सुबह का समय था। आनंद नीचे झुका सूटकेस में अपने कपड़े भर रहा था और मनु दर्पण के सामने खड़ी अपने बाल संवार रही थी। दोनों के बीच ऐसा मौन था जिसके टूटने की संभावना ही न थी। किन्तु फिर भी मौन टूट गया। मनु ने उसी मुद्रा में आनंद से पूछा- ‘जा रहे हो?’ […]
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अभिशाप – राजवंश भाग-15
निखिल ने इतनी अधिक पी थी कि उठने की शक्ति न रही। उसने उठने का प्रयास किया तो चकराकर सोफे पर गिर पड़ा। पाशा ने उसे शीघ्रता से संभाला और बोला- ‘आपको इतनी अधिक न पीनी चाहिए थी सर!’ अभिशाप नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1 ‘पाशा!’ लंबी-लंबी सांसें […]
अभिशाप – राजवंश भाग-14
‘आप-आपका नाम?’ ‘समझदार लोग पेड़ गिनने से नहीं-आम खाने से मतलब रखते हैं पूरन जी! मैं आपसे कुछ कहने आया हूं।’ ‘बैठिए।’ पूरन ने हकलाते हुए कहा और एक कुर्सी निखिल की ओर सरका दी। अभिशाप नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1 निखिल बैठ गया। कीमती वस्त्रों में वह […]
अभिशाप – राजवंश भाग-13
फिल्म तैयार हो चुकी थी। उसका प्रिंट देखकर निखिल ने अनमने ढंग से कहा- ‘ठीक है।’ पाशा उसे ध्यान से देख रहा था। फिर जब निखिल ने अपने लिए शराब का गिलास तैयार किया तो पाशा उससे बोला- ‘सर! क्या आपकी तबीयत ठीक नहीं।’ अभिशाप नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर […]
अभिशाप – राजवंश भाग-12
‘अब मैं जाऊं?’ ‘ऊंहु! अभी नहीं।’ ‘देखो-काली घटाएं घिर रही हैं।’ ‘तो क्या हुआ?’ अखिल ने पूछा और गोद में लेटी शिल्पा के होंठों पर उंगली फिराने लगा। दोनों एक पार्क में झाड़ियों के पीछे बैठे थे। अभिशाप नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1 शिल्पा की आंखें बंद थीं। […]
अभिशाप – राजवंश भाग-11
अस्वस्थ होने के कारण राजाराम आज बैंक न गया था और चारपाई पर बैठा आज का समाचार-पत्र देख रहा था। कौशल्या देवी पड़ोस में गई थी। कुछ समय पश्चात् वह थकी-हारी-सी घर लौटी और राजाराम से बोली- ‘आप बिलकुल ठीक कहते थे। पूरे मुहल्ले में उसी बात की चर्चा हो रही है।’ अभिशाप नॉवेल भाग […]
अभिशाप – राजवंश भाग-10
मनु आज सुबह से ही व्यस्त थी और नौकर के साथ पूरी कोठी की इस भांति सफाई करा रही थी, मानो वहां कोई पार्टी होने वाली हो। आनंद इन सब बातों से अलग था और कमरे में बैठा बार-बार क्लॉक को देख रहा था। सुबह के आठ बज चुके थे और किसी ने उससे नाश्ते […]
अभिशाप – राजवंश भाग-9
गोपीनाथ ने प्याला उठाकर चाय की चुस्की ली और आनंद से बोले- ‘निखिल चाहता है कि मैं अपनी कंपनी की एक शाखा नागपुर में भी खोल दूं और सरकारी ठेकों की ओर विशेष रूप से ध्यान दूं।’ आनंद ने कुछ न कहा। उनका ध्यान गोपीनाथ की बातों की ओर था भी नहीं। वह तो बड़ी […]
अभिशाप – राजवंश भाग-8
मनु ने दर्पण में अंतिम बार अपनी छवि देखी तो गर्व से मुस्कुरा उठी। अपनी सुंदरता पर उसे बचपन से ही गर्व था। दर्पण से हटकर उसने वॉल क्लॉक पर नजर डाली। अभी तीन बजे थे। आनंद को ठीक चार बजे आना था और वह उससे पहले ही घर से निकल जाना चाहती थी। सोचा […]
अभिशाप – राजवंश भाग-7
मनु अपनी ससुराल में तीन दिन रही और इसके पश्चात् आनंद के साथ अपने पिता के पास आ गई। आनंद के पैतृक मकान में केवल दो कमरे थे और दो कमरों में दो परिवारों का निर्वाह वैसे भी कठिन था। इसके अतिरिक्त बेटी के विवाह के पश्चात् गोपीनाथ भी अकेले रह गए थे और आनंद […]
