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गर्भावस्था में आने वाले इन शारीरिक बदलावों की वजह से सेक्स इच्छा भी सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। आपको उन नकारात्मक प्रभावों को ज्यादा से ज्यादा घटाना सीखना होगा ताकि सेक्स जीवन पर उनका अधिक असर न पड़े।

संवेदनशील वक्ष :- कुछ दंपत्तियों के लिए तो इन दिनों वक्ष का आकर्षण काफी बढ़ गया है लेकिन कई महिलाओं के वक्ष सूज जाते हैंऔर हाथ लगाने से ही दर्द होने लगता है। यदि आपका साथ भी ऐसा है तो साथी को पहले ही बता दें व उसे यह भी याद दिला दें कि पहली तिमाही के बाद यह सब ठीक हो जाएगा।

थकान :- जब आपमें कपड़े उतारने तक की हिम्मत न हो तो ऐसे में सेक्स का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। वैसे चौथे महीने के अंत तक यह थकान काफी हद तक संभल जाएगी। हालांकि यह आखिरी तिमाही में लौट आएगी। तब तक जब भी मौका मिले, थोड़ा रुमानी हो जाएं। इसके लिए रात के खाने के बाद का इंतजार न करें। दोपहर की झपकी के साथ थोड़ा सेक्स ठीक रहेगा या फिर बिस्तर में सुबह का ऐसा नाश्ता लें, जो सारा दिन याद रहे ।

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आपका बदलता आकार :- जब आपका पेट हिमालय पर्वत की तरह फूल रहा हो तो प्यार करना काफी असहज और बेतुका सा लग सकता है। वैसे भी ऐसी देह आपको सेक्सी महसूस ही नहीं करने देती जबकि कुछ पुरुषों में ऐसा शरीर देखकर सेक्स की स्वाभाविक इच्छा पैदा होती है। अपने शरीर को लेस वाली लिंगरी से सजाएं या प्यार के घोंसले को हल्की कैंडल लाइट से रौशन करें। अपने मन से नकारात्मक सोच को निकाल दें और हमेशा याद रखें कि प्रेगनेंसी में ‘बिग इज ब्यूटीफुल’।

कोलोस्ट्रम का रिसाव :- गर्भावस्था के अंतिम कुछ महीनों में कई महिलाओं के वक्ष से कोलोस्ट्रम का रिसाव होने लगता है। फोरप्ले के दौरान आपको इससे थोड़ी उलझन हो सकती है। इससे परेशान न हो, आपके साथी को कोई दिक्कत नहीं होगी। आप यहां से ध्यान हटाकर शरीर के दूसरे हिस्सों पर लगाएं।

ऑर्गैज्म से मिसकैरेज पर जल्दी प्रसव होने का डर :- हालांकि चरम सुख के बाद गर्भाशय में काफी संकुचन हो सकता है और यह कई महिलाओं में काफी अधिक होता भी है। यह संभोग के बाद आधे घंटे तक भी जारी रह सकता है लेकिन यह लेबर का संकेत नहीं है। सामान्य गर्भावस्था में इससे कोई नुकसान नहीं होता। यदि इससे बचने का कोई कारण (मिसकैरेज या प्रीटर्म लेबर का डर, प्लेसेंटा की समस्या) होता जो डॉक्टर ने पहले ही बता दिया होता।

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योनि के स्राव में बदलाव :- गर्भावस्था में योनि का स्राव अक्सर बढ़ जाता है। उसके रंग व गंध में भी बदलाव आ सकता है यदि आपकी योनि पहले काफी सूखी रहती थी तो यह गीलापन सेक्स को आनंददायक बना सकता है, कई बार गीलापन इतना ज्यादा होता है कि आपके साथी के लिए सेक्स करना मुश्किल हो जाता है। स्राव की गंध व स्वाद की वजह से मुख मैथुन भी नहीं हो पाता प्यूबिक एरिया व जांघों पर हल्के सुगंधित तेल की मालिश से थोड़ी राहत मिल सकती है कुछ गर्भवती मांओं को अक्सर योनि में सूखेपन की शिकायत रहती है वे सेक्स के दौरान वाटर बेस्डल्यूब्रीकेंट (के-वाई या एस्ट्रोग्लाइड) इस्तेमाल कर सकती हैं।

सर्विक्स की संवेदनशीलता से रक्तस्राव :- गर्भावस्था में गर्भाशय के मुख की संवदेनशलता भी काफी बढ़ जाती है यदि संयोग के समय शिश्न काफी भीतर तक जाए तो हल्का रक्तस्राव हो सकता है। इससे घबराएं नहीं लेकिन अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी अवश्य दें। इसके अलावा और भी कई भावनात्मक कारण आपके सेक्स आनंद को घटा सकते हैं। बेहतर होगा कि सभी विषयों पर खुलकर बात की जाए।

