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मौत-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Aakash lok story
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भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Aakash Lok Story: कई दिनों की बात है, भगवान सृष्टि की रचना कर रहे थे। उन्होंने तीन लोक बनाए, सबसे पहले आकाश लोक, फिर भूलोक और फिर पटल लोक। उस समय भू लोक में सब प्राणी अमर थे। भगवान ने एक संतान उत्पन्न कर उससे भूलोक में प्राणियों की जातियाँ उत्पन्न कराई, जिन्होंने अपने-अपने वंश बढ़ाए। भूलोक में जनसंख्या और अव्यवस्था बढ़ी तो भगवान को फिक्र हुई कि यदि भूलोक में मृत्यु नहीं होगी तो आकाश लोक में कौन जाएगा? कोई नहीं जाएगा तो आकाश लोक का क्रिया-कलाप ही नहीं हो सकेगा।

भगवान ने सोचा-विचारा तो उन्हें ऐसा लगा कि भूलोक में प्राणी को मरना ही होगा तभी आकाश लोक में आत्माएँ जा सकेंगी। अपने आप तो मरने के लिए कोई भी तैयार न होगा। लोग मृत्यु को तभी स्वीकार करेंगे जब वह सबके लिए अनिवार्य हो। उनका पुत्र भूलोक में सबसे बड़ा था। उसी ने भूलोक में जीवनारंभ किया था। इसलिए सबसे पहले उसे ही मौत आनी चाहिए। वह अपने आप तो मर नहीं सकता था, इसलिए भगवान ने स्वयं उसका वध कर दिया ताकि उसकी आत्मा को आकाश लोक ले जा सकें। बाद में अन्य जीवों की आत्माएँ उसी की तरह स्वर्ग पहँच सकेंगी। पत्र के न रहने पर भगवान ने उसके शरीर को दफन करने के लिए उठाया और जाने लगे। तब तक उनकी पत्नी को इस बात का पता चल गया। उसने परमात्मा का रास्ता रोककर उनसे पुत्र का शरीर छीन लिया और गोद में लेकर जिद करने लगी कि इसे फिर से जिन्दा कर दो।

भगवान ने बहुत समझाया कि वह बच्चे का शव दे दे ताकि उसे दफनाया जा सके और यह की उसकी आत्मा आकाश लोक ले जा सके। उसे वापिस शरीर में नहीं डाला जा सकता। पत्नी के न मानने पर भगवान ने एक उपाय सोचा। उन्होंने जामुन के बीज की रचना कर उसे घर के पिछवाड़े बो दिया। उसमें से अंकुर निकला और धीरे-धीरे बढ़कर झाड़ बन गया। उसमें फूल हुए फल लगे। फल पककर गिरे तो भगवान की स्त्री ने कौतूहलवश कुछ फल खा लिए। जामुन फल खाने से उसके होंठ तथा मुँह भी लाल-लाल हो गया। तब भगवान ने उससे कहा कि वह डायन है, उसी ने अपने बच्चे के प्राण लेकर उसका खून पिया है। भगवान ने एक आईना लाकर उसमें अपनी पत्नी को उसका चेहरा दिखाया। उनकी पत्नी ने सोचा की शायद नींद में उसने ही अपने पुत्र का वध कर अनजाने में उसका खून पिया है। वह चीख-चीखकर रोने लगी तो भगवान ने उससे पुत्र का शव लेकर दफन कर दिया। शरीर में लौटने की राह न रहने पर पुत्र की आत्मा आकाश लोक चली गई। तब से भूलोक में हर जीव की मृत्यु होने लगी।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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