बंटवारा-गृहलक्ष्मी की कहानी
Batwara

Hindi Story: कमला घर की बड़ी बहू है हिंदी मीडियम की पढ़ी बेहद सौम्य सरल सीधी साधी और सभी को जोड़ कर चलने वाली सास ससुर की सेवा करने वाली थी, कमला जब से ब्याह करके गुप्ता परिवार में आई थी तभी से गुप्ता परिवार को ही अपना सब कुछ मानकर रात दिन सभी की सेवा में और बड़ी बहू के फर्ज़ निभाने में जुट गई थी..

कमला के पति  सूरज एक मामूली से कंपनी में छोटे पद पर काम करते थे ज्यादा पढ़ें लिखे ना होने के कारण जो नौकरी उन्हें मिली उसी पर ही उन्होंने टिके रहना पसंद किया  सूरज के पिता मिलिट्री से रिटायर्ड  थे तो उनका रुतबा ही अलग था

कड़क स्वभाव और नियम पूर्वक जीने वाले व्यक्ति थे, सूरज के पिता की पेंशन से घर खर्च चलता था , इस लिए कमला की सास का  हुकुम भी घर पर चलता था, और कमला को हमेशा रुतबा दिखाती थी, घर में सूरज की माँ जो कह दे सबको वही मानना पड़ता थाI और हर दिन अपने पति के पैसे का धौस कमला को दिखाती रहती थी, कमला दुःखी तो बहुत होती पर घर को जोड़ के रखना उसके मायके से सिखाया गया था I बिना कुछ भी कहे चुपचाप सास ससुर की सेवा , ननद के घर आना जाना लेना-देना सब कुछ कमला ही करती थी बेटा होने के बाद भी कमला के जीवन में कुछ नही बदला बल्कि उसकी जिम्मेदारी और काम अधिक बढ़ गया I बच्चे को स्कूल  भेजना घर का काम खाना पीना सब कमला ही करती थी.. इसी बीच में दोनों देवरों की शादी हो गई देवर की शादी होने के बाद दोनों ही देवरानी शादी के पहले से नौकरी में थी और अंग्रेजी माध्यम की पढ़ी लिखी होशियार थी,  तो घर में या घरेलू कामों में उन्होंने कभी भी दिलचस्पी नहीं दिखाई और ना ही कभी कमला की सास ने उन्हें कभी घर का काम करने को कहा.

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दोनों सुबह उठ के नाश्ता पानी करके शाम को डायरेक्ट घर आती थी  दिन भर का सारा काम कमला के हिस्से रहता और अगर कमला कभी कुछ कहना भी चाहे तो सास ताना मार देती थी तुम घर में पड़ी- पड़ी  दिन भर करती ही क्या हो , वो दोनों तो बीस – बीस हजार कमा कर ला रहीं हैंI अपनी देवरानियों से मेल मिलाप बनाकर चलो, सास के रोज रोज के ताने से थक कर कमला चुपचाप अपना मन मानकर बस जिंदगी को बिना किसी उम्मीद के जिये जा रही थी! 

अब धीरे-धीरे हालात ऐसे हो गए थे कि देवर देवरानी दोनों ही कमाने की वजह से कमला और सूरज की स्थिति घर में और खराब हो गई क्योंकि कमला घर में ही काम करती थी और सूरज भी बहुत कम कमाते थे और संयुक्त परिवार में जो पैसे कमाता है उसी की इज्जत होती है ऐसे में हर रोज घर का बटवारा करने की धमकी दी जाती थी और किसी तरह कमला ही सबसे मिन्नत करके अलग ना होने , और साथ में रहने के लिए राजी करती थी, लेकिन दोनों देवरानी हमेशा धमकी देती  भाभी भैया का बटवारा कर दो देखते है कैसे इनका पेट पलेगा..

एक दिन कमला के बेटे के स्कूल से फोन आता है, कमला और सूरज दोनों को बुलाया गया है,  कमला की तो डर के  मारे सांस फूल रही नहीं पता क्यों बंटी की प्रिंसिपल ने हमें क्यों बुलाया है! बस स्कूल से फोन आया था, मम्मी पापा  दोनों को आना है,, …”

कमला की  सास ने पीछे से आवाज़ दी “अच्छा जल्दी होकर आओ.  तुम्हारी नन्द शिवा का फोन आया था कि बड़ी भाभी को जल्दी भेज देना, घर में पूजा है कथा का प्रसाद बना देंगी…