भ्रूण को चोट लगने या मिसकैरेज होने का भय :- चिंता छोड़ें व सेक्स का भरपूर आनंद लें। सामान्य गर्भावस्था में सेक्स से कोई नुकसान नहीं होता। शिशु बड़े आराम से एम्नियोटिकद्रव्य में सुरक्षित है। आपका गर्भाशय भी पूरी तरह से बंद है यदि डॉक्टर नहीं चाहेंगे कि आप गर्भावस्था में सेक्स करें तो वह इसका कारण पहले ही रूप में देंगे वरना आप बड़े आराम से अपनी सेक्स लाइफ जी सकती हैं।

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उबकाई व उल्टी :- मार्निंग सिकनेस आपके अच्छे पलों के बीच रुकावट बन सकती है डिनर के समय तो आप कुछ और नहीं कर सकती, न! इसलिए अपने वक्त का सोच-समझकर इस्तेमाल करना सीखें। यदि सूरज निकलने पर आप ज्यादा परेशान होती हैं तो सेक्स के लिए शाम के घंटे रखें। यदि शाम को ज्यादा जी मिचलाता है तो सेक्स के लिए सुबह वाला समय ठीक रहेगा। यदि आपकी सुबह-शाम हालत खराब रहती है तो आप दोनों को इन लक्षणों के संभलने तक ठहरना होगा। पहली तिमाही के आखिर तक काफी कुछ संभल जाएगा। चाहे जो भी हो, अगर तबियत ठीक न हो तो स्वयं को सेक्सी बनाने की कोशिश न करें। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

इस बात का डर कि भ्रूण सब देख रहा है या उसे पता चलता है :- ऐसा हो ही नहीं सकता! हालांकि चरमसुख के संकुचन से उसे हल्के झूले का मजा तो मिलेगा लेकिन वह नहीं देख सकता कि आप क्या कर रहे हैं और नहीं उसके पास इसकी कोई याद रहेगी। मूत्राशय की गतिविधि के कारण ही भ्रूण की प्रतिक्रिया(सेक्स के दौरान हलचल घटना फिर हलचल व लाते मारना तेज होना, चरम सुख के बाद हृदय गति बढ़ना) सामने आती है।

शिशु के सिर पर चोट लगने का डर :- हालांकि आपका साथी मुंह से नहीं कहेगा लेकिन उसके मन में यह डर होता है। दरअसल कोई भी लिंग इतना बड़ा नहीं होता कि वह शिशु के सिर के पास पहुंच सके। बेबी बड़े आराम से अपने घर में है। यहां तक आपके शिशु का सिर पेल्विस के पास भी है, तो भी लिंग उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हां यदि इससे बेचैनी होती हो, तो न करें?

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सेक्स से संक्रमण का डर :-  यदि आपके सर्विक्स का मुंह बंद है और साथी को यौन रोग नहीं है तो संभोग से आपको या शिशु को संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। शिशु, वीर्य व संक्रमण के कीटाणुओं से पूरी तरह सुरक्षित है।

गर्भावस्था के अंत में सेक्स से प्रसव जल्दी हो सकता है :- यह सच है कि गर्भावस्था पास आने पर चरमसुख के बाद होने वाला संकुचन शक्तिशाली हो जाता है लेकिन जब तक सर्विक्स तैयार नहीं होगा, इस संकुचन से प्रसव नहीं होगा। अध्ययन तो कहते हैं कि गर्भावस्था के अंत तक सेक्स के लिए सक्रिय रहने वाली महिला सही समय पर ही प्रसव करती है।

जलन :-  हो सकता है कि साथी के मन में जलन आ जाए। उसे लगने लगे कि गर्भावस्था ने आपको सबके आकर्षण का केन्द्र बना दिया है या फिर आपको लगने लगे कि आपको फंसा कर वह जिन्दगी के मजे ले रहा है। ऐसी भावनाएं बिस्तर से बाहर ही बाँट लें तो बेहतर होगा।

 
 

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रिश्तों में आता बदलाव :- हो सकता है कि आपको इन बदलते रिश्तों के साथ समझौता करने में मुश्किल हो रही हो। आपको लग रहा होगा कि अब आप सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका, या पति-पत्नी नहीं बल्कि माता-पिता बनने वाले हैं। यह भी हो सकता है कि यह बदलाव आपके संबंधों को पहले से भी मजबूत और मधुर बना दे।

आकर्षण पर हावी होती चिंता :- माना आप इस समय तनावग्रस्त हैं। शिशु आने का समय नजदीक आ रहा है। ऐसे में सेक्सी भावनाएं पैदा नहीं हो पातीं। आने वाली नई जिम्मेदारियां,भावनात्मक व आर्थिक चुनौतियाँ दिमाग में चक्कर काटती रहती हैं। बेहतर होगा कि इन बातों को बिस्तर पर साथ लाने की बजाए पहले ही कह दें।

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