Summary: माइक्रो-बोटॉक्स के बारे में जानें सब कुछ
माइक्रो-बोटॉक्स अब सिर्फ एजिंग ट्रीटमेंट नहीं रह गया, बल्कि 20–30 साल के युवाओं के बीच स्किन टेक्सचर सुधारने और भविष्य में झुर्रियों से बचाव के लिए एक ट्रेंडिंग प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट बन चुका है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया ऑयल कंट्रोल, पोर्स को छोटा दिखाने और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करती है।
Micro-Botox Trend: आजकल 20 से 30 साल के युवाओं के बीच माइक्रो-बोटॉक्स का क्रेज़ तेज़ी से बढ़ रहा है। पहले जहाँ बोटॉक्स को सिर्फ बढ़ती उम्र, झुर्रियों और फाइन लाइन्स से जोड़ा जाता था, वहीं अब यंग जनरेशन इसे स्किन केयर + प्रिवेंशन ट्रीटमेंट की तरह देखने लगी है। इंस्टाग्राम, रील्स और सेलेब्रिटी ट्रेंड्स ने भी माइक्रो-बोटॉक्स को काफ़ी पॉपुलर बना दिया है। आइए नई दिल्ली स्थित जिविशा क्लिनिक की फाउंडर व चीफ डर्माटॉलॉजिस्ट डॉ. आकृति गुप्ता से जानते हैं कि क्या है माइक्रो-बोटॉक्स, इसे कैसे किया जाता है और इसके फायदे क्या हैं।
क्या है माइक्रो-बोटॉक्स?

माइक्रो-बोटॉक्स, बोटॉक्स का ही एक एडवांस रूप है। इसमें बोटॉक्स को बहुत ज्यादा डाइल्यूट करके त्वचा की ऊपरी परत में छोटे-छोटे इंजेक्शन्स के जरिए दिया जाता है। ट्रेडिशनल बोटॉक्स मांसपेशियों को रिलैक्स करके झुर्रियां कम करता है, जबकि माइक्रो-बोटॉक्स स्किन टेक्सचर को सुधारने, ऑयल कंट्रोल करने और रोमछिद्रों को छोटा दिखाने का काम करता है।
कैसे किया जाता है माइक्रो-बोटॉक्स?
यह एक नॉन-सर्जिकल और फटाफट होने वाली प्रक्रिया है, जिसे आमतौर पर 20-30 मिनट में पूरा किया जा सकता है। सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ किया जाता है। यदि जरूरत लगे तो हल्का-सा नम्बिंग क्रीम लगाया जाता है। इसके बाद बेहद बारीक सुई से माइक्रो-डोज में बोटॉक्स को स्किन में इंजेक्ट किया जाता है। आमतौर पर ये माथे, गाल, नाक के आसपास, चिन और जॉलाइन एरिया में किया जाता है। प्रक्रिया के बाद व्यक्ति तुरंत अपने रोजमर्रा के काम पर लौट सकता है।
20-30 साल के युवाओं में क्यों पॉपुलर है माइक्रो-बोटॉक्स?

तनाव, अनियमित लाइफस्टाइल, ज्यादा स्क्रीन टाइम, प्रदूषण और हार्मोनल बदलावों की वजह से कम उम्र में ही खुले रोमछिद्र, तैलीय त्वचा, पिंपल्स और बेजान त्वचा नजर आने लगती है। माइक्रो-बोटॉक्स इन सभी समस्याओं को कंट्रोल करने में मदद करता है। युवा इसे “बेबी बोटॉक्स” या “प्री-एजिंग ट्रीटमेंट” भी कहते हैं, क्योंकि इसका मकसद झुर्रियां हटाना नहीं बल्कि उन्हें आने से पहले ही रोकना होता है।
माइक्रो-बोटॉक्स के फायदे
माइक्रो-बोटॉक्स सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि ये त्वचा की सेहत को भी बेहतर बनाता है।
- ऑयल कंट्रोल : ऑयली स्किन वालों के लिए वरदान, क्योंकि ये सीबम प्रोडक्शन कम करता है
- रोमछिद्र छोटे दिखते हैं : चेहरे की बनावट ज्यादा स्मूद और क्लियर लगती है।
- नेचुरल ग्लो : त्वचा फ्रेश और हाइड्रेटेड नजर आती है।
- बारीक रेखाओं की रोकथाम : चेहरे पर झुर्रियां नजर आने से पहले ही कंट्रोल करता है।
- चेहरा फ्रीज नहीं होता : एक्सप्रेशन्स नैचुरल रहते हैं।
- मेकअप दिखता है बेहतर : स्किन स्मूद होने की वजह से मेकअप ज्यादा फ्लॉलेस लगता है।
क्या माइक्रो-बोटॉक्स सुरक्षित है?
यदि माइक्रो-बोटॉक्स को क्वालिफाइड और अनुभवी डॉक्टर द्वारा किया जाए, तो यह पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, चेहरे पर हल्की-सी लालिमा, सूजन या छोटे-मोटे निशान कुछ घंटों के लिए दिख सकते हैं। लेकिन ये अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाएं या किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या से ग्रस्त लोगों को इस ट्रीटमेंट को कराने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
माइक्रो-बोटॉक्स का असर कितने समय तक रहता है?
माइक्रो-बोटॉक्स का असर आमतौर पर 3 से 4 महीने तक रहता है। उसके बाद दोबारा सेशन लिया जा सकता है। रेगुलर ट्रीटमेंट से स्किन की क्वालिटी धीरे-धीरे बेहतर होती जाती है।
