Dhobi Aur Kumhar Ki Story in Hindi
Dhobi Aur Kumhar Ki Story in Hindi

Dhobi Aur Kumhar Ki Story in Hindi : तभी उसे बीरबल आते हुए दिखाई दिए। वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। बीरबल ने पूछा, ‘क्या हुआ भाई! इस तरह मुँह लटकाए क्यों खड़े हो?’

कुम्हार ने सारी घटना बताई। बीरबल ने उसकी सारी परेशानी सुनी और उसके कान में कुछ कहा।

दूसरे दिन धोबी हाथीखाने में पहुँचा। कुछ देर बाद अकबर भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने हाथी को देखा और धोबी से बोले, ‘यह हाथी तो वैसा का वैसा ही है। जरा भी सफेद नहीं हुआ। तुम कल दिनभर क्या करते रहे?’

धोबी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘परवरदिगार, बात यह है …।’

‘हाँ, क्या बात है?’ अकबर ने पूछा।

‘हुजूर, अगर कोई बड़ा-सा बरतन हो, जिसमें यह हाथी खड़ा हो सके तो काम आसान हो जाएगा।’ धोबी ने बताया।

अकबर ने आदेश दिया कि हाथी के खड़े होने के लिए बड़ा बर्तन बनवाया जाए। बर्तन बनाने का काम उसी कुम्हार को सौंपा गया।

एक हफ्ते बाद कुम्हार बर्तन लेकर हाजिर हुआ। मन-ही-मन वह सोच रहा था- धोबी का बच्चा समझता होगा कि मैं फँस जाऊँगा। अब देखता हूँ, धोबी कैसे बचेगा?

अकबर ने बर्तन को देखा और आदेश दिया, ‘हाथी को बर्तन में खड़ा किया जाए।’

जैसे ही हाथी को बर्तन में खड़ा किया गया, बर्तन चूर-चूर हो गया। अकबर ने नाराज होकर कहा, ‘क्यों रे, यह कैसा बर्तन बनाया है? यह तो एक बार में ही टूट गया। जल्दी से दूसरा बर्तन बनाकर ला।’

’ कुम्हार बर्तन बनाकर बनाकर लाता रहा और वह बार-बार टूटता रहा। आखिर वह बादशाह के पैरों में गिर पड़ा, ‘हुजूर मुझे माफ करें। मैंने बहुत बड़ी गलती की है।’

इस पर अकबर ने धोबी से कहा, ‘धोबी, मैं जानता था कि यह तुम्हें फँसाना चाहता है। पर तुमने इसकी चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया। हम तुम्हें इनाम देंगे।

धोबी हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। उसने कहा, ‘जहाँपनाह! इनाम के असली हकदार तो बीरबल जी हैं। उन्हीं ने मुझे यह तरकीब सुझाई थी।’

बादशाह अकबर ने बीरबल की ओर देखा। बीरबल धीमे-धीमे मुस्करा रहे थे।

अकबर बोले, ‘बीरबल, तुम हमारे दरबार के अनमोल रत्न हो। तुम गरीबों के रक्षक भी हो।

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