Shubh Deepawali Kahani: कई महीनो से रमाकांत जी की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी। उम्र भी हो गया था। रिटायरमेंट भी हो चुके थे । उम्र की इस दहलीज में पहुंचने के बाद जिंदगी का कोई भरोसा नहीं रहता। वैसे तो उम्र का कोई भी भरोसा नहीं लेकिन फिर भी अब रमाकांत जी की उम्र सत्तर साल से ज्यादा ही हो चुकी थी।
उन के दोनों बच्चे अच्छी तरह से सेटल थे। दोनों का शादी ब्याह हो चुका था। बाल बच्चे भी हो चुके थे।
कहने को रमाकांत जी बहुत ही सुखी थे।
हम दो हमारे दो इस फार्मूले को चरितार्थ करते हुए उन्होंने अपनी छोटी सी कुटिया को फूलों की तरह महका कर रखा था।
उनकी दोनों बच्चे संदीप और प्रदीप दोनों ही अपने पिता रमाकांत जी की तरह ही कामयाब थे।
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बड़ा बेटा संदीप सरकारी बैंक में मैनेजर था और छोटा प्रदीप भी आइसीआइसीआइ बैंक में काफी ऊंचे पद पर काम करता था।
दोनों की पत्नियां भी वर्किंग थीं। रमाकांत जी रिटायरमेंट बड़ी खुशी से काट रहे थे।
कभी इस बेटे के पास ,कभी उसे बेटे के पास और कभी अपनी इस हाथों से बने हुए आशियाने में उनके दिन अच्छे से कट रहे थे ।
मगर बीते कुछ महीनो से उनकी तबीयत ठीक नहीं रह रही थी। उनकी पत्नी सुधा अक्सर ही घबरा जाती थी।
वह चाहकर भी ना बेटे बहू को बुला सकती थी और न ही वहां जा सकती थी क्योंकि उनके फैमिली डॉक्टर और बहुत सारे मेडिकल फैसिलिटीज यहीं थे।
ऑफिस की तरफ से पेंशन के साथ इलाज का आधा खर्चा भी मिल रहा था।
लेकिन उम्र का यह पड़ाव प्रश्न चिन्ह बना देता है। रमाकांत जी की पत्नी सुधा घबरा जाती थी।
बीमार पड़े हुए पति को देखते हुए वह अक्सर रो पड़ती
” सुनिए जी, कहीं हमारा रिश्ता टूट तो नहीं जाएगा ?आप चले तो नहीं जाइएगा !”
सुधा की बात पर रमाकांत जी कभी हंसते और कभी इस बात पर नाराजगी जाहिर करते थे।
रमाकांत जी नाराज होकर कहते
” तुम्हें कुछ समझ भी नहीं आता है सठिया गई हो सुधा! मुझे हुआ क्या है पहले मलेरिया हो गया, अब टाइफाइड पकड़ लिया है। बुढ़ापा का देह है धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
“भगवान करे सब ठीक हो जाए।” अकेले रहने की बात सोचकर ही सुधा के हाथ पैर फूलने लगते थे।
संदीप और प्रदीप दोनों ने ही कह रखा था
“पापा, मां, इस बार हम लोग दीपावली में आएंगे तो आप दोनों को हमारे साथ चलना होगा। अब हम आप लोगों को अकेले नहीं छोड़ सकते।”
लेकिन रमाकांत जी का मन माने तब ना!
यहां उन घर के पास पार्क था और पार्क में बैठने वाले दसियों दोस्त जो उनके साथ ही रिटायर कर चुके थे।
यह सब बेटे बहू के राज में कहां मिलने वाला था!
पर फिलहाल तो उनकी खराब तबियत थी।
” आज फिर से शुगर बढ़ गया है.. सुनती हो भाग्यवान, डॉक्टर ने एक बार फिर से चेकअप करने के लिए बुलाया है।”
सुधा अपने पति को लेकर अस्पताल चली गई।
इसी शहर में रहते हुए रमाकांत जी यहीं से रिटायर किए थे।इसी कारण इस शहर के चप्पे चप्पे से अच्छा परिचय बना हुआ था।
अस्पताल में मेंबरशिप भी बना हुआ था जिसके कारण रमाकांत जी को कोई दिक्कत नहीं थी।
टाइफाइड काफी लंबा चल गया था। अब तक सब कुछ नॉर्मल था तो अब शुगर क्यों बढ़ रहा है ? डॉक्टर भी परेशान हों गए।
उन्होंने एक नए सिरे से कुछ टेस्टिंग लिख दिया कहा
“मि. शर्मा, आप ये सारे टेस्ट करा लीजिये। एक बार पता तो चले कि बात क्या है?”
टेस्ट के नाम से पहली बार रमाकांत जी पहली बार घबरा गए।
उन्होंने अपना डर छुपाते हुए डॉक्टर से कहा
” डॉक्टर साहब, आखिर बात क्या है?”
