Overview: टीनएज में रिजेक्शन बन सकता है डिप्रेशन का कारण, ऐसे करें बच्चे की मदद
टीनेज में रिजेक्शन और निराशा एक आम समस्या है जो बच्चे में डिप्रेशन का कारण बन सकती है। इससे निपटने में पेरेंट्स उनकी मदद कर सकते हैं।
Rejection Cause of Depression: रिजेक्शन और डिसअपॉइनमेंट दो ऐसी भावनाएं हैं, जिसे सहना हर किसी के लिए मुश्किल होता है। जब हम अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाते, तो अक्सर खुद को दोषी मानने लगते हैं। टीनेज में ये भावनाएं और भी गहरी हो सकती हैं, जो डिप्रेशन का कारण बन सकती हैं। टीनेज में बच्चों को किसी भी व्यक्ति से प्यार और लगाव हो सकता है लेकिन वही समान भावना अन्य व्यक्ति महसूस करे ये जरूरी नहीं है। यही रिजेक्शन बच्चे के दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव डालता है और वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। ऐसे में पेरेंट्स का फर्ज है कि वह बच्चे की मदद करें और उसे सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे टिप्स के बारे में जो बच्चे को डिप्रेशन से बाहर निकालने में मदद कर सकती हैं।
भावनाओं को समझें और समर्थन दें

जब बच्चा रिजेक्शन का सामना करता है तो वह अंदर से टूट जाता है और खुद में ही गलतियां तलाशने लगता है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स उसकी भावनाओं को समझ़ें और उसकी बात का समर्थन करें। रिजेक्शन किसी भी चीज का हो सकता है जैसे- गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का, कॉलेज में एडमिशन न मिलना या मनचाहा सब्जेक्ट न मिलना। बच्चों को समझाएं कि जो होता है वह उनके भविष्य के लिए बेहतर हो सकता है। इसलिए चीजों को भूलकर आगे बढ़ें।
असफलता को सुरक्षित बनाएं
टीनेजर्स अक्सर असफलता से डरते हैं। लेकिन असफलता एक बेहतरीन शिक्षक है, भले ही ये थोड़ी असामान्य है। यह हमें अपने लक्ष्यों का मूल्यांकन करने और नई रणनीति बनाने में मदद करती है। माता-पिता बच्चों को यह समझा सकते हैं कि असफलता जीवन का हिस्सा है। उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि असफल होने से उनकी कीमत कम नहीं होती। इससे वे भविष्य में जोखिम लेने और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होंगे।
फिर करें कोशिश
“असफल होने पर फिर कोशिश करें” यह कोई नया नारा नहीं है, लेकिन असफलता के बाद प्रेरणा लेने में मदद कर सकता है। यदि हम असफलता को प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं, तो बच्चों को दोबारा, तिबारा या चौथी बार कोशिश करने का हौसला मिलेगा। पेरेंट्स बच्चों को यह सिखा सकते हैं कि हर कोशिश उन्हें अपने लक्ष्य के करीब ले जाती है। बच्चे की धैर्य और दृढ़ता की इस भावना को पेरेंट्स प्रोत्साहित करें।
अपनी कीमत पहचानें

माता-पिता अक्सर चाहते हैं कि उनके बच्चे सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में जाएं, अच्छे ग्रेड लाएं और हर क्षेत्र में सफलता हासिल करें। लेकिन यह दबाव बच्चों को यह संदेश दे सकता है कि उनकी कीमत उनकी उपलब्धियों पर निर्भर करती है। जब आपका बच्चा कोई उपलब्धि हासिल करे, जैसे अच्छे ग्रेड, तो उनकी मेहनत और लगन की तारीफ करें, न कि केवल परिणाम की। इससे बच्चे समझेंगे कि उनकी मेहनत उनकी पहचान है, न कि केवल परिणाम।
बच्चे को करने दें डील
हम सभी अपने बच्चों को कठिनाइयों से बचाना चाहते हैं, लेकिन अगर हम उन्हें हर बार बचा लेंगे, तो वे अपनी सेल्फ-इफिकेसी विकसित नहीं कर पाएंगे। जब हम उनकी समस्याओं को हल करने या उनके लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश करते हैं, तो बच्चा खुद को कमतर महसूस करता है। उसे लगता है कि वह सिचुएशन को डील नहीं कर पाएगा। ऐसा करने से बेहतर है कि आप उनके साथ मिलकर समस्याओं का समाधान करें और उन्हें नेतृत्व करने दें।
