Posted inहिंदी कहानियाँ

झूठ की सजा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Hindi Katha: कोरकू जनजाति मध्यप्रदेश में सतपुडा पर्वत माला पर जंगलों में निवास करती है। आजकल मवासी छिंदवाड़ा, भैंसदेही और चिचोली बैतूल, होशंगाबाद, भिंड, खंडवा, सीहोर हरदा आदि में इनका निवास है। लिंगादेव (निंगदेव, बड़ादेव, महादेव, शंकर) और उनका परम भक्त रावण इनके लिए पूजनीय है। बन्दया, रूमा और मवासी उपजातियों में विभाजित समृद्ध कोरकुओं […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

परसा का फूल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Lok Kathayen: बहुत पुराने समय की बात है। जुगनीजुड़ा नाम का एक गाँव था। वहाँ पेंगुस, भतरा और मुरिया जनजाति के लोग हिल-मिलकर रहते थे। उनमें रोटी-बेटी का संबंध भी होता था। गाँव में भतरा जाति का चौतू नाम का माँझी था जो नदी से मछली पकड़कर खाता-बेचता था। चौतू का एक बेटा और एक […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

अमरबेल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Lok Katha: एक समय की बात है, कुछ आदिवासी लोग पहाड़ों पर रहने लगे थे। इस कारण उन्हें ‘पहाड़िया’ कहा जाने लगा था। पहाड़ों पर उगने वाले बाँस को पहाड़ियों ने सबसे पहले उपयोग में लाना सीखा। वे बाँस से तीर-कमान बनाकर पशु-पक्षी ही नहीं मछली आदि का भी शिकार कर लेते थे। बाँस से […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

कौआ हाँकनी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Crow Story: उड़ियान का राजा बहुत परेशान था। वह जो भी फसल लगवाता, उसके पकने पर कौए आकर उन्हें नष्ट कर देते। सोच-विचारकर उसने एक उपाय निकाला। राजा ने फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों के चारों ओर चार कौआ हाँकनी लगवा दीं। फसलों पर हमला करने वाले काऊ कौआ हाँकिनियों को रखवाला समझ कर […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

बाघा वशिष्ठ-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Lok Kathayen-कजलीवन में बाघा वशिष्ठ तपस्या कर रहे थे। ध्यान में डूबे होने के कारण उनके मूत्र की एक पूरी और एक आधी बूंद टपकती रही और उनको पता नहीं चला। तेरह साल तक मूत्र की बूंदें एक तूंबी में टपकती रही। तपस्या पूरी होने पर बाघा वशिष्ठ ने उस तूंबी में मूत्र त्याग किया […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

भीमादेव-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश

भीमादेव-बहुत समय पहले की बात है। प्रलय के बाद धरती पानी में डूबी हुई थी। जैसे तूम्बा (सूखी हुई गोलाकार लौकी) पानी में तैरता रहता है, वैसे ही धरती भी पाने में तैर-उतरा रही थी। भगवान ने भीमादेव को भेजा कि धरती पर खेती करते हुए जीव-जंतुओं का विकास करे। भीमदेव ने पृथ्वी को पानी […]

Gift this article