Khichdi is an easily digestible food
Khichdi is an easily digestible food

Khichadi Benefits: सेहत बिगड़ने पर खिचड़ी खाने की सलाह सभी देते हैं क्योंकि सबसे सुपाच्य आहार है। यह पेट को आराम देता है और मन को तृप्ति!

हम सब जानते हैं कि हमेशा ऐसा भोजन करना चाहिए जो आसानी से पच जाए और हमारे शरीर पर ज्यादा बोझ न डाले। साथ ही वह हाइड्रेटिंग और पोषक तत्वों से भरपूर हो। ऐसी सारी खूबियों वाला एक ही डिश है- खिचड़ी। शायद इसी वजह से कुछ साल पहले तक ये हर रसोई में रोज बनती थी। अब वक्त आ गया है इसे फिर से अपनी थाली में लाने का, क्योंकि इसके फायदे सच में गिनाए नहीं जा सकते। खिचड़ी नाम संस्कृत के शब्द खिच्चा से आया है। ये दरअसल एक स्मार्ट वन पॉट डिश है जो अपने आप में संपूर्ण है। वास्तव में, ये सादी-सी दिखने वाली खिचड़ी असल में पौष्टिक खाने का पहला मास्टरस्ट्रोक थी। जिसने भी इसे सबसे पहले बनाने का आइडिया दिया होगा, वो वाकई काबिले तारीफ था। हां, यह सच में एक बेहद कमाल का भोजन है।

7 fun reasons to eat khichdi
7 fun reasons to eat khichdi

1.खिचड़ी झटपट तैयार हो जाती है। बस दाल, चावल, सब्जियां और थोड़ा मसाला कुकर में डालिए और 15 मिनट बाद गरमा-गरम खिचड़ी तैयार हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि यह पैक्ड या रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ जितनी जल्दी बनने वाली डिश है, लेकिन ये सेहत से भरपूर है।

2.खिचड़ी सेहत का खजाना है। इसमें वो सब कुछ है, जो सेहत को बस फायदा ही फायदा पहुंचाते हैं। इसमें कम फैट, ज्यादा फाइबर और जरूरी विटामिन व मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही, इसमें कैलोरी भी संतुलित रहती है। मसलन, दो कटोरी (करीब 250 ग्राम) खिचड़ी में लगभग 400 कैलोरी होती है। अगर इसके साथ आप दही लेते हैं, तो 500 कैलोरी से कम में एकदम पौष्टिक, भरपेट और पूरा मील मिल जाता है। अब कैलोरी गिनने की चिंता ही नहीं रहती।

3. खिचड़ी प्रोटीन का एक बढ़िया स्रोत है। अक्सर शाकाहारी खाने में प्रोटीन पूरा नहीं मिलता, लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे पूर्वजों ने खिचड़ी के माध्यम से (भले ही अनजाने में) एक रास्ता खोज लिया था। दाल-चावल के इस कॉम्बिनेशन में चावल में कमी वाले अमीनो एसिड लाइसिन और दाल में कमी वाले अमीनो एसिड (सिस्टीन और मेथियोनीन) की पूर्ति हो जाती है, जिससे अमीनो एसिड प्रोफाइल पूरी हो जाती है। इस तरह खिचड़ी पूरी तरह से प्रोटीन संतुलित भोजन बन जाता है।

4.क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारा पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है, तो खिचड़ी ही सबसे ज्यादा क्यों पसंद की जाती है? ऐसा इसलिए है क्योंकि यह आंतों पर ज्यादा जोर नहीं डालती और आसानी से पच जाती है। यही कारण है कि दस्त होने पर चावल का मांड पिलाया जाता है और गुजराती घींश् (दही चावल) बीमार लोगों की थाली में हमेशा रहता है। इसके अलावा, यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है क्योंकि यह खाना बनाते समय पानी सोख लेता है, इसलिए यह एक हाइड्रेटिंग फूड भी है।

5. अब अगर आप चावल खाने को लेकर चिंतित हैं (क्योंकि खिचड़ी चावल से ही बनती है) तो चिंता मत लीजिए। खिचड़ी दरअसल एकदम सर्वोत्तम आहार है, जिसमें हम आराम से अलग-अलग सब्जियां डाल सकते हैं। इससे फाइबर और पोषण दोनों मिल जाते हैं, जो रोज के आहार में अक्सर
छूट जाते हैं।

6.अक्सर लोग गलतफहमी पाल लेते हैं कि खिचड़ी (क्योंकि इसमें चावल होता है) शुगर बहुत जल्दी बढ़ा देती है, क्योंकि यह एक हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड है लेकिन सच यह है कि खिचड़ी में ढेर सारी सब्जियां और दाल होती हैं और इसे अक्सर दही या मछली की करी के साथ खाया जाता है। ऐसे में इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम हो जाता है और ये डायबिटीज वालों के लिए
भी फायदेमंद बन जाती है।

7.आखिरकार, मान लीजिए हम सभी को कंफर्ट फूड खाने का शौक है, खासकर ऐसे खाने का जो हमें खुश रखें, तब भी जब हम उदास हों। और खिचड़ी इस सूची में सबसे ऊपर है। एक तो इस हल्के आहार जुड़ी बचपन की खुशनुमा यादों की वजह से और दूसरा इसलिए क्योंकि चावल खाने से
सेरोटोनिन का लेवल बढ़ता है। और सेरोटोनिन उन हैप्पी हार्मोनों में से एक है जो मूड को बेहतर बनाता है। यह मूड अच्छा करता है और दिमाग को शांत करता है।

जरूरत अनुसार खिचड़ी बनाएं

पेट खराब है तो छिलका मूंग की खिचड़ी खाएं और भूख खोलनी हो तो अरहर दाल वाली खिचड़ी बनाकर खाएं। ताकत के लिए उड़द दाल वाली खिचड़ी खाएं।