” सब कुछ तो ठीक चल रहा था। अब फिर से शुगर का लेवल हाई हो रहा है। ब्लड प्रेशर फ्लैक्चुएट कर रहा है तो एक बार फिर से सारे टेस्टिंग कर लेते हैं ।”
डॉक्टर की निराशाजनक बातें सुनकर सुधा रो पड़ी।
उसने कहा
“अगले ही हफ्ते दीपावली है। बच्चे अपने परिवार को लेकर आ रहे हैं।
हे भगवान! सब कुछ कुशल मंगल रखना। ना जाने क्या हो गया है?”
“अरे कुछ भी नहीं हुआ है। चलो मैं टेस्ट कर लेता हूं ।”रमाकांत जी सुधा को सांत्वना देते हुए कहा।
रमाकांत जी ने सारे टेस्ट करवाने के बाद घर आ गए ।
सुधा परेशान घूम रही थी तभी उनकी बड़ी बहू रीमा का फोन आया।
” मां, प्रणाम !पापा कैसे हैं?”
” देखो ना बेटी डॉक्टर ने फिर से टेस्टिंग के लिए लिख दिया। अब इनका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है उस पर ब्लड प्रेशर फ्लक्चुएट कर रहे हैं। ना जाने कौन सी आफत आई है?”सुधा घबराते हुए बोली।
” मां, आप परेशान मत होइए ।सब कुछ ठीक होगा। मैं छुट्टी लेकर आ जाऊं?”
” नहीं बेटी, दो हफ्ते ही तो हैं त्यौहार में। अगले हफ्ते तो तुम लोग आ ही रहे हो ना !बस ईश्वर की मर्जी जो चाहे।”
“सब ठीक होगा मां।आप चिंता मत कीजिए।”
रीमा के फोन रखते ही छोटी बहू माला ने फोन किया और सारी बात सुन कर कहा
“मां हम लोग एक हफ्ते पहले ही आ जाएंगे।फिर आपको और पापा को लेकर मुंबई चले जाएंगे और वहां जाकर अच्छे से इलाज करेंगे ।आप टेंशन मत लीजिए।”
“बिल्कुल बेटी, तुम लोग के रहते हुए मुझे कोई चिंता नहीं है।”
सुधा ने कहा।
भले ही दूर से ही सही पर बहुओं ने सुधा को हिम्मत दे दिया था।
अब वह पॉजिटिव फील कर रही थी।
अब पंद्रह दिन भी दीपावली को नहीं बचे थे।
घर में सफाई जरूरी था।
“बच्चे घर आएंगे तो क्या सोचेंगे पापा के साथ घर भी बीमार लग रहा है!”
उसने रंग रोगन वाले को फोन कर घर में पेंटिंग करने के लिए कह दिया और कामवाली को बोलकर घर की सफाई करवानी शुरू कर दी।
रिपोर्ट दो दिनों बाद आने वाली थी। सुधा ने अपने पति से कहा
“सुनिए जी,मैं जाकर रिपोर्ट ले आऊंगी आपके जाने की जरूरत नहीं है ।”
“ठीक है सुधा!, तुम जाकर रिपोर्ट ले आना।”
सुधा ने पूरे घर की सारी सफाई और रंग रोगन करने के बाद सब कुछ नए से लगाया।
नया सोफा कवर, पर्दे , चादर ,बेटे बहू के कमरे के चादर भी बदलवा दिए और नए पर्दे वहां भी लगा दिए।
बच्चों के दीपावली की थोड़े बहुत पटाखे और फुलझाड़ियां की खरीदारी भी कर लिया।
दो दिनों बाद जब रिपोर्ट आ गई तो दोनों डॉक्टर के पास पहुंचे।
डॉक्टर ने सारे रिपोर्ट देखने के बाद मुस्कुराते हुए कहा
” कंग्रॅजुलेशंस मिस्टर शर्मा! आपकी सारी रिपोर्ट ठीक हैं। आप तनाव अधिक ले लेते हैं उसी के कारण आपका शुगर बढ़ जाता है और ब्लड प्रेशर फ्लकचुएट कर जाता है।
बिल्कुल भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। सब कुछ नॉर्मल है।
आप ताकत की दवाइयां लीजिए।हेल्दी और सादा खाना खाइए आप बहुत जल्दी ठीक हो जाइएगा।”
डॉक्टर की बातें सुनकर रमाकांत जी और सुधा दोनों के चेहरे खुशी से खिल गए। वे लोग खुशी मन से मुस्कुराते हुए घर वापस आए।
सुधा ने जी जान लगाकर पूरे घर को नया बना दिया था।
साफसुथरा घर चमक रहा था।
“अब दीपावली धूमधाम से मनाएंगे। कल ही लिस्ट दुकानदार को भिजवा देती हूं।कुछ नमकीन और मीठे बनवा लूंगी।”सुधा ने कहा।
“सुधा,हैप्पी दीपावली!”रमाकांत जी मुस्कुराते हुए बोले।
“अरे… हैप्पी नहीं शुभदीपावली बोलिए जी!”सुधा हंस पड़ी।
“शुभदीपावली…शुभदीपावली!”रमाकांत जी भी हंसने लगे।
