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बचपन-गृहलक्ष्मी की क​विता

Hindi Poem: इक कोने में है पड़ा हुआसहमा सहमा डरा हुआशरारत करना भूल गयाआंखों पे चश्मा चढ़ा हुआ।।हालत इसकी खस्ता हैखुद से भारी बस्ता हैघुटकर दम तोड़ रहा अबबचपन कितना सस्ता है।।वो खेलकूद से दूर हुआन चाहते भी मजबूर हुआबड़ा बनाने के चक्कर मेबचपन चकनाचूर हुआ ।।चला ट्यूशन स्कूल से आयाहोमवर्क सारा निपटायाहैं आंखे नींद […]

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