Hindi Katha: प्राचीन समय की बात है – एक बार महान तपस्वी महर्षि च्यवन स्नान करने के लिए नर्मदा नदी के तट पर गए। जब वे नदी के जल में उतरने लगे तो एक भयंकर विषधर सर्प ने उन्हें अपने पाश में जकड़ लिया और उन्हें खींचकर पाताल लोक में ले गया। सर्प के भय […]
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रुरु – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: एक बार स्वर्ग की परम सुंदरी अप्सरा मेनका ने ऋषि विश्रवावसु के साथ कुछ समय बिताया। इसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। कुछ समय के पश्चात् मेनका ने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया। इस कन्या को वह स्थूलकेश ऋषि के आश्रम के पास छोड़ आई। स्थूलकेश ऋषि बड़े धर्मात्मा, सत्यवादी और परम […]
मत्स्यगंधा – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: एक समय की बात है, चेदि देश में उपरिचर नामक एक धार्मिक राजा राज्य करते थे। उनकी सुंदर पत्नी का नाम गिरिका था। एक बार ऋतुकाल के बाद गिरिका ने राजा उपरिचर से संतान प्राप्ति की कामना प्रकट की । लेकिन पितृों की आज्ञा से राजा को शिकार के लिए वन में जाना […]
बंधन – मुक्ति – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: शुकदेव युवा हुए तो व्यास जी को उनके विवाह की चिंता सताने लगी । एक बार व्यास जी ने शुकदेव को अपने पास बुलाया और बोले – ” हे पुत्र शुकदेव ! अब तुम युवा हो गए हो और साथ ही तुम्हें अनेक श्रेष्ठ सिद्धियाँ भी प्राप्त हो गई हैं। इसलिए तुम्हें ब्रह्मचर्य […]
शुकदेव जी का जन्म – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: देवी भगवती दुर्गा निर्गुण हैं, सर्वव्यापी हैं जिनका न कभी जन्म होता है, न मृत्यु। उन्हीं भगवती की सात्विक, राजसी और तामसी शक्तियाँ स्त्री की आकृति में महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में प्रकट होती हैं। संसार की अव्यवस्था दूर करने के लिए ये शक्तियाँ प्रत्येक युग में अवतार धारण करती हैं। […]
स्यमंतक मणि की चोरी – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: द्वापर युग की बात है, महाराज ‘ यदु’ की वंश परम्परा में ‘निघ्न’ नाम के एक महान प्रतापी राजा हुए, जिनके सत्राजित और प्रसेन नाम के दो पुत्र हुए। राजा सत्राजित द्वारिका में सुखपूर्वक रहते थे। सत्राजित भगवान् सूर्य के परम भक्त थे। एक बार सत्राजित ने भगवान् सूर्यदेव को प्रसन्न करने के […]
महर्षि कण्व – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: पूर्वकाल में कण्व नामक एक प्रसिद्ध महर्षि हुए। कण्व मुनि बड़े विद्वान और तपस्वी थे। वे भूख से पीड़ित होकर अनेक स्थानों पर भ्रमण करते रहते थे, लेकिन कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते थे। एक दिन वे महर्षि गौतम के आश्रम में पहुँचे। गौतम बड़े अतिथि – भक्त थे। उन्होंने विभिन्न […]
अतिथि सत्कार – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: प्राचीन समय की बात है, ब्रह्मगिरि पर करुष नामक एक व्याध (शिकारी) रहता था। वह बड़ा क्रूर, असत्यवादी और पाप में संलग्न रहने वाला प्राणी था। एक बार वह वन में शिकार करने गया । वहाँ उसने अनेक पक्षियों को पकड़कर पिंजरे में बंद कर लिया। अनेक मृगों का वध किया। इस प्रकार […]
दैत्य सिंधुसेन – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: प्राचीन समय की बात है, सिंधुसेन नामक एक दैत्य ने देवताओं को परास्त कर यज्ञ छीनकर उसे रसातल में छिपा दिया। यज्ञ के अभाव में देवताओं का बल, ऐश्वर्य और वैभव नष्ट होने लगा। तब उन्होंने भगवान् विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। भगवान् विष्णु उन्हें सांत्वना देते हुए बोले – “देवताओ ! […]
गोदावरी – उपनिषदों की कथाएँ
Hindi Katha: देवाधिदेव महादेव की जटा में समाहित परम पुण्यमय गंगा के दो भेद हैं, क्योंकि उन्हें पृथ्वी पर उतारने वाले दो व्यक्ति थे। गंगा का एक भाग क्षत्रिय राजा भगीरथ ने पृथ्वी पर उतारा। दूसरा भाग तप और समाधि में लीन रहने वाले गौतम ऋषि ने पृथ्वी तक पहुँचाया। इसकी कथा इस प्रकार है […]
