अब आपकी बारी-गृहलक्ष्मी की कहानियां: Father and Son Story
Ab Aapki Baari

Father and Son Story: महेंद्र चाचा के अंतिम संस्कार की सारी तैयारियां हो चुकी थी । बस इंतजार था तो उनके बड़े बेटे के आने का। सुबह के 8:00 बजे महेंद्र चाचा ने अंतिम सांस ली अपनी। जिंदगी में उन्होंने बहुत ही परोपकार किया लेकिन आज पता नहीं क्यों चिता को अग्नि प्रदान करने वाला बेटा रमन अभी तक आया नहीं । हमारे शास्त्र, पुराण, हमारे समाज पंडितों के अनुसार मुखाग्नि बड़ी संतान ही देते हैं।उनकी अपनी बड़ी संतान को आने में इतनी देर क्यों ????????

अब तो सभी काना-फूशी करने लगे। क्योंकि सभी समाज के लोग चाहते थे। स समय महेंद्र चाचा का अंतिम संस्कार कर दिया जाए । सुमन उनका छोटा पुत्र अपने बड़े भाई का इंतजार करने के लिए सबको बार-बार कह रहा था।सुमन ,उसकी पत्नी दोनों का रो रो के बुरा हाल था ।  महेंद्र चाचा की पत्नी सावित्री तो बार-बार बेहोश हो रही थी, जीवन साथी के बिछड़ने का गम हर उम्र में होता है। लेकिन बुढ़ापा में एक दूसरे के साथ की ज्यादा जरूरत होती है। एक के बिना दूजा हमेशा अधूरा महसूस करता है। ऐसा नहीं था कि महेंद्र चाचा की उम्र कम थी ।उनकी उम्र 70 के आसपास हो रही थी। लेकिन फिर भी अपनों को कोई खोना नहीं चाहता है। बहुत दिनों से बीमार चल रहे थे महेंद्र चाचा ।इसलिए जो भी उनके मरने की खबर सुन रहे थे। सभी कह रहे थे कि सुमन ने बहुत सेवा किया ईश्वर ने इनका उद्धार कर दिया अपने पास बुलाकर………….।

सब समय का चक्र है । जब शरीर साथ नहीं देता तो कितना भी परोपकार करने वाले व्यक्ति के लिए लोग यही कामना करते हैं कि ,उन्हें कोई शारीरिक कष्ट ना हो। उससे बेहतर की ईश्वर उन्हें अपने पास बुला लें। सभी आपस में यही सब बातें कर रहे थे ।तभी पंडित जी और समाज के कुछ लोग कहने लगे, रात हो जाएगी। इतनी देर पार्थिव शरीर को रखना ठीक नहीं…. है । सुमन एक बार अपने बड़े भाई से बात करने की जिद करता है। फोन लगाते हुए अपने भाई रमन से जब बात करता है। तो रमन कहते हैं कि कल सुबह मैं आता हूं तुम ही मुखाग्नि दे दो। फोन स्पीकर पर था।सभी लोगों को उनकी बातें सुनकर आश्चर्य लग रही थी । महेंद्र चाचा से उम्र में थोड़े बड़े उनके भाई लक्ष्मी चाचा को हृदय आघात लगा रहा था। उन्होंने कलेजा पीटते हुए कहा कि हे राम कैसा समय हो गया। जिस बड़े बेटे के लिए महेंद्र ने इतना किया। कैसे कैसे कर उसे पढ़ाया लिखाया ,उसकी नौकरी लगवाया । इसके अलावा छोटे बेटे से कहीं अधिक प्यार दिया बड़ी संतान होने की वजह से……….।

लक्ष्मी चाचा की आंखें आंसू से डब डवा  गई  । क्या रमन अपना फर्ज भी अदा नहीं करेगा।  सेवा और महेंद्र की जरूरतों को सुमन और उसकी पत्नी ने पूरा  किया। और अब उसकी अंतिम इच्छा रमन पूरा नहीं करेगा। यही सोच रहे थे कि…. एक गाड़ी आकर रुकी उसमें रमन और रमन का परिवार आया हुआ था। रमन जोर जोर से रोने लगा बाबूजी मैं आपके लिए कुछ भी नहीं कर पाया । बाबूजी मुझे माफ कर दीजिएगा। सुमन अपने बड़े भाई को कहता है कि… भैया इतना दिन जो मेरे से बन पाया मैंने किया । हमारे समाज के हिसाब से बड़ी संतान होने का जो फर्ज है। मुखअग्नि देकर उनकी अंतिम इच्छा को पूरा कर अपना फर्ज अदा कीजिए क्योंकि ???? अब आपकी बारी है…………….। यह हक आपसे कोई भी नहीं ले सकता।

अपने छोटे भाई सुमन को गले लगाते हुए। मुझे तुम भी माफ कर दो, मैंने कोई खोज खबर नहीं लिया आज तक। ना कोई बड़े भाई होने का फर्ज अदा किया। दोनों भाई एक दूसरे को गले लगाते हुए रोते हैं। कोई बात नहीं भैया, कोई बात नहीं आप मेरे बड़े हैं और बड़े ही रहेंगे। सुबह का भूला शाम को लौट आए तो उसे भूला नहीं कहा जाता। दोनों भाई के इस प्यार को देखकर जो अभी थोड़ी देर पहले काना फुशी कर रहे थे ।वह भी हैरान थे सुमन की समझदारी देखकर। चलो चलो लेट मत करो अब तो रमन भी आ गया। सारी तैयारी तो हुई ही थी । रमन ने मुखाग्नि देकर अपनी बड़ी संतान होने का फर्ज अदा किया।सब ने मिलकर महेंद्र चाचा का अंतिम संस्कार कर दिया……………।

जब अस्थियां विसर्जित कर रहे थे दोनों भाई। पिता की इन अस्थियों के विसर्जन के साथ साथ दोनों भाई ने अपने मन के मैल को भी विसर्जित कर दिया । दोनों भाई सामंजस के साथ जिंदगी जीने के लिए तैयार थे। यह देख कर उनकी मां तो खुश हो ही रही थी । साथ ही समाज के सभी लोग हक्का-बक्का रह गए ..इस प्रेम से भरे राम भरत के मिलाप को देखकर……….।

तभी अचानक जोरों से बारिश होने लगी। जैसे यह बारिश ना होकर उनके  पिता महेंद्र बाबू की खुशी के आंसू हो।अपने दोनों पुत्र को इस तरह से जीते जी तो नहीं देख पाए ।लेकिन मृत्युप्रांत प्यार देखकर सच में लग रहा है। उनकी आत्मा बंधन मुक्त हो गई खुशी-खुशी।

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