Menorrhagia is not normal
Menorrhagia is not normal

Menorrhagia: महिलाओं को पीरियड्स के समय कई तरह की दिक्कतें होती हैं। कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होता है। इस असमान्य स्थिति को मेनोरेजिया कहते हैं। मेनोरेजिया में पूरे समय पेट में दर्द होता रहता है। अगर आप भी इस दर्द को झेल रही हैं तो इसे अनदेखा न करें और समय रहते डॉक्टर से परामर्श लें।

महिलाएं आज भी अपने स्वास्थ्य की चिंता सबसे अंत में करती है। घर और कामकाज की जिम्मेदारी निभाने में तो महिलाएं सफल होती हुई नजर आ रही हैं लेकिन अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति आज भी असफल होती हुई दिख रही हैं। छोटी से बड़ी बीमारी तक का इलाज अपनी दोस्त, रिश्तेदार या गूगल की मदद लेकर घर में ही कर लेती हैं। लेकिन ये सस्ता इलाज कई बार बेहद गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है। महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य को पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता है, नियमित रूप से पीरियड्स होने को अच्छे स्वास्थ्य का संकेत दिया जाता है लेकिन आजकल की बदलती लाइफस्टाइल, प्रदूषण, टेंशन और पौष्टिक आहार की कमी की वजह से महिलाओं को कई तरह की पीरियड्स समस्या हो रही है। इनमें से एक है, असामान्य रूप से ब्लीडिंग होना, जिसे मेडिकल की भाषा में एबनार्मल यूटरिन ब्लीडिंग कहा जाता है। इसमें अनियमित रूप से रक्तस्राव होता है। कई महिलाएं इससे कमजोरी या अन्य किसी समस्या को समझ कर इग्नोर कर देती हैं।
किसी भी स्वस्थ महिला को सामान्य तौर पर पीरियड्स 21 से 35 दिनों में आता है, लेकिन वहीं अगर 21 दिन से कम और 35 दिन से ज्यादा हो जाए तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेने की जरूरत है। एक सर्वे के मुताबिक भारत की 62 प्रतिशत महिलाएं हेवी ब्लीडिंग को बीमारी नहीं मानती हैं। एबनार्मल युटरिन ब्लीडिंग में सामान्य तौर पर अत्यधिक रक्तस्राव ही होता है लेकिन इसके अलावा इसमें ब्लीडिंग के दौरान बड़े-बड़े खून के थक्के भी दिखाई देते हैं। पीरियड्स चार दिनों तक का ही होता है लेकिन मेनोरेजिया या यूटरिन ब्लीडिंग में पीरियड्स सात दिनों से ज्यादा भी हो जाता है।
पीरियड्स में एक महिला के शरीर से 30-40 मिलीलीटर खून शरीर से निकल जाता है, वहीं अत्यधिक रक्तस्राव में 80 मिलीलीटर या उससे भी ज्यादा खून शरीर से निकलता है।
कम रक्तस्राव के साथ 1 से 2 महीने तक लगातार पीरियड्स होते रहना, इसके अलावा चक्कर आने के अलावा कमजोरी के कारण बेहोश हो जाना। कमर और पेट में असहनीय तेज दर्द होने के साथ ही हार्ट रेट भी बढ़ जाता है। खून की कमी के कारण त्वचा पीली पड़ जाती है। जिनको ये समस्या हो जाती है, वह स्वभाव से चिड़चिड़े हो जाते हैं और दैनिक कार्य करने में भी काफी दिक्कत होती है। ये समस्या आमतौर पर 30-45 वर्ष की महिलाओं या टीनेजर को ज्यादा होती है।

Why does this problem occur?
Why does this problem occur?

