भोलू का सपना
Bholu ka Sapna-Balman ki Kahaniyan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

भोलू को कार्टून देखना बहुत अच्छा लगता है। वह मम्मी-पापा से जिद करते हुए कहने लगा-“मुझे कार्टून के साथ रहना है। उसी के साथ पढ़ना-लिखना और खेलना है, क्योंकि जब से कोरोना आया है, उसके डर से स्कूल भी बंद हो गया है।” भोलू घर से बाहर निकल भी नहीं सकता था। इसलिए वह चाहता था कि कार्टून के साथ ही रहे और मस्ती भी करे।

तो मम्मी ने उसे समझाया-“बेटा, कार्टून तो काल्पनिक होता है। इन्हें सिर्फ मनोरंजन के लिए देखा जाता है।” परंतु भोलू यह मानने के लिए तैयार ही नहीं था।

अपनी जिद के साथ रोते-रोते भोलू सो गया और सपने में खो गया। उसने सपने में देखा कि वह सबसे छिपकर बगीचे में आ गया है और अपने पसंदीदा आम के पेड़, जो उसके दादा जी ने लगाया था, के पास आकर खड़ा हो गया है। दादा जी ने यह पेड़ लगाते हुए कहा भी था कि जब मैं नहीं रहूँगा, तब भी यह पेड़ छाँव और फल देगा। भोलू के दादा जी का दो साल पहले देहांत हो गया था।

दादा जी को खोजने के लिए वह बराबर उनके लगाए हुए आम के पेड़ के निकट चला जाता था। वह पेड़ से बातें भी करता था। परंतु उस दिन उसने देखा कि पेड़ के निकट एक पत्थर चमक रहा है। जब उसने पत्थर को हटाया तो उसके आश्चर्य की सीमा न रही… वहाँ सीढ़ियों वाला रास्ता बना हुआ था।

भोलू सीढ़ी से नीचे उतरने लगा। नीचे जाकर देखा, तो वह कार्टून के देश में पहुँच गया था। सारे कार्टून भोलू के स्वागत में फूलों की माला लिए खड़े थे। भोलू बहुत खुश हुआ और उछलते हुए उसने कार्टून चित्रों से कहा- “आप सभी से मिलकर बहुत खुशी मिली। मेरी मम्मी तो कहती थी कि कार्टून काल्पनिक होता है। मगर आपके देश में पहुँचकर सच्ची बात पता चली। आपको भी मैं अपने घर ले जाकर अपने मम्मी-पापा से मिलवाऊंगा। आप उन्हें सच्ची बात बतला देना कि कार्टून सचमुच में होता है, काल्पनिक नहीं होता।”

“हाँ भोलू! मैं तुम्हारे घर चलूँगा। वहाँ जाकर सच्ची बात बताऊंगा। पहले तुम यहाँ अच्छी तरह घूम तो लो।” एक मोबाइल उसे देते हुए एक कार्टून ने भोलू से कहा- “यदि कोई परेशानी हो, तो मुझे कॉल करना।”

भोलू कार्टूनों के देश में मजे से घूमने लगा। वहाँ उसने मिकी माऊस, डोनाल्ड डक, विनी द पू, योगी बीयर, बैटमैन, सुपरमैन, मोगली आदि ढेर सारे कार्टूनों को खेलते-मस्ती करते देखा। वह भी उनके साथ खूब खेला। खूब मस्ती की। उसे खूब मजा आया। घूमते-घूमते जब वह थक गया और जोरों की भूख लगी, तब उसे अपनी मम्मी की याद आयी। उसने मम्मी को फोन लगाया। मगर मोबाइल से घर पर किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा था, ना ही कार्टून के दोस्तों से। वह बहुत परेशान हो गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा- “मुझे अपने घर जाना है। मम्मी-पापा से मिलना है। खाना खाना है। मुझे भूख लगी है।” और वह जोर से “मम्मी! मम्मी!” चिल्लाने लगा।

मम्मी ने पूछा-“क्या हुआ भोलू?”

भोलू ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा- “मम्मी, मैं तो कार्टूनों के देश में था। यहाँ कैसे आ गया?” और उसने सारी कहानी मम्मी को सुनाई। मम्मी ने भोलू का सिर अपनी गोद में ले लिया और प्यार से उसे सहलाते हुए कहा- “बेटा, वह सब एक सपना था।”

भोलू ने भी सहमति में सिर हिलाया और कहा- “मम्मी, अब मैं आप और पापा की सारी बात मानूँगा, बिलकुल भी जिद नहीं करूँगा। आपने ठीक कहा था कि सपने की तरह कार्टून भी काल्पनिक होते हैं।”

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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