Hindi Poem
Hindi Poem

Hindi Poem: इक कोने में है पड़ा हुआ
सहमा सहमा डरा हुआ
शरारत करना भूल गया
आंखों पे चश्मा चढ़ा हुआ।।
हालत इसकी खस्ता है
खुद से भारी बस्ता है
घुटकर दम तोड़ रहा अब
बचपन कितना सस्ता है।।
वो खेलकूद से दूर हुआ
न चाहते भी मजबूर हुआ
बड़ा बनाने के चक्कर मे
बचपन चकनाचूर हुआ ।।
चला ट्यूशन स्कूल से आया
होमवर्क सारा निपटाया
हैं आंखे नींद से भरी हुईं
फिर कच्ची नींद जगाया ।।
गले लटकाकर टाई मोटी
हाथों में पकड़ाकर रोटी
बस में बिठा दिया रोते
सुबह स्कूल में जाकर होती।।
लाड़ प्यार से बिहीन किया
जुर्म बड़ा ही संगीन किया
कौन लौटाए पूछे सबको
किसने बचपन मेरा छीन लिया।।

सपना झा गृहलक्ष्मी पत्रिका में बतौर सोशल मीडिया मैनेजर और सीनियर सब एडिटर के रूप में साल 2021 से कार्यरत हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता...