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टिनी, मिनी और तेंदुआ-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात: Leopard Story
Tini, Mini or Leopard

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Leopard Story: टिनी और मिनी दोनों बहनें थीं। टिनी, मिनी से एक साल बड़ी थी। टिनी सातवीं कक्षा में और मिनी छठी कक्षा में पढ़ती थी। दोनों बहनें बहुत होशियार थी। दोनों स्कूल की सभी प्रवृत्तियों में हिस्सा लेती थी। फिर चाहे वो खेल-कूद, नाटक, संगीत, नृत्य हो या निबंध लेखन। हालांकि सभी में उनका नंबर नहीं आता था। इससे मिनी कभी-कभी उदास हो जाती थी, तब टिनी उसे कहती थी।

“हमारा नंबर नहीं आया तो क्या हुआ? हमने हिस्सा लिया, यही अच्छी बात है।

“सही में मुझे तो नाटक करने का बड़ा मजा आया।” दोनों बहनें एक दूसरे की अच्छी दोस्त भी थी।

राखी के त्योहार में उनकी स्कूल में तीन दिनों की छुट्टी थी।

टिनी और मिनी ने अपने पापा को बाहर घूमने जाने के लिए कहा। पहले तो वे तैयार नहीं हुए लेकिन आखिरकार वो मान गए। उनके पापा ने डांग घूमने जाने का प्रोग्राम बनाया। टिनी-मिनी के पापा के पास एक पुरानी कार थी। अगली सुबह, चारों लोग कार से डांग की ओर निकल पड़े। टिनी-मिनी को कार में घूमने का मजा आ रहा था। रास्ता लंबा था। दोनों बहनों ने गाने गाते हुए, मम्मी के साथ ताश खेलते हुए और पिताजी के साथ गपशप करते हुए समय बिताया। रास्ते में उनके डेडी ने भरूच में एक होटल के पास कार रोक ली। सभी ने होटल में जाकर भरपेट भोजन किया।

कुछ समय आराम करके वो लोग आगे बढ़े। वांसदा को पार करते ही जंगल की हरियाली शुरू हो गई। लंबे वलसाड़ी सागौन, सादड खाखरा और बाँस के पेड़, जैसे उनके साथ दौड़ते दिखाई दे रहे थे। बारिश का मौसम था। घने बादल घिरे हुए थे। थोड़ी दूर गए ही थे कि बारिश टूट पड़ी। टिनी-मिनी कार की खिड़की से हाथ निकालकर बारिश की बूंदे हथेली पर झेलने लगी।

अब वे आहवा पहुँचे तो शाम हो चुकी थी। बारिश भी थम गई थी। वे आहवा के गेस्ट हाउस में ठहरे थे। अगली सुबह, वे लोग शबरी मंदिर और उसके पास आए, झरने को देखने गए। टिनी-मिनी को तो झरना देखते ही उसमें स्नान करने का मन हो गया।

मिनी ने कहा “मम्मी, हमें झरने में स्नान करना है।”

मम्मी ने कहा, “नहीं, सुबह तो तुम दोनों ने स्नान किया था।” चेकडेम की दीवार से छोटे-छोटे गाँव के बच्चे पानी में कूद रहे थे। यह देखकर टिनी बोली, “पापा ये बच्चे कैसे ऊपर से पानी में कूदते हैं। मुझे भी कूदना है।”

पापा ने दोनों को समझाया, “इन लोगों को तो पानी में तैरना आता है। क्या तुमको आता है?”

पापा की बात सुनकर वे दोनों चुप हो गईं। दोनों ने झरने में नहाते बच्चों की तस्वीरें खींची। उनके पापा ने टिनी-मिनी और उसकी मम्मी को झरने के पास खड़े रखकर तस्वीरें खींची। उनकी मम्मी ने गाँव के बच्चों को अपने पास बुलाया और उन्हें बिस्कुट और मिठाई बांटी। टिनी-मिनी ने उनसे बातें की और तस्वीरें भी खिंचवाई। नाश्ता करने के बाद, वे सभी डॉन हिल के लिए रवाना हो गए।

डॉन हिल डांग का सबसे ऊँचा पर्वत था। यह पर्वत सापुतारा से भी ऊँचा था। उनकी कार घुमावदार सड़क से ऊपर जा रही थी। सड़क संकरी होने के कारण, सामने से अगर कोई वाहन आ जाए तो कार को सड़क की एक तरफ पार्क करके, उसे गुजरने देना पड़ता था। ऊँचे पर्वत मानो कोहरे की चादर लपेटे खड़े थे। घाटी में गहरी हरियाली की चद्दर बिछी हुई थी। टिनी-मिनी पहली बार इतना सुंदर दृश्य देख रही थी।

डॉन हिल की चोटी पर पहुंचने के बाद, उनके मम्मी-डैडी ने बारी-बारी सभी की तस्वीरें खींची। वीडियो भी बनाया। टिनी-मिनी ने रिमझिम बरसती बारिश में डांस किया। ठंडी हवा की लहरों के साथ झूमकर मौसम के मजे लिए। फिर से सभी कार में बैठे। कार ने धीरे-धीरे पहाड़ उतरना शुरू किया। शाम हो गई थी। अब भी बारिश चालू थी।

थोड़ी दूर जाते ही उनके दाईं ओर के पिछले पहिए में पंचर हो गया। उनके पापा ने रोड की साइड में कार खड़ी कर दी। वे नीचे उतरे। पापा को टायर बदलने में मदद करने के लिए, टिनी-मिनी भी नीचे उतरी। पापा ने डिक्की खोलकर उसमें से दूसरा टायर और जेक निकाला। जैसे ही वे पंक्चर के लिए टायर खोलने वाले थे, एक तेंदुआ पीछे से आकर उनके सामने खड़ा हो गया। तेंदुए को देखकर टिनी-मिनी चीख पडे।

“पापा… मम्मी…!”

