Teaching kids to handle rejection
Teaching kids to handle rejection

Rejection Handle for Kids: आपका बच्चा किसी भी क्षेत्र में हो जीवन में एक न एक बार ऐसा समय जरूर आता है, जब उसे ‘ना’ सुनना पड़ता है। यह ‘ना’ उसके पढ़ाई या खेल में हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है यह ‘ना’ उसकी पहली पसंद की तरफ से हो। क्षेत्र कोई भी हो ‘ना’ सुनना बहुत तकलीफदेह होता है। खासकर जब, जब बच्चा पहली बार किसी रिजेक्शन का सामना कर रहा हो। कई बार पहली बार का रिजेक्शन बच्चों को भावनात्मक रूप से बेहद कमजोर बना देता है। इस तरह की स्थिति में माता-पिता किस तरह अपने बच्चों को संभाले इसकी बात आज इस लेख में करेंगे।

जब बच्चा किसी भी प्रकार के रिजेक्शन से गुजर रहा होता है तो वह बहुत दुखी, निराशा, गुस्से में होता है। वह खुद को भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर महसूस करता है। इस स्थिति में आप बच्चे से यह मत कहें की छोटी बात है, इसके लिए रोना क्यों, बल्कि पेरेंट्स अपने बच्चों से कहें,

मैं समझ सकता हूं, तुम्हें इस रिजेक्शन से तकलीफ हो रही है। तुम रोना चाहते हो, दुखी महसूस कर रहे हो, मैं तुम्हारी तकलीफ समझ सकता हूं। इस तरह के शब्दों से बच्चों को लगता है कि आप उसकी भावनाओं को उसके तकलीफ को समझ पा रहे हैं।

Teaching kids to handle rejection
Teaching kids to handle rejection

रिजेक्शन का यह तकलीफ भरा समय आपके और आपके बच्चे के बीच दोस्ती बनाने का समय बन सकता है। आप उसे अपने रिजेक्शन के बारे में बताएं उसे सिर्फ रिजेक्शन के बारे में नहीं, बल्कि क्यों आपको रिजेक्शन मिला और कैसे आपने उसका सामना किया इसके बारे में भी बताएं।

जब आप अपने रिजेक्शन के कारण को स्वीकार करते हैं, तो इससे आपका बच्चा आपसे सीख कर अपने असफलता के कारण को समझने की कोशिश करता है।

जब आप बताते हैं कि किस तरह आपने रिजेक्शन का सामना किया तो आपका बच्चा आपसे प्रेरित होकर फिर से प्रयास करता है।

अपने बच्चों को बताएं कोई भी रिजेक्शन किसी कार्य के समाप्त होने का सूचक नहीं है। बल्कि वह एक मौका है, पहली बार की कमियों को सुधार कर दोबारा कार्य करने का।

आप बच्चे से फिर से प्रयास करने की बात कहें। उससे पूछें क्या और बेहतर हो सकता है, अगर हां तो रुको नहीं फिर से ट्राई करो। जीवन में असफलता और रिजेक्शन दोनों ही मिलते हैं और हमें दोनों को स्वीकारना चाहिए

जब आप अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं तो रिजेक्शन उसके लिए और तकलीफदेह हो सकता है। वह खुद को अकेला महसूस करता है।

बच्चों से कभी ये ना कहे कि तुम्हारे दोस्त का हो गया तुम्हारा नहीं हुआ, वह तुमसे कम मेहनत के बाद भी सफल हुआ और तुम नहीं, अपने दोस्त से कुछ सीखो। इस तरह के वाक्य आपके बच्चे के मनोबल को तोड़ने का काम करते हैं।

विशेष ध्यान दें: रिजेक्शन जीवन का हिस्सा है, जिसका सामना सभी को करना पड़ता है। इससे टूटना या फिर रिजेक्शन के बाद प्रयास करना छोड़ देना समाधान नहीं, बल्कि रिजेक्शन को स्वीकार कर फिर से कोशिश करना जीवन में एक नया मौका है।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...