कम्मो तो जाने कब आई और वाश एरिया में जा कर चुपचाप बर्तन धोने लगी l तब तक मिसेज वर्मा भी नहा कर आ गईं l
 हमेशा लगातार बोलती रहने वाली कम्मो खामोश और उदास नजर आ रही थी l
“क्यों री कम्मो, कहाँ गायब थी तीन दिन से? पता है तेरे कारण मैं जिम नहीं जा पाई,पार्लर नहीं जा सकी, सारा दिन घर के काम क़र क़र के मेरी तो कमर ही टूट गईं l अब कैसे मै किटी पार्टी मे जाऊंगी, बोल?”
कम्मो बिना कोई जवाब दिए बर्तन साफ करती रही l
“अब कुछ बोलती क्यों नहीं? जुबान भी घर रख आई क्या?”
कम्मो फूट फूट कर रोने लगी —
“मालकिन तीन दिन पहले मेरा इकलौता बेटा टी बी से मर गया l”
आत्मग्लानि से भरी हुई मिसेज़ वर्मा को अब खुद पर गुस्सा आ रहा था l सांत्वना का हाथ उन्होंने कम्मो के सिर पर रख दिया l