bail ka doodh story in Hindi
bail ka doodh

bail ka doodh story in Hindi : बादशाह को एक बार सनक हुई कि उन्हें बैल का दूध चाहिए और उन्होंने वह काम सौंप दिया बीरबल को। बीरबल की बुद्धि की परीक्षा या अनोखे उत्तर या मनोरंजन के लिए ही वे अजीब सवाल उठा दिया करते थे।

‘बैल का दूध?’ बीरबल चौंके।

‘हाँ।’

‘लेकिन हुजूर, दूध तो गाय देती है।’

‘इस बात को सब जानते हैं, तुम नई बात नहीं बता रहे हो। हमें बैल का दूध चाहिए और वह तुम लाओ।’ बादशाह ने आदेश दिया।

‘ठीक है, ला देंगे।’ बीरबल ने स्वीकार करते हुए कहा।

‘कब तक?’

‘आठ दिन में।’

‘ठीक है, ला देना। नहीं लाए तो सजा दी जाएगी।’

‘मंजूर है।’

‘अब तुम बैल का दूध लेकर ही आओगे।’

‘जी, अच्छा ।’

‘अपने घर पहुँचने तक बीरबल ने तरकीब खोज ली थी। उसने योजनानुसार अपनी पुत्री को बादशाह के महल के पीछे आधी रात के समय कपड़े धोने के लिए भेज दिया।

वह पहुँच गई और कपड़े धोने लगी।

आधी रात का समय था।

जान-बूझकर वह आवाज भी जोर से कर रही थी।

बादशाह की नींद में बाधा पड़ी तो अर्दली को भेजकर लड़की को अपने पास बुलाया और उससे पूछा–

‘तुम इस वक्त पकड़े क्यों धोती हो?’

‘जी बात ऐसी है …।’

‘क्या?’

‘बात यह है कि आज मेरे पिताजी ने एक बच्चे को जन्म दिया है-वे जच्चा हैं। न तो आज मुझे वक्त मिला और न कल दिन में वक्त मिलेगा। इसलिए रात में कपड़े धो रही हूँ।’

‘मर्दो के बच्चे नहीं होते, बेटी!’

‘मर्दो के बच्चे नहीं होते तो बैल दूध कैसे दे सकता है?’

बादशाह चौंक पड़े, ‘तुम बीरबल की बेटी तो नहीं हो?’

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