googlenews
बुरे काम का बुरा नतीजा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Bhasmasur Story
Bure Kaam Ka Bura Natija

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Bhasmasur Story: राजा हिमाचल की मोंडी पारवती से भगवान शंकर की शादी हुई। एक दिन शंकर जी ध्यान मग्न थे। पारवती जी ने अकेलेपन से ऊबकर खीज निकलते हुए नहाने के पहले अपने बदन के मैल से एक पुतला बनाया और शंकर जी की धूनी के पास राख में रख दिया। शंकर जी जब समाधि से जागे तो उस पुतले में प्राण डाल दिए। भस्म से पैदा होने के कारण उसका नाम भस्मासुर हुआ। पार्वती जी ने धूनी की राख उत्तर की तरफ उड़ाई तो वहाँ ढाई दिनों तक चाँदी की बारिश हो गई।

भस्मासुर ने एक पैर पर खड़े होकर बारह वर्ष तक तपस्या की। शंकर जी ने प्रसन्न होकर उससे वर माँगने को कहा। उसने शंकर जी से भस्म करने की शक्ति माँगी। अब वह जिस भी वस्तु पर हाथ रखता, वह भस्म हो जाती। लोग उससे डरने लगे। भस्मासुर में घमंड पैदा हो गया।

एक बार उसने सोचा क्यों न शंकर जी को ही भस्म कर दूँ? शंकर जी ने भागकर पंचमढी में एक गुफा में छिपकर अपनी जान बचाई तथा अपनी रक्षा के लिए गजानदेव को गुफा के मुख पर बैठा दिया। भस्मासुर ने गजानदेव को भी भस्म कर दिया। शंकर जी फिर भागे, कभी जटाशंकर की गहरी गुफा में छिपते, कभी चौरागढ़ की ऊँची पर्वत छोटी पर, लेकिन भस्मासुर लगातार सभी जगह उनका पीछा करता रहा। चौरागढ़ की पिछली खाई से भागे। विष्णु जी को समाचार मिला कि शंकर जी संकट में हैं तो उन्होंने तामिया के समीप पातालकोट की गहरी खाई बना दी और शंकर जी वहाँ जा छिपे।

विष्णु जी ने सोचा था कि भस्मासुर पहुँच न सकेगा पर भस्मासुर तेज गति से कूदता-फाँदता बावन योजन की दूरी पार कर पातालकोट पहुँच गया। वह छलाँग लगाकर जहाँ-जहाँ पैर रखता, वहाँ-वहाँ गहरी खाइयाँ बन जातीं और उनकी मिट्टी पर्वत शिखरों को ऊँचा उठा देती।

शंकर जी एक पहाड़ी दर्रे से निकल कर भागे और वहाँ से पानी की धार बहा दी ताकि भस्मासुर पीछा न कर सके। अब भस्मासुर विष्णु जी के पीछे पड़ गया। जान बचाने के लिए विष्णु जी ने सुन्दर स्त्री का रूप धारण किया। भस्मासुर उस रूप पर मोहित हो गया और विवाह करने के लिए कहने लगा। विष्णु जी ने अपने साथ नाचकर हराने की शर्त रखी। भस्मासुर उन्हीं की नकल कर नाचने लगा। नाचते-नाचते मोहिनी रूपधारी विष्णु जी ने अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया। भस्मासुर ने जैसे ही उनकी नकल करते हुए अपना हाथ अपने सर पर रखा, जलकर भस्म हो गया।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

Leave a comment