यह घटना तब की है जब मैं सात साल की थी। एक दिन हम सब (पापा, मम्मी और चार वर्षीय भाई पिंटू) चिडिय़ाघर घूमने गए थे। वहां चिंपैंजी के पिंजरे के पास पहुंचने पर पापा ने पिंटू को डराते हुए कहा, ‘तुम शैतानी बहुत करते हो, आज तुम्हें हम चिंपैंजी के पिंजरे में छोड़कर जाएंगे। यह सुनते ही मैंने तुरंत पिंटू के हाथ से पॉपकॉर्न का पैकेट छीन लिया और बोली, ‘यह तो हमारे लिए छोड़ जाए, हमें भूख लगेगी तो हम क्या खाएंगे। मेरी इस नादानी पर उस समय मम्मी-पापा तो हंस पड़े थे, मगर आज 22 वर्ष बाद भी पिंटू मेरी इस स्वार्थभरी बात को लेकर मेरी खिंचाई करता है, जिससे मैं शर्मिंदा हो जाती हूं।

 

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