घर का भी सब काम पड़ा है सास की भुनभुनाहट से कमला आँखों में आँसू लिए कार में बैठते ही रोने  लगी, “देखा आपने? दोनों देवरानियां सुबह-सुबह ऑफिस निकल लेती हैं, रात को घर पहुंचती हैं, कोई हिसाब नहीं मांगता, मैं आधा घंटा भी बाहर रहूँ तो बवाल मचा देती हैं माजी…. आये दिन दीदी के यहां पूजा-पाठ, जन्मदिन… बस बड़ी भाभी चाहिए काम कराने को मैं ही नौकरानी हूँ क्या,  ऊपर से हर बात पर सुनो कि मंझली बहू बीस हज़ार कमाती है, छोटी पच्चीस! बड़ी बहू है फ़ालतू, हर जगह जाने के लिए… अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ाई की होती तो मैं भी शायद ये दिन न देखना पड़ता दस-पंद्रह हज़ार  मैं भी कमाने लायक होती!..” सूरज कमला को चुप करवा कर स्कूल ले गया

किसी तरह कमला और सूरज ने डरते हुए प्रिंसिपल के‌ ऑफिस में प्रवेश किया.

“बैठिए! मैंने ही फोन करवाया था… कुछ पूछना था आपसे! हिंदी दिवस पर बंटी ने एक संस्कृत में कविता सुनाई थी, उसने बताया कि वो आपने लिखी थी” इतने बड़े स्कूल की प्रिंसिपल होकर भी वो बहुत ही मधुरता से बात कर रही थीं, सूरज और कमला देखते रह गए

“जी! कुछ ग़लत…” सूरज ने पूछा

“नहीं, बहुत ही सुंदर लिखा था मैडम ने, आजकल ऐसी शुद्ध, त्रुटिहीन हिंदी भाषा कम ही देखने को मिलती है. आपकी शैक्षणिक योग्यता?” मैडम.. 

“एम ए, हिंदी साहित्य और बी एड. शादी से पहले हिंदी पढ़ाती थी, इसीलिए भाषा शुद्ध है.” बहुत सालों बाद तारीफ़ सुनकर कमला प्रसन्न हो उठी,, 

प्रिंसिपल बड़ी तन्मयता से सुन रही थीं, “अच्छा! तो अब क्यों नहीं पढ़ाती हैं?.. घर में मनाही है?” या आपको पसन्द नही

कमला, “जहां भी आवेदन किया, अंग्रेज़ी ना बोल पाने के कारण बात नहीं बनी, फिर शादी के बाद घर गृहस्थी में ऐसे उलझी के कुछ होश ही नही रहा I 

 “देखिए! मैं मुद्दे पर आती हूं. आपकी कविता पढ़कर, आपसे बात करके हिंदी भाषा पर पकड़ मैं देख चुकी हूं. डिग्री भी है, अनुभव भी, हमें अपने स्टाफ में आप जैसी अध्यापिका की ही आवश्यकता है , यदि आप इच्छुक हो तो हम चाहते हैं आप  कल से ही जॉइन कीजिये क्यों मिस्टर सूरज आपको कोई दिक्कत तो नही है, प्रिंसिपल हँसते हुए पूछा,, 

सूरज ने हामी भर दी थी अब कमला की खुशी का ठिकाना नही रहा , दोनों घर पहुँचे तो सब उनपे बरसने के लिए तैयार बैठे थेI  छोटी ननद घूरते हुए बोली, “भाभी! कहां थीं आप? फोन भी बंद था, मां ने ही रोटी सेंककर पापा को खिलाई… दीदी के यहां भी जाना है आपको…सूरज ने मुस्कुराते हुए कमला को अपने पास बैठाया, ” कमला शिवा के घर प्रसाद बनाने नहीं जा पाएगी, सर्टिफिकेट्स वगैरह जमा कराने जाना है मम्मी इसको…  बन्टी के स्कूल में इसकी नौकरी लग गई है, 

सभी चौक गए थे और सास परेशान अब तो सारी रिश्तेदारियां संकट में पड़ जाएंगी, ” अब तुम नौकरी अब छोटी-मोटी तीन-चार हज़ार की नौकरी के लिए कहाँ भटकोगी… हटाओ.” सास ने कहा.. 

” बारहवी क्लास के बच्चों को हिंदी पढ़ानी है मम्मी  पचास हज़ार वेतन मिलेगा आपकी बड़ी बहू को, आशीर्वाद दीजिए 

अब तो सास देवरानी देवर सबके चेहरे देखने लायक थे जैसे अब कभी बटवारा उनको करना ही नही है I कमला सबकी भाभी हो गई सब जल्दी से कमला के आव भगत में लग गए…