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एक था झीलीमीली-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात
Ek Tha Jhilimili

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

सुबह का वक्त था।

वन में हल्की-हल्की हिलोरें लेती हुई हवा बह रही थी।

मैदान में हरा-हरा घास लहराता था। इसके बीच एक नन्हीं-सी पगडंडी थी। उस पगडंडी पर गिलहरी का बच्चा चलकर जाता था। उसका नाम था झीलीमीली। झीलीमीली बहुत आनंद में था। वह कूदता हुआ अपनी मस्ती में गीत गा रहा था।

सोनेरी सूरज

बनके सर पे झूले रे

रूपेरी चंदा

बनके सर पे झूले रे

चहु और फूले-फूले रे

तितलियां हे-हे झूले रे…मेरे अंगने में…

इस तरह गाते, कूदते झीलीमीली ने एक पेड़ पर तोता-मैना को देखा।

वह बोला, “गुड़ मोर्निंग”

“गुड मोर्निंग झीलीमीली”, बोलकर तोता-मैना पंख लहराते झीलीमीली के पास आ गए।

झीलीमीली ने पूछा, “आज कौन-सा दिन है?”

“रविवार…दो अक्तूबर!” “तोता-मैना साथ में बोले।

“याद है न यह दिन?” – झीलीमीली ने हंसकर कहा।

तोता-मैना ने एक-दूसरे की ओर देखकर बोला, “आज? यह दिन? कुछ याद नहीं आता है। झीलीमीली तुम ही कह दो न…”

“याद करो…याद आ जाएगा…” कहता हुआ झीलीमीली वहां से आगे चला और गीत गाने लगा।

सोनेरी सूरज

बनके सरपे झूले रे

रूपेरी चंदा

बनके सरपे झूले रे…

इतने में चीं-चीं चूही झीलीमीली को मिली। वह बोली, “हैलो झीलीमीली गुड़ मोर्निंग।”

झीलीमीली उसके करीब जाकर बोला “गुड़ मोर्निंग।”

चीं-चीं चूही बोली, “कैसी है खलु आन्टी… ठीक तो है न।”

“हां … हां… मम्मी तो उस झरने की ओर गई है।” झीलीमीली ने उत्तर दिया। फिर ची-चीं चूही को पूछा, “आज कौन-सा दिन है?”

ची-चीं चूही तुरंत ही बोली, “रविवार…दो अक्तूबर।”

झीलीमीली ने फिर कहा, “याद है न आज क्या है?”

“हां… हां… महात्मा गांधीजी का जन्मदिन। लुक्खे की तरब सब मनाएंगे, कोई पार्टी-बार्टी ही नहीं। कुछ अच्छा खाने को ना मिले! “ची-चीं चूही रोष में बोल गई। झीलीमीली गुस्सा हुआ। मुंह फुला के आगे चला गया।

आगे रास्ते में उसे फिर तो कालु कौआ-कौसी, कीटी कोयल मिलें। हूप-हूप करता मणु बंदर मिला। सोनु खरगोश-खरगोशी मिलें। सभी ने एक ही जवाब दियाः “गांधी महात्मा का जन्मदिन!”

मन ही मन में बोलाः “कैसे हैं सब? पिछले बरस मैंने और मेरी मां खल ने कितनी अच्छी तरह से मनाया था मेरा जन्मदिन! उस वक्त सब कहते थे-झीलीमीली अगले बरस हम सब तेरा जन्मदिन इससे भी अच्छा मनाएंगे। तुम नई-नई चॉकलेट लेकर आना। सेब जैसे आकार की बोतल में शरबत…आज दिया ऐसा ही हां…

अरेरेरे…! यह सब भूल गए। आज मेरा जन्मदिन है, यह किसी को याद भी नहीं रहा! उस वक्त सभी ने मिलकर कितना अच्छा गाया था।

हैप्पी… हैप्पी

बर्थ… बर्थ

डे… डे… झीलीमीली को…

बहुत-बहुत शुभकामना हो झीलीमीली को…

कितना मजा आया था उस दिन! आज यह सभी को उसमें से कुछ भी याद नहीं है।

झीलीमीली खिन्न हो गया। खलु ने भी सुबह याद नहीं किया।

दोपहर को वह अपने घर गया। कुछ नहीं करके सो गया। शाम हो गई।

झीलीमीली नींद में था, तब गलु पिल्ला आया। झीलीमीली के कान के पास मुंह रखकर…ऊँ…ऊँ..ऊँ…किया।

झीलीमीली पलक झपकता हुआ जग गया और बोला, “गलु…ऐसा करता है कोई…? मैं तो डर ही गया।”

गलु बोला, “हैपी बर्थडे झीलीमीली…!”

झीलीमीली को बहुत अच्छा लगा। वह घर में गया और एक चॉकलेट ले आया। गलु को देकर बोला, “बोल गलु…मेरा जन्मदिन किसी को भी याद नहीं है। सब मिले पर किसी ने भी मुझे…

“जाने दे न झीलीमीली, चल मेरे साथ हम दूर उस झरने के पास खेलते है” गलु ने कहा।

“लेकिन हम लौटेंगे तब अंधेरा हो जाएगा। इससे अच्छा है, यहीं पर तू रह जा। मैं तुझे दूसरा चॉकलेट देता हूँ। “झीलीमीली उत्साह में आकर बोला।

“नहीं चल, झरने के पास…कहकर गलु उसको अपने मुंह में पकड़कर झरने की ओर भागा। झरने के पास आकर गलु ने उसे वहां रखा।

झीलीमीली ने कहा, “गलु कितना अकेला-अकेला लगता है! यहां पर तो चारों ओर कितना सन्नाटा है!”

थोड़ी देर में आसपास में चहल-पहल हुई। झीलीमीली ने देखा तो… मैना-तोता, सोनु खरगोश, चीं-चीं चूही और उसकी चीमी मा, चीमु पिता, कीटी कोयल, मणु बंदर वगैरह नाचते…उडते…कूदते…गाते हुए आएं…

हैप्पी…हैप्पी…

बर्थ…बर्थ…

डे…डे… झीलीमीली…

रहो सदा स्वस्थ खाली-खाली…

बाद में झरने के पास वाले पेड़ पर लाईट झगमगा उठी! एक पत्थर पर सेब के आकार का बड़ा केक देखकर झीलीमीली की आंखों में हर्ष के आंसू आ गए!

मां खलु ने कहा, “बेटा झीलीमीली…हम सबने आपस में तय किया था कि तुझे सरप्राईज पार्टी देंगे…”

आ, केक काट…

झीलीमीली ने केक काटा। सबने केक खाया और गीत गाएं…नाचे… झूमें…

झीलीमीली मन ही मन में अपने को कहने लगाः “मैं मूर्ख हूँ, लोगों के प्रेम को देख ही नहीं सका। ये लोग मुझे कितना चाहते हैं! लगता है कि जन्मदिन पर किसी से प्रेम के सिवा और कुछ आशा नहीं रखनी चाहिए…

पेड़ पर लाईट का झरना हंस उठा।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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