धार्मिक मान्यता के अनुसार समान गोत्र या कुल में शादी करना प्रतिबंधित है। मान्यता के अनुसार एक ही गोत्र का होने के कारण स्त्री-पुरुष भाई बहन कहलाते हैं क्योंकि उनके पूर्वज एक ही हैं। इसलिए एक ही गोत्र में शादियां नहीं की जाती हैं।
क्या होता है गोत्र
गोत्र शब्द का अर्थ होता है वंश/कुल (lineage)। गोत्र प्रणाली का मुख्या उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम व्यक्ति से जोड़ना है उदहारण के लिए यदि को व्यक्ति कहे की उसका गोत्र भरद्वाज है तो इसका अभिप्राय यह है की उसकी पीडी वैदिक ऋषि भरद्वाज से प्रारंभ होती है या ऐसा समझ लीजिये की वह व्यक्ति ऋषि भरद्वाज की पीढ़ी में जन्मा है।

क्या कहता है विज्ञान
यह बात थोड़ी अजीब भी लगती हैं कि जिन स्त्री, पुरुष ने कभी एक दूसरे को देखा तक नहीं तथा अलग-अलग जगहों पर तथा अलग-अलग माहौल में पले बढ़े, फिर वे भाई, बहन कैसे बन गये? इसका एक ठोस वैज्ञानिक तर्क है कि समान गोत्र का होने के कारण चाहे वे भाई बहन हों या ना हों लेकिन उनके गुणसूत्र (chromosome) समान होते हैं। इसलिए अगर एक गोत्र के स्त्री, पुरुषों की शादी होती है तो उनके बच्चे अनुवांशिक (Genetic) बिमारियों के साथ पैदा होते हैं। ऐसे बच्चों में अनुवांशिक दोष जैसे मानसिक कमजोरी, अपंगता आदि गंभीर रोग जन्मजात ही पाए जाते हैं। ऐसे बच्चों की विचारधारा, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता है। और उनमें रचनात्मकता का अभाव होता है।
अन्य गोत्र में शादी करने के ये हैं फायदे
इसलिए अलग-अलग गोत्र में शादी करने से स्त्री पुरुष के गुणसूत्र जींस आपस में नहीं मिल पाते हैं जिससे उनके बच्चों में अनुवांशिक बिमारियों का खतरा नही होता है। कहते हैं स्त्री-पुरुष जितनी अधिक दूरी पर विवाह करते हैं उनकी संतान उतनी ही अधिक प्रतिभाशाली और गुणी होती है। उनमें आनुवंशिक रोग होने की संभावनाएं कम से कम होती हैं। उनके गुणसूत्र बहुत मजबूत होते हैं और वे जीवन-संघर्ष में सपरिस्थितियों का दृढ़ता के साथ मुकाबला करते हैं।
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