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दूधो नहाओ, पूतो फलो-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Blessing Story: गरीबी के मारे एक बाम्हन और एक चमार परिवार आस-पास रहते थे। दोनों परिवारों में एक-एक बच्चा था। बच्चे ऊँच-नीच, जात-पाँत क्या जाने? उन दोनों में दोस्ती हो गई। दोनों धीरे-धीरे बढ़ते गए, गाँव-घर के लोगों को दोनों की दोस्ती फूटी आँखों न सुहाती। वे दोनों में फूट डालने के नित्य नए तरीके […]

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कौन श्रेष्ठ?-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Mythological Stories: किसी समय किसी राज्य में एक राजा था। दरबारियों ने उसके मन में यह बात बैठा दी कि योगी तो पाखंडी होते हैं। कोई काम-काज किए बिना खाते-पीते मौज मनाते हैं। कुछ दरबारी इस राय से सहमत नहीं थे। वे दबे स्वर में कहते सब अंगुलियाँ एकसमान नहीं होतीं, सब दिन भी एक […]

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अतिथि देव-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Ganesh Story: शंकर जी किसी काम से बाहर गए तो पार्वती जी ने उबटन लगाया और स्नान करने को तैयार हो गईं। स्नान करने के लिए जाते समय मन में विचार आया कि नहाते समय कोई अतिथि आ गया तो? द्वार पर किसे बैठाएँ जो अतिथि को शिव जी के आने तक रोके रखे। कोई […]

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भोग नहीं भाव-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Short Story in Hindi: बहुत पुरानी बात है। एक थे मुनि पुलस्त्य, बहुत ग्यानी-ध्यानी और विद्वान। वे लगातार देश-विदेश में घूम-घूमकर लोगों को धर्म-कर्म की शिक्षा देते और राजा-महाराजाओं को राह दिखाते थे। एक बार घूमते-फिरते हुए पुलस्त्य जी हस्तिनापुर के निकट से निकले तो उन्होंने सोचा भीष्म पितामह से मिलते चलें। भीष्म पितामह अपने […]

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जैसी करनी वैसी भरनी-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Hindi Moral Story: बहुत पुरानी बात है। सृष्टि में जीव-जंतुओं का निरंतर विस्तार होता जा रहा था। सृष्टि में जीव-जंतुओं की विभिन्न योनियों की संख्या बढ़ते-बढ़ते चौरासी लाख तक पहुँच गई। जीवों की जनसंख्या बढ़ने साथ-साथ उनके कर्म और कर्मों के परिणामों का सम्यक लेखा-जोखा रखकर उन्हें पुण्य-पाप कर्मानुसार पुरस्कार या दंड देना दिन-ब-दिन ब्रह्मा […]

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पीपर पात मुकुट बना-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Lok Kathayen: किसी समय सहरियाओं पर गोंड़ों ने हमला कर दिया। जमकर लड़ाई हुई। सहरिया संकट में पड़े तो भागकर एक बाद ‘बड़’ के झाड़ पर चढ़कर छिप गए और अपने प्राण बचाए। बाद में ‘बड़’ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाने के लिए उन्होंने अपना कुल नाम (गोत्र) ‘बरोदिया’ अपना लिया। एक बार एक […]

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संतोष से सिद्धि-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Devotee Story: किसी समय घने जंगल में सबर नाम का एक वनवासी रहता था। वह दिन-भर मेहनत कर फल-फूल-पत्ते आदि जुटाता और उससे अपना और अपने परिवार का पेट भर भगवान का नाम जपता। उसकी संतोषी वृत्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान नारायण धरती पर आए। जिस रास्ते से सबर जंगल में जाता और […]

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शंकर का शाप-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Shiv Shrap Story: सृष्टि के आरंभ में आदमी को खेती का ज्ञान देने के लिए शंकर जी ने एक हल बनाया और उसमें अपने वाहन नंदी को जोता। धरती पर घना जंगल था और जमीन पथरीली थी इसलिए एक आदमी का निर्माण कर उसका नाम सँवर रखा। सँवर को कुल्हाड़ी देकर शंकर जी ने उसे […]

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अपने में मस्त-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

God and Man Story: कायनात बनाने के लिए भगवान ने पहले धरती बनाई। फिर आकाश, पानी, हवा, आग पैदा की। तब पेड़-पौधे उगाए। फिर भगवान ने सोचा, इनका उपयोग और देख-रेख करनेवाला भी कोई होना चाहिए। तब भगवान ने धरती, आकाश, पानी, हवा और आग से एक-एक गुण लेकर मन लगाकर एक पुतले का निर्माण […]

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बुरे काम का बुरा नतीजा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Bhasmasur Story: राजा हिमाचल की मोंडी पारवती से भगवान शंकर की शादी हुई। एक दिन शंकर जी ध्यान मग्न थे। पारवती जी ने अकेलेपन से ऊबकर खीज निकलते हुए नहाने के पहले अपने बदन के मैल से एक पुतला बनाया और शंकर जी की धूनी के पास राख में रख दिया। शंकर जी जब समाधि […]

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