Short Story: श्याम के पापा ने आवाज लगाई । आ रही हूं दोनों साथ में खाना खाते हैं और घर को देखते हुए। कितने ही प्यार से हम लोगों ने यह घर बनाया। जब हमारे बच्चे बड़े होंगे । सबका शादी ब्याह होगा, पूरा परिवार भरा पूरा होगा। हमारे दोनों बच्चों की शादी भी हुई, […]
Author Archives: डा.कुमारी रिचा
मिथिला की धड़कन दरभंगा……
Hindi Story: अपने तो अपने होते हैं चाहे वो अपना घर हो, घर के सदस्य हो, या मेरा अपना समाज हो ,या अपना शहर। इससे हमारा एक खास जुड़ाव होता है। आइए आपको मिलवाते हैं हम अपने शहर मिथिला की धड़कन दरभंगा से…….।अपनी प्राचीन संस्कृति और बौद्धिक परंपरा के लिए यह शहर विख्यात रहा है […]
फ्लावर सी मित्रता-गृहलक्ष्मी की कहानियां
झरिया अपनी मां को आवाज लगाते हुए मां ओ मां जल्दी से मेरे बाल बना दो,स्कूल के लिए लेट हो रही हूं। आ रही हूं थोड़ा सा छुटकी को खाना देती हूं । पुनः आवाज लगाते हुए जल्दी आओ मां । लो आ गई झरिया का बाल बनाते हुए, अभी ही तो अपनी बात कहने […]
अनु से अर्धांगिनी—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi Kahani: खुद अपनी आंखों पर आज विश्वास नहीं हो रहा था| अमित को कि यह मेरी अनु यानी अनुराधा का नाम यूपीएससी के टॉप रैंक में है। किसी की आवाज अमित के कानों तक टकराई अरे यह वही लड़की है जिसने एक दुर्घटना में अपने एक पैर गवा दिए थे। और इसी वजह से […]
ऐसी तबाही-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi Hindi Story: हरदयाल चौधरी नींद से अचानक घबराकर उठाते हुए, पसीना-पसीना से हो जाते हैं। बगल में लेटी पत्नी माया चौंकते हुए अजी क्या हुआ ????अचानक इतनी रात गए उठकर बैठ क्यों गए। सर पे हाथ रखते हुए तबीयत तो ठीक है आपकी। पानी लाऊं क्या अरे कुछ नहीं सो जाओ नहीं नहीं बताइए […]
फैसला नई जिंदगी का-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Decision Story: अपने कमरे से अचानक सासु मां ने आवाज लगाई, शगुन ओ शगुन जल्दी आना!मैं अचानक तेज आवाज सुनकर मांजी के कमरे में गई!मांजी ने कहा रमा बुआ की लड़की की शादी में जाना है कल सुबह!सामान की पैकिंग कर लेना और सोना को भी लेते चलना! जब से रौनक गुजर गया है तब से […]
अब अफसोस नहीं-गृहलक्ष्मी की कहानियां
बोर्ड के परिणाम आने की खबर सुनते ही पल्लवी और उसके माता-पिता काफी उत्सुक थे, परिणाम उम्मीद के बिल्कुल विपरीत देख दोनों पति-पत्नी हताश हो गए। पल्लवी के पिता अजीत सिंह लगे तेज़ आवाज़ में पल्लवी पर झल्लाने, आजकल के बच्चों में बर्दाश्त करने की क्षमता ही कहां रहती है इसकी सबसे बड़ी वजह मन […]
शकुंतला…-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Vat Savitri Story: वह देखो कितनी सज धज के आ रही है वट सावित्री पूजा के लिए कैसा जमाना आ गया???? वट वृक्ष के नीचे बैठी कुछ बुजुर्ग महिलाएं ताना-बाना बुन रही थी एक दूसरी चाची ने उधर से जवाब दिया हां हां शर्म तो धो के पी गई पति का पता नहीं और व्रत […]
मजबूरी—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Majburi Story: छोटी बहू ने आवाज लगाते हुए ,रमिया जरा इधर सुनना तो, मेरे कमरे की सफाई भी कर देना। जी मालकिन कहते हुए रमिया अपने कामों में लग जाती है। सुनैना को अपनी बहू का रमिया से बात करने का यह तरीका बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा….।उन्होंने नजदीक जाकर कहा की बेटी बुजुर्ग है […]
सोच का फर्क………दोष किसका???
Sock ka Fark: हाय दईया घोर कलयुग अरे क्या हुआ छुटकी काकी यह पूछो का नहीं हुआ???? बस इस बुढ़ापे में यही दिन देखना बाकी रह गया था सो देख लिया। कौशल्या के बरका बेटबा इतना सुंदर बहुरिया और बेटी के रहते दूसरा ब्याह कर लिया। यह तो बहुत गलत हुआ छुटकी काकी, माही ने […]
