Humanity Story: ” हेलो ….हेलो…हम भीमा बोल रहे हैं!” कई बार फोन लगाने के बाद अविनाश ने फोन उठाया। देखा घर से फोन था ।उन्होंने कहा” हां बोलिए भीमा काका!,कैसे फोन किया?” ” मालिक…!, बड़े मालिक नहीं रहे।” “अरे..कब…कैसे…!!!अविनाश की जुबान थरथराने लगी थी। ” आज सुबह तड़के ही चले गए मालिक..!साँस नहीं ले पा […]
Author Archives: सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
स्वाभिमान-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Stories in Hindi: बहुत देर कमरे में बंद होकर घुटती कमला देवी की आंखों से आंसू बह रहे थे और सिसकियां गले में घुट रही थी। अपने जज्बात वह प्रकट भी नहीं कर पा रही थी और न ही उनके तीनों बेटे उनकी बात सुन भी रहे थे। उन्हें पता था कि कोई उन्हें मनाने […]
रहस्यमयी आइना-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Mysterious Story: “लावणी… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं…. तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगा….!”ठाकुर वीरप्रताप ने लावणी के दोनों हाथों को जोर से पकड़ते हुए कहा।लेकिन लावणी तो कहीं किसी सोच में गुम थी।ठाकुर वीर प्रताप सिंह की आवाज उसके कानों में जा ही नहीं रही थी। ठाकुर वीर प्रताप ने उसके चेहरे को देखा” […]
लाल गुलाब-प्रेम कहानी
Hindi Love Story: एक ऑनलाइन पत्रिका जिसके लिए में काम करता था उसमें लिखने का इस माह का शीर्षक था —प्यार का लाल रंग! इस शीर्षक को पढ़ते ही मेरे अंदर कुछ चटक सा गया ।मन में कई ख्याल आ गए। ना चाहते हुए भी एक बार फिर से जान्हवी का चेहरा मेरी आंखों के […]
शुभ दीपावली-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Shubh Deepawali Kahani: कई महीनो से रमाकांत जी की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी। उम्र भी हो गया था। रिटायरमेंट भी हो चुके थे । उम्र की इस दहलीज में पहुंचने के बाद जिंदगी का कोई भरोसा नहीं रहता। वैसे तो उम्र का कोई भी भरोसा नहीं लेकिन फिर भी अब रमाकांत जी की […]
ये रिश्ता क्या कहलाता है…!-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Story: बस एक चुटकी सिंदूर और पल भर में रिश्ते बदल जाते हैं।वही जो एक अजनबी था कभी, सबसे अजीज बन जाता है।जिसके लिए और जिसके साथ पूरी जिंदगी साथ चलने की कसम खानी पड़ती है और हर पल अपनी परीक्षा भी देनी पड़ती है।ऐसे ही एक कहानी में आप सभी के समक्ष प्रस्तुत […]
“उम्मीदों भरी दीपावली”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi Story: “अम्मा, आपके पैरों में तेल लगा दूं?” शांताबाई ने तेल की शीशी हाथ में लिए विमला देवी से पूछा।” हां बिटिया, लगा दे बड़ा उपकार होगा!” “अरे अम्मा लाओ पैर दो। इसमें उपकार कैसा?” शांताबाई ने विमला देवी के पैर अपने हाथों में लेकर उनके घुटने से पैर तक में गर्म तेल से […]
एक नई पारो…!-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi ki Kahani: वाराणसी कबीरचौरा मुहल्ला“मां हम विद्यालय जा रहे हैं।?”” हां बेटी जाओ, मन लगाकर पढ़ना।” काशी के आंखों में आंसू आ गए।बालों में दो चोटियां लाल फीते से गुंथी, स्कूल ड्रेस वाली सलवार कुर्ती और दुपट्टा,कंधे पर स्कूल का बस्ता टांगें हुए कोयल को देखकर काशी की आंखों में कई सवाल उठ गए।काशी […]
मोक्ष—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Story: “विनायक सर, आपको क्या हुआ?आप ठीक तो है!” डॉ विनायक को उन्हीं के टेबल पर सिर झुका कर बैठे हुए देखकर उनके कंपाउंडर विनीत ने कहा। “हां ठीक है!, बड़ी मुश्किल से विनायक ने सीधा होते हुए कहा। “पर मुझे लग रहा है कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है?” ” नहीं नहीं मैं […]
यादें कुछ पुरानी सी…!—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Yaadein Hindi Kahani: सामने बरगद अपनी विशाल बाहें फैलाए खड़ा था…मेरे इंतजार में!, मुझे गले लगाने के लिए!मैं वहां खड़ा था ,उसके नीचे..आज उसकी स्नेहिल छाया मुझे मेरे बाबूजी की याद दिला रही थी।बाबूजी तो अब थे नहीं मगर उनकी स्मृतियां मेरे साथ थीं।सूना.. सूना सा घर…!,मिश्री सी खनक अभी भी मेरे कानों में गूंजी।ऐसा […]
