Hindi Kahaniya: दो दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। स्कूल में छुट्टियां पड़ गई थीं।घर में बंद रोहन का मन नहीं लग रहा था आखिर वह कितना टीवी भी देखें..।मम्मा ने बाहर निकलने से सख्त मनाही की थी। बाहर जितनी तेज बारिश थी उतनी ही तेज हवा भी चल रही थी।दो दिनों बाद हवा […]
Author Archives: सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
बदला—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Badla Grehlakshmi Story: “मिस्टर नरेंद्रनाथ !, आप यहां खड़े होने के लिए लायक भी नहीं है।आप अभी इस जगह से निकल जाइए!”चिल्लाते हुए वीरेंद बोलता जा रहा था..। अपमान की आग में झुलस कर नरेंद्र अपना सिर झुकाए खड़े थे।“पर वीरु…,तुम्हें हुआ क्या है?तुमने धोखे से मेरी सारी प्रॉपर्टी और बिजनेस में साइन करवा लिया…अब […]
बूढ़ी हूँ…पर मरी नहीं…!!-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Old Age Story: “…हाँ…ठीक है.. बेटा….!,जैसा ठीक समझो..!”रंजना जी ने ठंडी साँस लिया और फोन रख दिया।उनकी बेबसी आँखों से बह निकली थी। उनका हर दिन सोते हुए बीतता था और रात जागते हुए।उम्मीद रहती थी कि दोनों बेटे फोन करेंगे और उसका हालचाल लेंगे !इसी उम्मीद में रंजना जी पूरी रात आंखों आंखों में […]
पापा ने मुझे माफ कर दिया-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Father and Daughter Story: मैं यमुना विहार में खड़ी मेट्रो का इंतजार कर रही थी ,तभी सामने से मेट्रो आती दिखाई दी।जब मेट्रो आती है तो भीड़ वैसे ही आ जाती है।भीड़ के साथ मैं भी अंदर घुस गई बगैर सोचे समझे।आज मेरी गाड़ी खराब हो गई !शांतनु के पास समय नहीं था।वह किसी सर्जरी […]
गलती किसकी-गृहलक्ष्मी की कहानी
Mistake Story: अचला जी की आंखों के आंसू आज थम ही नहीं रहे थे। वह चुपचाप अपने कमरे में बैठी आंसू बहाए जा रही थी। थोड़ी सी गलती और लापरवाही का नतीजा आज उनकी लाडली काजल भुगत रही थी। अचला जी अपनी पुरानी गलतियों को याद कर रहीं थीं। जब उनके पति ने उन्हें एक […]
” दर्प “-गृहलक्ष्मी की कहानियां”
Hindi Kahani: “पापा मुझे फाइन आर्ट्स में नाम लिखवा दो।मेरे सारे सहेलियां वही कर रहीं हैं!”शुभांकर दास जी मंदमंद मुस्कुराए फिर बोले“हाँ जरूर बिटिया…!,हम तुम्हारा नाम वहीं लिखवा देंगे।तुम निश्चिंत रहो।”यह सुनकर वर्षा खुशी से खिल उठी। अपने पापा के गले लग कर खिलखिलाकर बोली“थैंक्यू पापा!”वर्षा खुशी से फुदकती हुई बाहर चली गई ।शुभांकर जी […]
बड़ी दी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Sister Story: “केशव !,कैसे चलेगा …ऐसे…!,कहां से होगा सब… क्या करें हम… कहां जाएं… किसके सामने रोएं… और हाथ फैलाएं…!!”मेरी पत्नी माला मेरे कंधे पर सिर रखकर बिलख-बिलख कर रो रही थी।रोने वाली बात ही थी। मैं भी घबरा गया था। ऐसा लग रहा था कि पांव के नीचे से किसी ने पूरी जमीन […]
सूनी अंगना खिले नाही फूल-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahaniya: सुबह-सुबह मोबाइल में रिंग हो रहा था। बबलू भैया ने फोन किया था। मेरा दिल एक बार धक से कर गया लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत कर फोन उठाया और कहा ” प्रणाम बबलू भैया!, कैसे हैं आप?” ” बिल्कुल ठीक हूँ सुरभि। तुम लोग कैसे हो? विनीत कैसे हैं और अपना बिट्टू..!” […]
एक नया सूर्योदय-गृहलक्ष्मी की कहानियां
New Beginning Story: बाहर सड़क में सन्नाटा पसरा हुआ था इक्का-दुक्का जाते हुए वाहनों के शोर सुशील जी के कानों में शोर मचाते हुए पार हो जाते थे। कई बार वह सोचते काश कोई उनके दरवाजे आकर रुके और उनसे उतर कर उनके तीनों बच्चों में से कोई उन्हें सरप्राइस कर जाए।“… पापा हम आ […]
लव सदाबहार..!-गृहलक्ष्मी की कहानी
प्रगति मैदान दिल्ली में लगातार क्रम से कई स्टॉल्स लगे थे।ये सारे स्टॉल्स कॉलेज की तरफ से एक एक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए था । टीचर्स ने हम बच्चों को चार ग्रुप्स में बांटा था।चारों ग्रुप में कंपटीशन थे।जिनके स्टॉल की सबसे ज्यादा बिक्री होगी,वह विनर टीम बनेगी। मैं, कविता ,भावना और सुमन चारो एक ग्रुप […]