दोनों की चीख सुनकर कार में बैठी मम्मी नीचे आ गई। तेंदुए को देखकर वह भी डर गई। तेंदुआ धीरे-धीरे उनके पापा की ओर बढ़ने लगा। तेंदुआ इतने नजदीक था कि भागना भी मुश्किल था। चतुर टिनी-मिनी ने एक-दूसरे को देखा और इशारे में बात की। तेंदुए को आगे बढ़ते देख मिनी डरते हुए बोली,” कैसे हो तेंदुआ भैया…?” तेंदुआ उसकी ओर देखने लगा।

टिनी ने पूछा,” क्या आप इस जंगल में रहते हो?”

तेंदुआ मुस्कुराया, उसने कहा, “हां… नीचे उस पहाड़ की गुफा में मेरा घर है।”

“वाह क्या बात है। आपका घर तो बहुत सुंदर होगा” मिनी ने कहा।

तेंदुआ बोला, “बहुत सुंदर है। मैं तुम्हें अपने घर ले जाने आया हूँ। मेरे दो बच्चे और उसकी माँ तुम्हें देखकर खुश हो जाएँगे।”

टिनी ने कहा “तो चलिए…वैसे भी हमारी कार पंचर हो गई है।”

“मैं तुम सबको लेकर चलूंगा। वैसे भी हम सब दो दिनों से भूखे हैं।”

तेंदुए की बात सुनकर टिनी-मिनी और उसके मम्मी-पप्पा सहम गए। उन्हें एहसास हो गया कि तेंदुआ उन्हें घर ले जाएगा और सभी को मार के खा जाएगा। अब क्या करें…? ना कहने पर भी तेंदुआ हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा, हम हां कहेंगे तो भी हमें मरना पड़ेगा। कुछ सोचकर टिनी जोर से हंसने लगी। उसने तेंदुए को कहा, “तेंदुए भैया… आप इतने बड़े जंगल में दो दिन से भूखे हैं, यह बात हजम नहीं हुई।”

“अरे… मैं सच बोल रहा हूँ। दो दिनों में एक भी शिकार नही मिला है।”

मिनी बोली, “तेंदुए भैया… अगर आप हमारी तरह शाकाहारी होते तो भूखे रहने की नौबत नहीं आती।”

तेंदुए ने गरजते हुए कहा, “अबे ओ चींटी… तुम मुझे क्या सिखाती हो? अगर हम इस पेड़ की पत्तियां और घास खाने लगे तो हम ताकतवर कैसे होंगे?”

“आप ठीक कह रहे हैं।” टिनी ने बाजी संभालते हुए कहा। हम आप के साथ आने के लिए तैयार है लेकिन आपका घर बहुत दूर है, हम इतना नहीं चल सकते। हम लोग कार में आते हैं।”

टिनी-मिनी के पापा ने कहा, “चलो तुम सब गाड़ी में बैठो। मैं अभी टायर बदल देता हूँ।”

“पापा, मैं आप की मदद करूँगी।” कहते हुए मिनी पापा के पास बैठ गई।

“मैं भी मदद करूँगी और यह तेंदुए भैया भी मदद करेंगे।” टिनी ने तेंदुए की ओर देखते हुए कहा।

तेंदुआ गर्व से कहने लगा, “हां, हां, लाओ मैं ही टायर बदल देता हूँ। वैसे भी ये तुम्हारा काम नहीं है।” और तेंदुआ टायर बदलने लगा। उस समय टिनी-मिनी ने अपने मम्मी-पप्पा को कार में बैठने के लिए इशारा किया। वे दोनों जल्दी से कार में बैठ गए। टायर बदलते ही तेंदुआ खड़ा हो गया। उसने कहा-

“देखा… मैंने कितनी जल्दी टायर बदल दिया?”

मिनी बोली, “हाँ यार, तुम तो बहुत बड़े ताकतवर हो।” टिनी ने डिक्की में टायर और जैक रख दिया।

तेंदुआ बोला, “अब चलो मेरे घर, मेरे मेहमान बनकर, मेरे बच्चे भूखे मर रहे होंगे।”

टिनी ने कहा, “हाँ, चलो आगे बढ़के रास्ता दिखाओ, हम कार से आते हैं।” टिनी-मिनी कार में बैठ गए। टिनी ने कार का दरवाजा और शीशा बंद कर दिया। उनके पापा ने कार को ढलान से नीचे उतार कर कार की स्पीड बढ़ा दी। यह देखकर तेंदुआ जोर से चिल्लाया।

“मेरा घर उस तरफ नहीं, इस तरफ है।”

टिनी शीशा उतारकर बोली, “लेकिन हमारा घर तो इसी तरफ है। बाय-बाय…!” टिनी-मिनी दोनों हँसने लगे।

यह सुनकर तेंदुआ कार के पीछे भागने लगा। फिर थककर रुक गया। कार के पिछले शीशे में से टिनी-मिनी ने देखा तो तेंदुआ मेमने की तरह मुंह लटकाए खड़ा था।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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