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benefits of my prayers for my husband

पति और पत्नी एक ही गाड़ी के दो पहिये कहे जाते हैं| हमसफर यानि एक ही सफ़र के साथी| इनका पूरा जीवन जहां एक साथ बीतता है, वहीं पूजा पाठ में भी क्या इनको एक दूसरे के द्वारा की गयी पूजा का पूरा फल मिलता है| सरल शब्दोँ में कहे तो अगर पत्नी अकेले पूजा करती है तो क्या उस पूजा का फल उसके साथ उसके पति को भी बिना पूजा कियें ही मिल सकता है , और इस तरह से ही अगर पति अकेले पूजा करता है तो क्या उसकी पत्नी को भी बिना पूजा किये ही पूजा का फल मिल जायेगा| ये एक बड़ा ही विचित्र विषय है और इस बारे में हमारे वेद, पुराण, उपनिषद् और हमारे धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायणं और महाभारत में कुछ अलग सा उत्तर दिया गया है| पर अचरज इस बात का होता हैं कि जब दो अजनबी इंसान विवाह होते ही पति और पत्नी बन जाते है, और इस रिश्ते में बंधते ही दोनोँ सुख और दुःख के साथी भी बन जाते हैं| जब सब चीजें दोनोँ की एक हो जाती हैं तो फिर पूजा पाठ को अगर कोई अकेला करता है तो फिर उसका फल दूसरे को क्यों नहीँ मिलता,इस बात का अर्थ हिन्दू दर्शन कुछ इस तरह से देता है, की हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने धार्मिक ग्रंथो और गहन शोध के बाद यही निष्कर्ष निकाला है की जब भी कोई पुरुष कुछ भी पूजा पाठ या धार्मिक कार्य अपनी पत्नी को बिना साथ लिए अकेले भी करेगा तब उसके धार्मिक कार्यो को अकेले करने के बाद भी उसकी पत्नी को उन धार्मिक कार्यो का उतना ही पुण्य व लाभ फल प्राप्त होगा जितना की उसके पति को मिलेगा गर्गसंहिता व् शिव पुराण में बaताया गया है की पति चाहे या ना चाहे वो अपनी पत्नी को उसको मिलने वाले पुण्य और लाभ को लेने से रोक नहीं सकता है,ये एक सनातन नियम है,परन्तु हिन्दू धर्म ये भी कहता है की अगर कोई नारी अकेले ही कोई धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेती हैं या उसको करती है तो उसको ही उसके द्वारा की गयी पूजा पाठ का फल मिलेगा उसके पति को नही, जब तक नारी खुद न चाहे तब तक उसका पति चाहते हुए भी उसकी पूजा का पुण्य नहीं ले सकता| हमारे शास्त्रों में इसका भी विधान बताया गया है की अगर कोई नारी अपनी पूजा के फल को अपने पति को देना चाहे तो वो इसके लिए संकल्प करे|

संकल्प की विधि इस तरह से हैं – नारी जो भी धार्मिक अनुष्ठान कर रही हैं उससे पहले अपने सीधे हाथ में थोड़ा सा जल ले उसमे थोड़े से साबुत चावल ले एक साबुत सुपाड़ी ले और कुछ दक्षिणा यानि कुछ पैसे रखे उसके बाद जिस भी भगवान की पूजा, व्रत, अनुष्ठान, दान आदि कर रही है उनका नाम ले और बोले कि मैं [अपना नाम, गोत्र, दिन, महिना, साल] ये पूजा कर रही हूँ इसका जो भी पुण्य, लाभ हैं वो मेरे साथ मेरे पति [उनका नाम और गोत्र बोले] उनको भी बराबर मात्रा में मिले ऐसा संकल्प करने से नारी के पूजा का फल उस नारी के पति को भी प्राप्त होगा अन्यथा नहीं |

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