अत्यधिक रक्तस्राव का प्रमुख कारण तो हार्मोन के संतुलन का बिगड़ना है। महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा कम होने या ज्यादा होने पर ये समस्या हो जाती है।
1. महिलाओं के यूट्रस में हर महीने एक परत बनती है जो पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग के जरिए शरीर से बाहर आ जाती है। हार्मोन का स्तर बिगड़ जाने पर ये परत बहुत मोटी हो जाती है जिसकी वजह से हैवी ब्लीडिंग होने लगती है।
2. प्रेगनेंसी के दौरान जब फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस के बाहर बढ़ने लगता है तो इसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। इस तरह की प्रेग्नेंसी में कई तरह की समस्याएं आती हैं इनमें से एक समस्या हैवी ब्लीडिंग की भी है। कई मामले में गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाना भी मुश्किल हो जाता है।

3.गर्भाशय कैंसर होने के दौरान भी शरीर से काफी मात्रा में खून निकलता है।
4. मेनोरेजिया की समस्या उनको ज्यादा होती है, जिनके या तो पीरियड्स हाल ही में शुरू हुए हैं या जो मेनोपॉज के करीब हैं।
5. बर्थ कंट्रोल के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आईयूडी से साइड इफेक्ट होने पर भी मेनोरेजिया हो सकता है। ऐसा होने पर डॉक्टर आपको बर्थ कंट्रोल के लिए कोई दूसरा विकल्प दे सकते हैं।
6. आजकल ज्यादातर महिलाओं में फाइब्रॉइड की समस्या देखी जा रही है, जो एक प्रकार का नॉन कैंसर ट्यूमर होता है। इसमें भी यूट्रस के रास्ते से अत्यधिक खून बहने लग जाता है।
7. आनुवांशिक भी इसका एक कारण होता है।
8. कुछ ब्लीडिंग संबंधित डिसऑर्डर जैसे कि वॉन विलेब्रांड की बीमारी, एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें ब्लड-क्लॉटिंग खास तौर पर होती है, इससे असामान्य ब्लीडिंग होती है।

Menorrhagia
Menorrhagia

इस बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर कुछ टेस्ट के माध्यम से जांच करते हैं और मरीज को उचित दवाइयां देते हैं। लेकिन अगर दवाइयों से कामयाबी नहीं मिलती है तब डॉक्टर इस बीमारी का सर्जरी के जरिए इलाज करते हैं।
मायोमेक्टोमी: जिनको फायब्रॉइड के कारण ये समस्या होती है, उनकी ये सर्जरी की जाती है इसमें फाइब्रॉइड का साइज, संख्या और यूट्रस में किस जगह पर है ये देखा जाता है।
हिस्टेरेक्टॉमी: इस सर्जरी में यूटेरस और सर्विक्स को स्थायी रूप से निकाल दिया जाता है, जिससे पीरियड्स आना बंद हो जाते है।
डी एंड सी नाम से एक सर्जरी होती है, जिसमें सर्विक्स को खोल कर पीरियड्स में ब्लीडिंग को कम करने के लिए यूटेरस की लाइन से टिश्यू को स्क्रैप करते हैं। इस टेस्ट से घबराने की जरूरत नहीं है।

किसी भी बीमारी में खुद को स्वस्थ रखने के लिए खानपान सबसे महत्त्वपूर्ण होता है। हैवी ब्लीडिंग होने के दौरान शरीर में खून की काफी कमी हो जाती है। खाने में पालक, बीन्स, अंडा, दूध, चीज़, मीट, मछली, सोयाबीन, चावल, दाल, मटर, मेवे का सेवन करें। इन खाद्य पदार्थों में प्रचूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। खाद्य पदार्थ के अलावा शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी खूब मात्रा में पीएं। रोजाना एक वक्त का खाना लोहे के बर्तन में पकाकर खाएं ताकि आयरन की प्रचुर मात्रा शरीर के अंदर जा सके।

पीरियड्स के दौरान अपने जननांग की सफाई का विशेष ध्यान रखें। हाइजीन बनाए रखने के लिए पीरियड्स के दौरान पैंटी लाइनर का उपयोग करें। कॉटन की साफ पैंटी पहनें।
जब महिलाएं अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी खुद लेंगी तो वह अवश्य स्वस्थ रहेंगी। किसी के ऊपर अपना ख्याल रखने की जिम्मेदारी ना डालें। अमेरिकी दार्शनिक, राल्फ वाल्डो इमर्सन की ये लाइन हमेशा ध्यान में रखें ‘द फर्स्ट वेल्थ इज हेल्थ’ जिसका हिन्दी में अर्थ है- ‘पहला धन स्वास्थ्य
होता है।’

सपना झा गृहलक्ष्मी पत्रिका में बतौर सोशल मीडिया मैनेजर और सीनियर सब एडिटर के रूप में साल 2021 से कार्यरत हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता...