एक दिन, उसे एक गीदड़ ने देख लिया। उसने सोचा- मुझे इस सुंदर जीव का माँस जरूर खाना चाहिए। वह सचमुच काफी मीठा और स्वादिष्ट होगा। दुष्ट गीदड़ ने ऐसा करने से पहले उसे भरोसे में लेने की कोशिश की। एक दिन वह हिरण से बोला- “अरे दोस्त, कैसे हो?”

हिरण ने तो उसे पहले कभी देखा नहीं था। उसने पूछा- “तुम कौन हो? मुझे नहीं लगता कि हम पहले कभी मिले हैं?” “मैं गीदड़ हूँ। मैं उस जंगल में अकेला रहता हूँ। मेरे साथ खेलने के लिए कोई नहीं है। क्या मुझसे दोस्ती करोगे?”

हिरण ने झट से उसकी बात मान ली। वह गीदड़ को अपने घर ले गया। वहीं पास में ही उसका पक्का दोस्त कौआ रहता था। कौए ने जब अजनबी को उसके साथ देखा तो पूछा- “प्रिय हिरण, यह कौन है?” हिरण ने गीदड़ को उससे मिलवाते हुए कहा- “प्रिय कौए, यह गीदड़ है, यह हमसे दोस्ती करना चाहता है।”

कौआ पल-भर को चुप रहा फिर सकुचाते हुए बोला- “मुझे नहीं लगता है कि हमें अजनबियों से दोस्ती करनी चाहिए।”

कौए की बात सुन गीदड़ चिढ़ कर बोला- “जब तुम हिरण के दोस्त बने थे, तो तुम भी उसे अच्छी तरह नहीं जानते थे। हर-दूसरे को जानने में वक्त लगता है। सालों की दोस्ती के बाद ही तुम पक्के दोस्त बन पाए हो।”

अब कौए ने कुछ न कहना ही ठीक समझा वह बोला- “जैसी तुम्हारी मर्जी।” । अगले दिन से तीनों अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए। दिन में वे भोजन की तलाश में रहते थे तथा रात को एक साथ वक्त बिताते।

कुछ दिन में ही गीदड़ काफी बेचैन हो गया। वह हिरण को मारने के मौके की तलाश में रहने लगा। एक दिन वे दोनों घर में अकेले थे, गीदड़ ने हिरण से कहा- “आओ, तुम्हें मक्का के खेत में ले चलूँ। हिरण उसके साथ चला गया। वहाँ उसने जी भर कर ताजा मक्का खाया।”

जल्दी ही खेत के मालिक ने उसे देख लिया। उसने हिरण को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया। अगले दिन हिरण खेत में आया तो जाल में फंस गया। वह सोचने लगा कि अब मुझे कौन बचाएगा, तभी उसे गीदड़ आता दिखा, वह खुश हो गया। हिरण ने उससे कहा “प्रिय मित्र! मैं यहाँ फँस गया हूँ, कृपया मुझे जाल से निकालो।”

दुष्ट गीदड़ हिरण को जाल में फँसा देख खुश हुआ व बोला”ये जाल चमड़े से बना है। मंगलवार को मैं दाँतों से चमड़ा नहीं छूता। मैं कल सुबह आकर तुम्हें छुड़ा लूँगा।” इतना कह कर वह झाड़ियों के पीछे जा छिपा।

रात बहुत हो गई। हिरण घर नहीं लौटा तो कौए को चिंता होने लगी। वह उसकी तलाश में निकला। काफी खोजने के बाद उसने हिरण को मक्का के खेत में, जाल में फँसा पाया। वह उसके पास जा कर बोला- “दोस्त, ये क्या हुआ?” हिरण को कौए की सलाह न मानने का अफसोस था, उसने कहा-“यह इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी। तुमने ठीक कहा था, मुझे गीदड़ पर भरोसा नहीं करना चाहिए था।” “पर वह है कहाँ?” कौए ने पूछा।

हिरण ने रोते हुए कहा- “कहीं छिपा, मेरे मरने का इंतजार कर रहा होगा।” 

कौए ने उसे दिलासा देते हुए बंधन से मुक्त होने की सलाह दी। हिरण ने दोस्त की सलाह मानी। उसी सलाह के मुताबिक, जब खेत का मालिक हिरण को मरा देख जाल खोलने लगा, तो मौका पाते ही हिरण वहाँ से निकल भागा। 

गुस्से में मालिक ने उस पर लाठी खींच मारी। वह लाठी गीदड़ को जा लगी, जो हिरण का पीछा करने की कोशिश कर रहा था। दुष्ट गीदड़ की वहीं मौत हो गई। 

शिक्षाः- सच्चा दोस्त वही होता है, जो मुसीबत में काम आए।

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