रानू का मशहूर और लोकप्रिय उपन्यास कांटों का उपहार अब ऑनलाइन पढ़ें, सिर्फ गृहलक्ष्मी डॉट कॉम पर….
Tag: hindi fiction
दादी की मिली सीख
तब मैं चौथी कक्षा में पढ़ती थी। गरमी की छुट्टियों में मेरी कॉलोनी की सहेलियां मेरे घर खेलने आया करती थी। मेरी दादी मां छुट्टियों में चावल और उड़द के पापड़ बना छत पर सुखाती थी। एक दिन मम्मी ऑफिस गई हुई थी। दादी मां ने चावल के पापड़ बनाए थे। मेरी सहेली सुप्रिया बोली, ‘मुझे चावल के पापड़ […]
बहके कदम
स्कूल की आधी छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चों का एक विशाल समूह ऐसे बाहर लपका, मानो अचानक किसी बाड़े का गेट खुला हो। पता नहीं यह बच्चे ऐसे क्यूं भागते हैं, मानो किसी जेल से छूटे हों। शायद बच्चों के स्वभाव में ही गति होती है। इसी भीड़ में मीनू और गीता बड़े हौले […]
कबूतर दीदी
ये वाकया काफी पुराना है, पर आज भी ताजा है मेरे जेहन में। मैं अपनी मम्मी के साथ सूट के लिए कपड़ा लेने बाजार गई। दुकानदार ने कई सूट दिखाए पर उनमें से मुझे कुछ भी पसंद नहीं आया। तब उसने कुछ और सूट दिखाए कि ये अभी आए हैं, लेटेस्ट हैं। उनमें से […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सन्धि वार्ता
गृहलक्ष्मी की कहानियां : टिफिन बन गया कि नहीं ? मुझे देर हो रही है।” राजाराम ने चिल्लाकर राजरानी से कहा। उधर से कोई जवाब नहीं आया। राजाराम अंदर देखने गया राजरानी बिस्तर पर लेटी थी। इसका मतलब था, आज भी खाना नहीं बनेगा। महाभारत की रचना शुरू हो चुकी थी। महारानी लेटी पड़ी है […]
तेरे हाथ का पानी मीठा
घटना तब की है जब मेरी आयु लगभग 9-10 वर्ष की रही होगी। मेरे मामाजी छुट्टियों में आए हुए थे। वे हमेशा मेरे हाथ से ही पानी मंगवा कर पीते थे। पानी मांगते वक्त मुझे बहलाने के लिए वे कहते थे, ‘सोनिका तेरे हाथ का पानी मीठा लगता है, तू ही मुझे पानी लाकर पिलाया कर। ये सुनकर […]
कांटों का उपहार- पार्ट 5
रानू का मशहूर और लोकप्रिय उपन्यास कांटों का उपहार अब ऑनलाइन पढ़ें, सिर्फ गृहलक्ष्मी डॉट कॉम पर….
गाने के बजाए लिप्सिंग करना
बात उन दिनों की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ा करती थी। हमें अपने सीनियर्स को फेयरवेल देना था। फेयरवेल के कार्यक्रम में लगभग सभी लड़कियों को डांस, नाटक, गाना जैसी विविध एक्टिविटी में हिस्सा लेना था। जो लड़कियां कहीं भी सलेक्ट नहीं हुई, उन्हें पानी-नाश्ता आदि सर्व करने का काम दिया गया था। मेरा भी किसी […]
गोटा लेने की जिद
मैं तब लगभग तीन वर्ष की थी और शब्दों को स्पष्ट नहीं बोल पाती थी। मुझे बर्फ का गोला बहुत पसंद था। एक दिन मैं पापा से बोली, ‘मुझे ‘गोटा (बर्फ का गोला) चाहिए। बहुत जिद करने पर पापा मेरे लिए गोटा (हनुमान जी वाला गोटे का खिलौना) ले आए। उसे देखकर मैं और ज्यादा […]
आपसे कम कड़वे हैं
मैं अपने घर का सामान अपने पति से ही मंगवाती थी। पर जब भी कोई सामान खरीद कर लाते तो मैं उसमें मीनमेख निकालने लगती। कभी आलू अन्दर से काले हैं तो कभी सेब फीके हैं, नारियल तोड़ने पर खराब निकल जाते हैं। मेरी इस आदत से ये इतने खीजते रहते हैं। एक दिन जब […]
