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गृहलक्ष्मी की कहानियां : एक चालाकी ऐसी भी
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां : बहू साधारण परिवार से आई और धीरे धीरे ससुराल के हिसाब से ढल गई। छोटे बेटे ने छोटे मोटे व्यवसाय की शुरुआत की और साल बीतते किसी नौकरीपेशा लड़की से शादी कर ली। अब घर में दो बहुएं आ गई।

छोटी बहू नौकरी करती थी इसलिए घर के किसी काम को हाथ नहीं लगाती। बड़ी बहू को बुरा न लगे, इसलिए सास काम मे लगी रहती थी। बड़ा बेटा घर चलाता था और छोटा घर में सामान खरीदता। दोनों बेटों के साथ अंकल आंटी खुश थे। बीच बीच में बेटी आती, बड़ी भाभी जहां उसकी पसंद के व्यंजन बनाती वहीं छोटी उसे और उसके बच्चों को कपड़े दिलाती। खानापीना तो एक दिन में पच जाता लेकिन कपड़े महीनों तक छोटी भाभी की याद दिलाते।

खैर इसी तरह दो साल बीते। घर में बड़े बेटे के दो और छोटे के एक बच्चे ने जन्म लिया। इसके साथ ही छोटे बेटे ने घर में गाड़ी ,एसी ,इन्वर्टर और सुविधा की सभी चीज़े धीरे-धीरे खरीद ली। पापा की मित्र मंडली में पांडेय अंकल एक मिसाल बने रहते कि अचानक एक दिन छोटे बेटे ने किराये का एक घर लेकर उसमें शिफ्ट कर लिया। अब छोटे बेटे के साथ घर का सभी बड़ा-बड़ा सामान भी चला गया।

बड़ा बेटा जब पूरे घर का खर्च चलाता था, तब छोटा टीवी खरीदता था। बड़ा जब बिजली का बिल भरता तब छोटा गाड़ी की ईएमआई भरता। नतीजा, छोटे ने अपना पूरा साजो सामान जमा कर लिया और अपने नये घर की शुरूआत सभी सामान के साथ की, क्योंकि पूरे दो साल घर के खर्चो से मुक्त रहा। महीनों तक पांडेय अंकल लोगों से नज़रे चुराते रहे। उनके छोटे बेटे और बहू की ऐसी चालाकी उन मां बाप के लिए एक सबक है जो आंख मूंद कर बेटों पर यकीन कर लेते हैं और इस तरह से दूसरे सीधे सादे बेटे का नुकसान करवा देते हैं ।

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